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Ghaziabad News: हत्यारोपी अंकुश को पेशी के दौरान फरार कराने की थी साजिश, धरे गए
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गाजियाबाद। क्राइम ब्रांच ने राजनगर एक्सटेंशन चौराहे के पास से मुठभेड में दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर दुष्कर्म, लूट, हत्या के प्रयास के चार मुकदमे गाजियाबाद के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। उनके कब्जे से एक पिस्टल, तमंचा व अन्य सामग्री बरामद की है। आरोपियों की पहचान हर्षित चिकारा निवासी खानपुर, जानी, मेरठ व रोहित चौधरी निवासी तिबड़ा रोड, मोदीनगर के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, हत्या, लूट के कई मामलों में संतकबीरनगर जेल में बंद अंकुश को पेशी के दौरान फरार कराने की आरोपियों ने साजिश रची थी।
एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया कि हर्षित चिकारा 10वीं पास है। वह नोएडा की बाइक के पार्टस बनाने वाले कंपनी में भी काम कर चुका है। 2019 में उसके खिलाफ मोदीनगर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में वह करीब ढाई साल तक जेल में बंद रहा। तभी उसकी मुलाकात पहले से हत्या, लूट, हत्या के प्रयास जैसे मामलों में जेल में बंद भोजपुर के मुकीमपुर निवासी अंकुश से हुई थी। बाद में अंकुश को संत कबीरनगर जेल में स्थानांतरित किया गया। वह जेल से छूटकर बाहर आ गया। इसके बाद अंकुश जब भी पेशी पर गाजियाबाद आता था, तभी हर्षित और रोहित उससे मिलने के लिए आते थे।
गांव में ही हुई हत्या के एक मामले में अंकुश के खिलाफ कोर्ट में गवाही हो चुकी थी। उसमें उसको आजीवन कारावास होने का खतरा है। इसलिए अंकुश ने तीन दिन पहले पेशी के दौरान उनसे कहा था कि वह उसको पुलिस कस्टडी से किसी तरह फरार करा दें। वह इसकी पूरी साजिश रच चुके थे। एडीसीपी ने बताया कि दोनों से जो पिस्टल और तमंचा बरामद हुआ है, उसका इस्तेमाल भी अंकुश को फरार कराने में वह करने वाले थे। साजिश में और कितने लोग हो सकते है, इसकी जांच की जा रही है। जिन लोगों ने इनको असलहा मुहैया कराए थे, उनकी पहचान भी कर ली गई है। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है, जल्द ही उनकी भी गिरफ्तारी सुनिश्चित होगी।
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एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया कि हर्षित चिकारा 10वीं पास है। वह नोएडा की बाइक के पार्टस बनाने वाले कंपनी में भी काम कर चुका है। 2019 में उसके खिलाफ मोदीनगर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में वह करीब ढाई साल तक जेल में बंद रहा। तभी उसकी मुलाकात पहले से हत्या, लूट, हत्या के प्रयास जैसे मामलों में जेल में बंद भोजपुर के मुकीमपुर निवासी अंकुश से हुई थी। बाद में अंकुश को संत कबीरनगर जेल में स्थानांतरित किया गया। वह जेल से छूटकर बाहर आ गया। इसके बाद अंकुश जब भी पेशी पर गाजियाबाद आता था, तभी हर्षित और रोहित उससे मिलने के लिए आते थे।
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गांव में ही हुई हत्या के एक मामले में अंकुश के खिलाफ कोर्ट में गवाही हो चुकी थी। उसमें उसको आजीवन कारावास होने का खतरा है। इसलिए अंकुश ने तीन दिन पहले पेशी के दौरान उनसे कहा था कि वह उसको पुलिस कस्टडी से किसी तरह फरार करा दें। वह इसकी पूरी साजिश रच चुके थे। एडीसीपी ने बताया कि दोनों से जो पिस्टल और तमंचा बरामद हुआ है, उसका इस्तेमाल भी अंकुश को फरार कराने में वह करने वाले थे। साजिश में और कितने लोग हो सकते है, इसकी जांच की जा रही है। जिन लोगों ने इनको असलहा मुहैया कराए थे, उनकी पहचान भी कर ली गई है। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है, जल्द ही उनकी भी गिरफ्तारी सुनिश्चित होगी।
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