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Ghaziabad News: भांजी के साथ दुष्कर्म के दोषी मामा को सात साल की कैद
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गाजियाबाद। 11 वर्षीय भांजी के साथ दुष्कर्म करने वाले मामा को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या दो दीपिका तिवारी ने सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 20 हजार अर्थदंड लगाया है।
घटना सिहानी गेट थाना क्षेत्र में 18 मई 2018 को हुई थी। पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि वह अपने पति और चार बच्चों के साथ किराये के मकान में रहती है। मकान में बराबर वाले कमरे में उसका सगा भाई रहता है। उसकी 11 वर्षीय बड़ी बेटी के साथ आठ माह से उसका भाई दुष्कर्म कर रहा था। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देता है। 18 मई 2018 की रात में उनकी बेटी के साथ भाई ने फिर दुष्कर्म किया। तहरीर मिलने पर सिहानी गेट पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिए। मेडिकल रिपोर्ट व पुलिस की विवेचना में आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। इस दौरान न्यायालय में छह लोगों ने गवाही दी। किशोरी व उसके माता-पिता बयान से पलट गए। इस वजह से कोर्ट ने मामा को दुष्कर्म के आरोप से मुक्त कर दिया, लेकिन अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार बखरवा ने कोर्ट में पुलिस, मेडिकल करने वाले चिकित्सक व एक अन्य गवाह और सबूत के आधार पर केस की पैरवी और मजबूती से की। कोर्ट ने बयान और साक्ष्य के आधार पर मामा को पाक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया। शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार बखरवा ने बताया कि आरोपित को सात वर्ष की कठोर कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
कोर्ट की टिप्पणी: मां जानबूझकर झूठी गवाही दी
न्यायालय ने कहा कि किशाेरी की मां ने जानबूझकर कोर्ट में झूठी गवाही दी है। यह धारा 344 सीआरपीसी के तहत गंभीर अपराध है। न्यायालय ने सत्र लिपिक को आदेशित करते हुए कहा कि मां के खिलाफ वाद दर्ज कर उसके खिलाफ नोटिस जारी किया जाए।
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क्या सजा है झूठी गवाही कोर्ट में देने पर
धारा 344 सीआरपीसी न्यायालय की कार्यवाही में बाधा डालने से संबंधित है। अदालत को यह धारा शक्ति देती है कि इसमें अधिकतम दो वर्ष तक का साधारण कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
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घटना सिहानी गेट थाना क्षेत्र में 18 मई 2018 को हुई थी। पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि वह अपने पति और चार बच्चों के साथ किराये के मकान में रहती है। मकान में बराबर वाले कमरे में उसका सगा भाई रहता है। उसकी 11 वर्षीय बड़ी बेटी के साथ आठ माह से उसका भाई दुष्कर्म कर रहा था। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देता है। 18 मई 2018 की रात में उनकी बेटी के साथ भाई ने फिर दुष्कर्म किया। तहरीर मिलने पर सिहानी गेट पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिए। मेडिकल रिपोर्ट व पुलिस की विवेचना में आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। इस दौरान न्यायालय में छह लोगों ने गवाही दी। किशोरी व उसके माता-पिता बयान से पलट गए। इस वजह से कोर्ट ने मामा को दुष्कर्म के आरोप से मुक्त कर दिया, लेकिन अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार बखरवा ने कोर्ट में पुलिस, मेडिकल करने वाले चिकित्सक व एक अन्य गवाह और सबूत के आधार पर केस की पैरवी और मजबूती से की। कोर्ट ने बयान और साक्ष्य के आधार पर मामा को पाक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया। शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार बखरवा ने बताया कि आरोपित को सात वर्ष की कठोर कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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कोर्ट की टिप्पणी: मां जानबूझकर झूठी गवाही दी
न्यायालय ने कहा कि किशाेरी की मां ने जानबूझकर कोर्ट में झूठी गवाही दी है। यह धारा 344 सीआरपीसी के तहत गंभीर अपराध है। न्यायालय ने सत्र लिपिक को आदेशित करते हुए कहा कि मां के खिलाफ वाद दर्ज कर उसके खिलाफ नोटिस जारी किया जाए।
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क्या सजा है झूठी गवाही कोर्ट में देने पर
धारा 344 सीआरपीसी न्यायालय की कार्यवाही में बाधा डालने से संबंधित है। अदालत को यह धारा शक्ति देती है कि इसमें अधिकतम दो वर्ष तक का साधारण कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।