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Ghaziabad News: दुकानें बंद कर व्यापारियों ने की महापंचायत, फिर निगम मुख्यालय पर किया प्रदर्शन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2024 05:15 AM IST
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Traders held Mahapanchayat after closing shops, then demonstrated at corporation headquarters
गाजियाबाद। दुकानों का किराया बढ़ाने का विरोध शुक्रवार को महापंचायत में बदल गया। दुकानें बंद कर घंटाघर पर शहर के करीब दो हजार व्यापारियों ने पहले धरना प्रदर्शन किया और वहां से पैदल मार्च करते हुए सभी नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। यहां नगर निगम हाय-हाय और महापौर हाय-हाय के नारे लगाए और परिसर के अंदर धरने पर बैठ गए। करीब छह घंटे तक हंगामा चलता रहा। मौके पर व्यापारियों को समझाने के लिए अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार आए लेकिन व्यापारी दुकानों की किराया वृद्धि को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे।
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दरअसल, नगर निगम ने अपनी 1,702 दुकानों का किराया 25 साल बाद बढ़ा दिया है। व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को सर्व व्यापार मंडल गाजियाबाद के व्यापारी लामबंद होकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे थे। काफी संख्या में भीड़ होने से निगम अफसरों को पुलिस बुलानी पड़ी परिसर के कोने-कोने पर पुलिस बल मुस्तैद रहा। दुकानदारों ने अपनी मांगों का ज्ञापन भी निगम अधिकारियों को सौंपा। अपनी मांग पर अड़े व्यापारी परिसर के अंदर घुस गए। इसके बाद बेसमेंट में चल रही बोर्ड बैठक में जाने लगे तो पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। व्यापारी वहीं बैठ गए। शोर-शराबा करने लगे। करीब चार बजे तक व्यापारी परिसर में जमे रहे। व्यापारियों का कहना था कि अब जन प्रतिनिधि भी उनकी नहीं सुन रहे हैं। किराया वृद्धि वापस नहीं हुई तो उप चुनाव में वह चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
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व्यापारी जितेंद्र सिंह का कहना था कि नगर निगम प्रशासन व महापौर और पार्षदों ने शासनादेश से अलग हटकर हिटलर शाही करते हुए दुकानों का किराया पांच गुना से ज्यादा बढ़ा दिया है। 300 से 1500 और 4,000 से 18,000 तक कर दिया है। 1947 में विभाजन के बाद शहर में आए शरणार्थी अनाज मंडी में फड़ लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे उनको वहां से हटाकर 1958 में रिफ्यूजी मार्केट का निर्माण कराया गया और अनुकंपा के आधार पर उन्हें दुकान दी गईं ताकि वह अपने परिवार का पालन पोषण सही से कर सकें। इस क्षेत्र को अब गोल मार्केट कहते हैं।
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जिसको आज गोल मार्केट के नाम से जाना जाता है कुछ दुकानों का 30- 40 साल पहले मूल्य लिया जा चुका है। पिछले 25 साल से दुकानों का किराया नहीं बढ़ाने का तर्क निगम देता है। नियम है कि हर पांच साल में दुकान के किराये में अधिकतम साढ़े 12 फीसदी की बढ़ोतरी की जा सकती है लेकिन निगम ने शासनादेश के विरुद्ध कई गुना किराया बढ़ा दिया है। व्यापारी नेता प्रेमचंद्र का कहना है कि किराया बढ़ाना भी है तो नियमानुसर बढ़ाया जाए।

व्यापारियों की मांग
1. हमें पट्टा -विलेख या मालिकाना हक प्रदान किया जाए क्योंकि हम कुल मूल्य दे चुके हैं और हम पर कामर्शियल टैक्स लगा दिया जाए हम सब तैयार हैं। इसका जो भी खर्चा आएगा वह व्यापारी स्वयं वहन करने को तैयार हैं।
2. जिन दुकानों से प्रीमियम नहीं लिया गया है उनसे न्यूनतम प्रीमियम लेकर उन दुकानों को भी लीज पर दिया जाए व्यापारी इस पर भी तैयार हैं।
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नगर निगम को चोर कहने पर व्यापारियों पर भड़के पार्षद
हंगामें के दौरान कुछ व्यापारियों ने नगर निगम को चोर कहकर नारे लगाए। इस पर पार्षद नाराज हो गए और व्यापारियों से नोक झोंक हो गई। पार्षद अमित त्यागी ने कहा कि मर्यादा में रहकर अपनी बात रखें गलत जुबानी ठीक नहीं है। मामला बढ़ते देख व्यापारी नेता राकेश स्वामी और पार्षद राजीव शर्मा ने बीच बचाव किया। उन्होंने कहा दुकानदारों की बात को वह सदन में रखेंगे और कोई न कोई रास्ता निकाला जाएगा।

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किराया वृद्धि का फैसला सदन की सहमति से हुआ था पास
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक मौके पर पहुंचे तो व्यापारी जोर-जोर से नारे लगाने लगे। नगर आयुक्त ने कहा कि पार्षदों की मौजूदगी और सहमति से सदन में किराया वृद्धि का प्रस्ताव पास हुआ था। इसके बाद शासन को भेजा गया जहां से आदेशानुसार इसे लागू किया गया। आपको कोई आपत्ति है तो आप अपने जनप्रतिनिध के माध्यम से उसे रख सकते हैं। इस तरह हंगामा करना ठीक नहीं है। इस पर व्यापारियों ने पार्षदों से सवाल करने शुरू कर दिए।
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