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Delhi HC : उद्योगपति बीना मोदी, वकील ललित भसीन के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक, जानें क्या है मामला

Wed, 18 Mar 2026 05:39 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 18 Mar 2026 05:39 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उद्योगपति बीना मोदी और वरिष्ठ वकील ललित भसीन के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह मामला 2024 में एक बोर्ड मीटिंग के दौरान गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (GPI) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर समीर मोदी के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है।

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Trial Court Proceedings Against Industrialist Bina Modi and Advocate Lalit Bhasin Stayed in Delhi HC
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उद्योगपति बीना मोदी और वरिष्ठ वकील ललित भसीन के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह मामला 2024 में एक बोर्ड मीटिंग के दौरान गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (GPI) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर समीर मोदी के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है।

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जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने बीना मोदी और ललित भसीन द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी और तब तक निचली अदालत में लंबित कार्यवाही स्थगित रहेगी।
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शिकायत के अनुसार, इस घटना में समीर मोदी की दाहिनी तर्जनी उंगली में फ्रैक्चर हो गया, जिसके लिए सर्जरी करानी पड़ी और उसमें स्क्रू तथा वायर डाला गया। मेडिकल-लीगल रिपोर्ट में इस चोट को गंभीर बताया गया है। जांच के दौरान घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र किया गया। समीर मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी मां बीना मोदी को घटना की जानकारी दी, तो उन्होंने उन्हें बैठकर मीटिंग जारी रखने को कहा। साथ ही, ललित भसीन ने भी कथित तौर पर बैठक को जारी रखने पर जोर दिया, भले ही वह घायल थे।
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हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने निचली अदालत के आदेश को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि यह इस गलत धारणा पर आधारित है कि जांच के दौरान पुलिस किसी को क्लीन चिट नहीं दे सकती। यह भी दलील दी गई कि सीसीटीवी फुटेज में मारपीट की कोई पुष्टि नहीं होती और समीर मोदी कथित घटना से पहले लगभग दो घंटे तक बैठक में मौजूद रहे थे। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद निचली अदालत में कार्यवाही रुकी रहेगी, जब तक कि मामले में आगे सुनवाई नहीं हो जाती और पुलिस अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं कर देती।

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