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स्मार्ट सिटी की दौड़ से गाजियाबाद फिर बाहर
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Wed, 21 Sep 2016 12:21 AM IST
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स्मार्ट सिटी
- फोटो : अमर उजाला
18 लाख गाजियाबादियों की उम्मीदों को फिर झटका लगा। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की दूसरे चरण की 27 स्मार्ट शहरों की सूची में भी गाजियाबाद जगह नहीं बना पाया। अब तीसरे चरण के लिए निगम अफसरों को फिर तैयारी करनी होगी। सूची में शामिल होने के लिए निगम ने पहले कंसलटेंट फर्म बदली, फिर जनता से फीड बैक लेने के लिए फर्म हायर की, लेकिन सारे प्रयास निरर्थक साबित हुए।
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कई बार संशोधन के बाद कंसलटेंट फर्म और नगर निगम ने इस बार 1897 करोड़ का स्मार्ट सिटी प्रपोजल (एससीपी) बनाकर केंद्र सरकार को भेजा था। इनमें 1275 करोड़ रुपये एरिया बेस्ड डेवलपमेंट पर खर्च किए जाने थे। इस फंड से सीवर, सड़क, नाली, खड़ंजे आदि विकास कार्य होने थे।
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इसी तरह 570 करोड़ से ज्यादा का बजट ट्रांसपोर्ट को सुदृढ़ बनाने, बेहतर विद्युत व्यवस्था समेत अन्य विकास कार्यों पर खर्च करने की प्लानिंग थी। यही नहीं निगम ने 13 सरकारी योजनाओं का कनवर्जन कर स्मार्ट सिटी से कनेक्ट करने की भी प्लानिंग की थी।
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पावर कारपोरेशन, जल निगम, पीडब्ल्यूडी, रोडवेज समेत कई सरकारी विभागों से एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग) साइन किया था। वहीं 18 प्राइवेट कंपनियों से भी टाइअप किया गया था। लेकिन अफसोस सारी मेहनत पर पानी फिर गया। स्मार्ट सिटी के लिए अब जनता को अगले साल का इंतजार करना होगा।
यह एरिया चुना गया था स्मार्ट सिटी के लिए: वैशाली-कौशांबी और आंशिक महाराजपुर का 1078 एकड़ का क्षेत्र ‘एरिया बेस्ड डेवलपमेंट’ के लिए चुना गया था। गाजियाबाद का नाम स्मार्ट सिटी की सूची में आता तो यही क्षेत्र स्मार्ट बनता। कंसलटेंट फर्म 30 जून को प्रपोजल केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को सौंप दिया था।
स्मार्ट सिटी में चुना जाता तो यह योजनाएं चढ़तीं परवान
- माटूंगा की तर्ज पर एलिवेटेड रोड के नीचे बनाया जाता पिकनिक स्पॉट
- सड़कों की चौड़ाई बढ़ाकर खत्म किया जाना था जाम
- फुटपाथ बनाकर उनके ऊपर शेड लगाए जाने थे
- सभी विभागों के लिए ‘माई गवर्नमेंट’ नाम का एक एप बनाने की थी योजना
- निगम के सामुदायिक भवनों की आनलाइन बुकिंग शुरू होनी थी
- प्रोजेक्ट ‘उजाला’ में स्ट्रीट लाइटों को एलईडी लाइटों से बदला जाना था
- स्मार्ट वाटर मीटर लगाकर स्काडा से जोड़ा जाना था
- सेंसर वाले स्मार्ट डस्टबिन लगाने की थी योजना
- स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम बनाकर कंट्रोल रूम से ट्रैफिक लाइटें मैनेज करनी थी प्लानिंग
- स्मार्ट पार्किंग बनाकर मोबाइल से बुकिंग की तैयारी भी की थी निगम ने
- 24 घंटे बिजली-पानी की सुविधा देने का था दावा
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स्मार्ट सिटी में गाजियाबाद के शामिल होने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन किस वजह से वह शामिल नहीं हो सका इसकी समीक्षा की जाएगी। स्मार्ट सिटी के अलावा केंद्र सरकार की अमृत योजना में गाजियाबाद को काफी फंड मिल रहा है। इस फंड से शहर में सुविधाएं विकसित की जाएंगी। अगली बार स्मार्ट सिटी के लिए और बेहतर तैयारी की जाएगी। - अशु वर्मा, महापौर ।