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उत्तराखंड की महिलाओं ने मनाया हरेला पर्व
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\n\nइसकी फोटो है\n\nउत्तराखंड की महिलाओं ने मनाया हरेला पर्व\n\n- प्रकृति में हरियाली और संपन्नता बनी रहे इसके लिए महिलाओं ने की पूजा\n\n- इस मौके पर महिलाओं ने घर पर और स्थानीय पार्क में किया पौधरोपण\n\n
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माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। जी रया जागि रया...कुमांउनी गाने के बोल के साथ टीएचए में रह रही उत्तराखंड की महिलाओं ने प्रकृति और परिवार की संपन्नता व एकता के लिए हरेला पर्व मनाया। इस दौरान घर में पूजा अर्चना के साथ ही कई जगह महिलाओं ने सोसायटी के पार्क में वृक्षारोपण भी किया।\n\nहरेला पर्व के दौरान पार्श्वनाथ सोसायटी में लायंस क्लब वैभवी के सदस्यों ने सोसायटी के पार्क में पौधरोपण किया। वहीं शिप्रा सनसिटी में रहने वाली गायत्री ने बताया कि उन्होंने घर पर ही बीज बोये थे जिसकी पूजा अर्चना की गई। गायत्री ने बताया कि यह पर्व परिवार में एकता का भी घोतक है। दरअसल परिवार का बड़ा सदस्य ही इन बीजों को बोता है, भले ही लोग अलग-अलग रह रहे हों लेकिन जब तक परिवार एक है परिवार का सबसे बड़ा सदस्य ही यह पूजा करता है और सभी को आशीर्वाद देता है। प्रकृति की तरह हरे भरे और संपन्न रहने की कामना की जाती है। वहीं वसुंधरा में रहने वाली रजनी जोशी ने अपनी सासु मां के साथ घर पर तुलसी के पौधे लगाए और हरेला पर्व मनाया।\n\nइनसेट\n\nक्या है हरेला पर्व\n\nहरेला का अर्थ होता है ‘हरियाली का दिन’। हरेला उत्तराखंड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला पर्व है। जो श्रावण के महीने में मनाया जाता है। यह पर्व मुख्यतः प्रकृति और परिवार में एकता का पर्व है। इसके तहत घर के बड़े, श्रावण महीना लगने से दस दिन पहले एक बर्तन या टोकरी में कुछ मिट्टी भर के सात तरह के अलग-अलग बीज *(धान, गेहूँ, जौ, उड़द, गहत, सरसों और भट्ट)* बो देते हैं। पांच, सात या नौ अनाजों को मिलाकर हरेले से नौ दिन पहले दो बर्तनों में उसे बोया जाता है। जिसे मंदिर के कक्ष में रखा जाता है। अंकुरित पौधों को हरेला पर्व के दिन काटकर भगवान के चरणों में चढ़ा कर पूजा की जाती है व अच्छी फसल की कामना की जाती है।\n\n\n----------\n\nनिशा ठाकुर\n\n\n\n\n
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