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Ghaziabad News: पुलिस छावनी बना रहा यूपी गेट सामान्य रफ्तार में चला यातायात
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कौशांबी। किसानों के दिल्ली कूच के एलान पर बुधवार को भी यूपी गेट पुलिस छावनी बना रहा। ड्रोन से भी निगरानी की गई। जिलेभर में जगह-जगह पुलिस वाहनों की चेकिंग करती रही। इसका नतीजा यह रहा कि कोई भी किसान यूपी गेट तक नहीं पहुंच सका। कोई हंगामा-प्रदर्शन न होता देख पुलिस ने एनएच-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की दो-दो लेन खोल दीं। इन पर यातायात सामान्य रफ्तार से चला।
मंगलवार को स्थिति इससे काफी अलग थी। पुलिस ने एक-एक लेन ही खोल रखी थी। इससे ट्रैफिक जाम हो गया। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई थी। इन हालात को देख आईटी कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने (वर्क फ्रोम होम) की अनुमति दे दी थी। इसका नतीजा यह रहा कि बुधवार को वाहन भी कम संख्या में चले। यातायात का दबाव कम होने की वजह बड़ी संख्या में लोगों का मेट्रो की ओर रुख करना भी रही।
हालांकि, वैशाली-डाबर रोड, कौशांबी-आनंद विहार बॉर्डर, सीआईएसएफ रोड और मोहन नगर-जीटी रोड से अप्सरा बॉर्डर पर वाहनों का दबाव रहा लेकिन ट्रैफिक जाम की स्थिति नहीं बनी। मंगलवार को स्थिति बिगड़ने की वजह यूपी गेट तक 20 किसानों का पहुंच जाना रही थी। इससे पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी थी और सीमाओं को लगभग सील कर दिया था। गाजीपुर की तरफ की सर्विस लेन भी बंद कर दी गई थी।
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किसान नेताओं के फोन सर्विलांस पर
किसान संगठनों ने 16 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। इस पर पुलिस चौकस हो गई है। किसान नेताओं के मोबाइल फोन सर्विलांस पर ले लिए गए हैं। उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी की जा रही है। खुफिया पुलिस किसान नेताओं पर नजर बनाए हुए है। बसों और ट्रेनों में चेकिंग करके देखा जा रहा है कि कहीं किसानों का कोई जत्था तो दिल्ली की तरफ नहीं जा रहा है।
बयान
किसान संगठनों के नहीं पहुंचने से स्थिति सामान्य रही। हालांकि, पुलिस बल को हर परिस्थिति के लिए अलर्ट किया हुआ है। किसानों की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। - निमिष पाटिल, डीसीपी
हिरासत में रहे किसान नेता
गाजियाबाद। किसान आंदोलन को देखते हुए जिले के तमाम किसान नेता बुधवार को भी पुलिस हिरासत में रहे। पुलिस ने उनको अपनी मर्जी से घर से निकलने की अनुमति नहीं दी। रात में भी उनके घर पर पुलिस तैनात रही।
इसके अलावा ईस्टर्न पेरीफेरलवे पर भी पुलिसबल तैनात रहा। सबसे ज्यादा सख्ती कुंडली की ओर जाने वाले रास्ते पर देखने को मिली। यहां दुहाई और मसूरी में टोल से पहले पुलिस ने बैरियर लगाकर चेकिंग की। पूछताछ के बाद ही लोगों को आगे जाने की अनुमति दी गई। एक लेन को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिससे टोल के आसपास जाम की स्थिति बनी रही।
रईसपुर में भाकियू अराजनैतिक के प्रदेश उपाध्यक्ष राजबीर सिंह ने बताया कि सरकार के इशारे पर पुलिस-प्रशासन किसानों की आवाज को दबाने का काम कर रहा है। किसानों को अपना काम तक नहीं करने दिया जा रहा है। अधिकारियों से बात की गई है। बृहस्पतिवार तक किसानों के यहां से पुलिस नहीं हटाई गई तो जिले में भी बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
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मंगलवार को स्थिति इससे काफी अलग थी। पुलिस ने एक-एक लेन ही खोल रखी थी। इससे ट्रैफिक जाम हो गया। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई थी। इन हालात को देख आईटी कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने (वर्क फ्रोम होम) की अनुमति दे दी थी। इसका नतीजा यह रहा कि बुधवार को वाहन भी कम संख्या में चले। यातायात का दबाव कम होने की वजह बड़ी संख्या में लोगों का मेट्रो की ओर रुख करना भी रही।
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हालांकि, वैशाली-डाबर रोड, कौशांबी-आनंद विहार बॉर्डर, सीआईएसएफ रोड और मोहन नगर-जीटी रोड से अप्सरा बॉर्डर पर वाहनों का दबाव रहा लेकिन ट्रैफिक जाम की स्थिति नहीं बनी। मंगलवार को स्थिति बिगड़ने की वजह यूपी गेट तक 20 किसानों का पहुंच जाना रही थी। इससे पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी थी और सीमाओं को लगभग सील कर दिया था। गाजीपुर की तरफ की सर्विस लेन भी बंद कर दी गई थी।
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किसान नेताओं के फोन सर्विलांस पर
किसान संगठनों ने 16 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। इस पर पुलिस चौकस हो गई है। किसान नेताओं के मोबाइल फोन सर्विलांस पर ले लिए गए हैं। उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी की जा रही है। खुफिया पुलिस किसान नेताओं पर नजर बनाए हुए है। बसों और ट्रेनों में चेकिंग करके देखा जा रहा है कि कहीं किसानों का कोई जत्था तो दिल्ली की तरफ नहीं जा रहा है।
बयान
किसान संगठनों के नहीं पहुंचने से स्थिति सामान्य रही। हालांकि, पुलिस बल को हर परिस्थिति के लिए अलर्ट किया हुआ है। किसानों की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। - निमिष पाटिल, डीसीपी
हिरासत में रहे किसान नेता
गाजियाबाद। किसान आंदोलन को देखते हुए जिले के तमाम किसान नेता बुधवार को भी पुलिस हिरासत में रहे। पुलिस ने उनको अपनी मर्जी से घर से निकलने की अनुमति नहीं दी। रात में भी उनके घर पर पुलिस तैनात रही।
इसके अलावा ईस्टर्न पेरीफेरलवे पर भी पुलिसबल तैनात रहा। सबसे ज्यादा सख्ती कुंडली की ओर जाने वाले रास्ते पर देखने को मिली। यहां दुहाई और मसूरी में टोल से पहले पुलिस ने बैरियर लगाकर चेकिंग की। पूछताछ के बाद ही लोगों को आगे जाने की अनुमति दी गई। एक लेन को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिससे टोल के आसपास जाम की स्थिति बनी रही।
रईसपुर में भाकियू अराजनैतिक के प्रदेश उपाध्यक्ष राजबीर सिंह ने बताया कि सरकार के इशारे पर पुलिस-प्रशासन किसानों की आवाज को दबाने का काम कर रहा है। किसानों को अपना काम तक नहीं करने दिया जा रहा है। अधिकारियों से बात की गई है। बृहस्पतिवार तक किसानों के यहां से पुलिस नहीं हटाई गई तो जिले में भी बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।