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Ghaziabad News: 56 साल से की जा रही है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 01:41 AM IST
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There has been a demand for a High Court bench in Western Uttar Pradesh for 56 years.
गाजियाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग 1967 से चली आ रही है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने वकीलों से कहा था कि यहां पर हां कर दूंगा, लेकिन मामला लखनऊ में फंस जाएगा। वह पेंच आज तक फंसा हुआ है। इसमें किसी भी केंद्रीय मंत्री या सांसद ने अभी तक बेंच की स्थापना की पहल नहीं की है।
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सोमवार को बार एसोसिएशन कार्यालय में आयोजित अमर उजाला के चुनावी चौपाल कार्यक्रम में बार अध्यक्ष राकेश त्यागी कैली ने कहा कि बार पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर सबकी सहमति से तय किया जाएगा कि लोकसभा चुनाव में मतदान के लिए क्या रणनीति बनेगी। चौपाल में अधिवक्ताओं का कहना था कि कुछ जिलों के आपसी मतभेद से भी आंदोलन कमजोर पड़ा है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। चौपाल कार्यक्रम में अधिवक्ता रमेश तिवारी, गौतम त्यागी, पूर्व बार अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक, दीपक शर्मा, देवाशीष, राशिद मलिक व रोहित शर्मा सहित अन्य अधिवक्ता शामिल थे।
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सात सौ किमी तय करनी पड़ती है दूरी
पूर्व बार अध्यक्ष सुनील त्यागी भगतजी ने कहा कि 1967 में चौधरी चरण सिंह ने इन्कार कर दिया था, उसके बाद से आज तक कोई पहल नहीं हुई। जबकि अधिवक्ता लगातार संघर्ष करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन 75 प्रतिशत मुकदमे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के हैं। पश्चिमी यूपी के वादकारी को 700 किलो मीटर की दूर तय करनी पड़ती है। इस कारण सुलभ और सस्ता न्याय नहीं मिल पा रहा है।
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एक तारीख में दस हजार रुपये होते हैं खर्च
अधिवक्ता राजकुमार चौहान का कहना था कि एक बार हाईकोर्ट जाने में एक मुवक्किल के कम से कम दस हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि आने जाने में दो दिन का समय और परेशानी अलग से होती है। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद पहुंचने पर जैसे ही वहां के लोगों के पता चलता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए हैं तो किसी भी चीज का दोगुना वसूलते हैं। अगर कोई अधिकारी मुकदमे में पेश होता है तो उसका खर्चा सरकारी कोष से जाता है, लेकिन अधिवक्ता और मुवक्किल को स्वयं खर्च करना पड़ता है।

कई महीने तक चली है हड़ताल
पूर्व सहायक शासकीय अधिवक्ता विरेश त्यागी ने कहा हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर कई बार लंबी हड़ताल चली है। इसमें जनता ही परेशानी हुई। इस कारण से अब हड़ताल के लिए शनिवार का दिन तय कर दिया गया है। लखनऊ बेंच की स्थापना कर दी गई, उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी किसी जिले में स्थापित किया जा सकता था। लोकसभा चुनाव में वोट मांगने वाले प्रत्याशियों के सामने यह बात रखी जाएगी कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएंगी उन्हें वोट नहीं दिया जाएगा।


लखनऊ बेंच से जोड़ने की उठाई जाएगी मांग
अधिवक्ता सुबोध त्यागी ने कहा कि वोट मांगने वाले प्रत्याशियों के समक्ष मुद्दा उठाया जाएगा कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना नहीं की जाती है, तब तक लखनऊ बेंच में कार्य क्षेत्र संबद्ध कर दिया जाए। लखनऊ में जुड़ने से धन और समय दोनों की बचत होगी।
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