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Ghaziabad News: घर में थी परेशानी पति का हाथ बटाने के लिए लिए फैक्टरी में काम करती थी शाहिस्ता

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 26 Sep 2023 01:20 AM IST
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There was trouble at home. Shahista used to work in the factory to help her husband.
रिची कुमार
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लोनी। रूप नगर कॉलोनी स्थित अवैध पटाखा फैक्टरी में शाहिस्ता घर की आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए काम करने जाती थी। फैक्टरी में काम करने के लिए पति कई बार मना कर चुका था। दोनों बहनों ने भी स्कूल से पढ़ाई छोड़ दी थी। वह मदरसे से पढ़कर सीधा फैक्टरी में काम करने चली जाती थी।

मूलरूप से बुलंदशहर निवासी शाहिस्ता के पति शकील दिहाड़ी पर लकड़ी का काम करते हैं। रूपनगर कॉलोनी में वह अपने भाई वकील के मकान में रहते थे। शकील की हालत देखकर वकील उनसे मकान में रहने का कोई किराया नहीं लेते थे। समय समय पर उनकी मदद करते थे। शकील जहां भी काम मिलता था वहीं काम करने चले जाते थे। कभी काम मिलता था, कभी नहीं मिलता था। घर पर पैसों को लेकर परेशानी चल रही थी। शकील ने बताया कि शाहिस्ता पहले घर के पास एक जींस की फैक्टरी में काम करती थी। फैक्टरी से जो पैसा मिलता था, उस पैसों को वह घर के राशन और जरूरत की चीजों में लगाती थी। कुछ समय उसने जींस की फैक्टरी में काम किया। शकील उन्हें काम करने से मना करते थे। वह कहते थे कि वह घर को संभाल लेंगे। जितना पैसा आता है, उससे वह घर को चला लेंगे। लेकिन उन पैसों से घर सही से नहीं चल रहा था। पति के विरोध के बाद शाहिस्ता एक वर्ष पूर्व जींस की फैक्टरी से काम छोड़ दिया था। घर में फिर से परेशानी आनी शुरू हो गई। शकील ने बताया कि करीब 8 माह पहले उसने इस फैक्टरी में काम करना शुरू किया। फैक्टरी से 200 रुपये रोज के हिसाब से 6 हजार रुपये महीना मिलता था। ज्यादा पैसे कमाने के लिए वह ओवर टाइम भी करती थी। इस पटाखा फैक्टरी में काम करने को लेकर शकील ने फिर से विरोध किया। कई बार आपसी विवाद के बाद कुछ दिनों पूर्व शाहिस्ता ने फैक्टरी से काम छोड़ दिया। काम छोड़ने के बाद फिर से घर में परेशानी आनी शुरू हो गई तो करीब 5 दिनों पहले ही शाहिस्ता ने फिर से काम करना शुरू कर दिया था।
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दोनों बहनों ने स्कूल की पढ़ाई छोड़ी
शकील की 6 बेटियां थी। अलीशा कॉलोनी स्थित ज्ञानगंगा स्कूल में पढ़ने जाती थी। परेशानी के चलते अलीशा का नाम स्कूल से कट गया। इसके बाद शकील ने अलीशा और अलीना को पास के सरकारी स्कूल में दाखिला कराया। दोनों पढ़ाई में बहुत तेज थे। घर की परेशानी के चलते दोनों बेटियों ने अपनी अम्मी और अब्बू का हाथ बटाने की सोची। दोनों का लॉक डाउन में स्कूल छूट गया। इसके बाद वह मदरसे में पढ़ने जाने लगीं। सुबह 8 बजे मदरसे में जाती थी, 10 बजे मदरसे से लौटकर घर में बैग रख, सीधा फैक्टरी में काम करने चली जाती थीं। तीनों मां बेटियां फैक्टरी में एक साथ काम करतीं थीं।
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भाई कर रहा मदद

भाई वकील अब शकील के साथ खड़ा है। भाभी के अस्पताल में इलाज चलने पर वह भाई का ख्याल रख रहा है। वह खाने पानी से लेकर दवाई की भी मदद कर रहा है।
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