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Ghaziabad News: वारंटी में नहीं बदला वाहन, 2.90 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश
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गाजियाबाद। वारंटी में होने के बावजूद कार की मरम्मत नहीं करने और शिकायत के बावजूद वापस नहीं करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कंपनी को 2.90 लाख रुपये वाहन स्वामी को भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान करने को भी कहा है।
हापुड़ के न्यू पन्नापुरी निवासी सुनील कुमार ने 11 सितंबर 2018 को आयोग में अर्जी लगाई थी। आयोग को उन्होंने बताया कि तीन अप्रैल 2016 को रेनॉल्ट कंपनी की क्विड कार 3.92 लाख रुपये में खरीदी थी। 27 फरवरी 2018 को 18,735 किलोमीटर चलने के बाद कार की कस्टल आटोमोबाइल हापुड़ में सर्विस कराई। बताया कि गाड़ी के ब्रेक व क्लिप काम नहीं कर रहे हैं। एजेंसी से ब्रेकपैड बदलने के साथ ही क्लच प्लेट की ग्रीसिंग की गई। इसके बाद सुनील 20 अप्रैल 2018 को गाड़ी लेकर वाराणसी घूमने गए। वहां पर ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। परिचालक की साइड में पहिए से आवाज आने लगी। वाराणसी में एजेंसी पर दिखाने पर मैकेनिक ने बताया कि परिचालक साइड के ब्रेकपैड खत्म हो चुके हैं। पहिए के ड्रम में पहले से ही फाल्ट था, जिससे नीचे जैक लगाकर अगले दोनों पहिया घुमाने पर रुक रहा था। फाल्ट की वजह से ब्रेक ऑटोमेटिक लग जाते थे। एलाइनमेंट खराब होने से टायर भी घिस गया था। शिकायत के बाद कंपनी की तरफ से कहा गया कि गाड़ी के आर्म्स में फाल्ट है। इसलिए इन्हें बदलवा लीजिए। वाहन स्वामी ने काम कराने को कहा तो कंपनी की तरफ से बताया कि कार्य वारंटी में नहीं होगा। काम कराने के लिए रुपये की मांग की। 5,40,250 रुपये जमा करके गाड़ी की आर्म्स बदलवाने के बाद उन्होंने अन्य कार्य कराया, इसके बावजूद गाड़ी सही नहीं हुई। 19 जून 2018 को बताया गया कि इंजन में फाल्ट है। गाड़ी एक महीने तक कस्टल आटोमोबाइल हापुड़ में खड़ी रही। लापरवाही के कारण इंजन में फाल्ट हो गया था। मामले में कंपनी की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ। अदालत ने मामले में एक पक्षीय फैसला सुनाया है।
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हापुड़ के न्यू पन्नापुरी निवासी सुनील कुमार ने 11 सितंबर 2018 को आयोग में अर्जी लगाई थी। आयोग को उन्होंने बताया कि तीन अप्रैल 2016 को रेनॉल्ट कंपनी की क्विड कार 3.92 लाख रुपये में खरीदी थी। 27 फरवरी 2018 को 18,735 किलोमीटर चलने के बाद कार की कस्टल आटोमोबाइल हापुड़ में सर्विस कराई। बताया कि गाड़ी के ब्रेक व क्लिप काम नहीं कर रहे हैं। एजेंसी से ब्रेकपैड बदलने के साथ ही क्लच प्लेट की ग्रीसिंग की गई। इसके बाद सुनील 20 अप्रैल 2018 को गाड़ी लेकर वाराणसी घूमने गए। वहां पर ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। परिचालक की साइड में पहिए से आवाज आने लगी। वाराणसी में एजेंसी पर दिखाने पर मैकेनिक ने बताया कि परिचालक साइड के ब्रेकपैड खत्म हो चुके हैं। पहिए के ड्रम में पहले से ही फाल्ट था, जिससे नीचे जैक लगाकर अगले दोनों पहिया घुमाने पर रुक रहा था। फाल्ट की वजह से ब्रेक ऑटोमेटिक लग जाते थे। एलाइनमेंट खराब होने से टायर भी घिस गया था। शिकायत के बाद कंपनी की तरफ से कहा गया कि गाड़ी के आर्म्स में फाल्ट है। इसलिए इन्हें बदलवा लीजिए। वाहन स्वामी ने काम कराने को कहा तो कंपनी की तरफ से बताया कि कार्य वारंटी में नहीं होगा। काम कराने के लिए रुपये की मांग की। 5,40,250 रुपये जमा करके गाड़ी की आर्म्स बदलवाने के बाद उन्होंने अन्य कार्य कराया, इसके बावजूद गाड़ी सही नहीं हुई। 19 जून 2018 को बताया गया कि इंजन में फाल्ट है। गाड़ी एक महीने तक कस्टल आटोमोबाइल हापुड़ में खड़ी रही। लापरवाही के कारण इंजन में फाल्ट हो गया था। मामले में कंपनी की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ। अदालत ने मामले में एक पक्षीय फैसला सुनाया है।
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