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Ghaziabad News: गंगा एक्सप्रेसवे ने बदली गढ़ क्षेत्र की तस्वीर, जमीन कारोबार में आया ऐतिहासिक बूम
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गढ़ क्षेत्र से गुजर रहा गंगा एक्सप्रेसवे। संवाद
गढ़मुक्तेश्वर। क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे ने स्थानीय अर्थव्यवस्था और जमीन कारोबार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। बीते दो वर्षों में गढ़ और ब्रजघाट क्षेत्र में जमीनों की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और हरियाणा के उद्योगपतियों व बड़े निवेशकों ने यहां हजारों बीघा भूमि खरीदकर होटल, रिसॉर्ट, फार्म हाउस, वेयरहाउस और पर्यटन परियोजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है।
गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-9 और गढ़-मेरठ हाईवे की मजबूत कनेक्टिविटी ने गढ़ क्षेत्र को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से उभरते निवेश क्षेत्रों में शामिल कर दिया है। रियल एस्टेट कारोबारी उदित गोयल ने बताया कि पहले जो क्षेत्र केवल कृषि भूमि के लिए जाना जाता था, अब वहां व्यावसायिक निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
रजिस्ट्री विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब 1200 रजिस्ट्रियां हुई हैं। इनमें लगभग 700 रजिस्ट्रियां दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और हरियाणा के निवेशकों द्वारा कराई गई हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार बीते दो वर्षों में बाहरी निवेशकों की संख्या में करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
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स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण की घोषणा के बाद से गढ़, ब्रजघाट, बहादुरगढ़, अल्लाबख्शपुर, झड़ीना, लठीरा और हाईवे किनारे बसे कई गांवों में जमीन खरीदने वालों की कतार लग गई है। कई उद्योगपतियों ने भविष्य की व्यावसायिक योजनाओं को देखते हुए पहले से ही बड़ी मात्रा में भूमि खरीद ली है।
10 लाख से 50 लाख रुपये बीघा तक पहुंचे दाम
प्रॉपर्टी बाजार से जुड़े कारोबारियों के अनुसार वर्ष 2023 तक जिन जमीनों की कीमत 8 से 10 लाख रुपये प्रति बीघा थी, आज वही जमीन 40 से 50 लाख रुपये प्रति बीघा तक बिक रही है। एक्सप्रेसवे इंटरचेंज और हाईवे से जुड़े क्षेत्रों में जमीनों के दाम सबसे अधिक बढ़े हैं। कुछ प्रमुख स्थानों पर व्यावसायिक जमीनों की कीमत इससे भी अधिक बताई जा रही है।
पर्यटन और रोजगार का नया केंद्र बनेगा गढ़
गंगा नगरी और ब्रजघाट क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के लिए पहले से प्रसिद्ध हैं। अब एक्सप्रेसवे बनने के बाद यहां आधुनिक होटल, धार्मिक रिसॉर्ट, रिवर व्यू फार्म हाउस और पर्यटन सुविधाएं विकसित होने की संभावना बढ़ गई है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि आने वाले पांच वर्षों में गढ़ क्षेत्र पर्यटन उद्योग का बड़ा केंद्र बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ते निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। होटल, परिवहन, निर्माण कार्य, सुरक्षा सेवाएं, रेस्तरां और छोटे व्यापार से जुड़े हजारों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
विवेक शर्मा का कहना है कि गढ़ क्षेत्र में एक्सप्रेसवे और हाईवे कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा असर जमीनों की कीमतों पर पड़ा है। कई गांवों में दो वर्षों के भीतर जमीनों के दाम चार से पांच गुना तक बढ़ गए हैं।
सुरेंद्र चौहान का कहना है कि सैकड़ों किसानों ने ऊंचे दामों पर जमीन बेचकर ट्रैक्टर, आधुनिक कृषि उपकरण और नया कारोबार शुरू किया है। कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिला है।
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गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-9 और गढ़-मेरठ हाईवे की मजबूत कनेक्टिविटी ने गढ़ क्षेत्र को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से उभरते निवेश क्षेत्रों में शामिल कर दिया है। रियल एस्टेट कारोबारी उदित गोयल ने बताया कि पहले जो क्षेत्र केवल कृषि भूमि के लिए जाना जाता था, अब वहां व्यावसायिक निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
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रजिस्ट्री विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब 1200 रजिस्ट्रियां हुई हैं। इनमें लगभग 700 रजिस्ट्रियां दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और हरियाणा के निवेशकों द्वारा कराई गई हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार बीते दो वर्षों में बाहरी निवेशकों की संख्या में करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
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स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण की घोषणा के बाद से गढ़, ब्रजघाट, बहादुरगढ़, अल्लाबख्शपुर, झड़ीना, लठीरा और हाईवे किनारे बसे कई गांवों में जमीन खरीदने वालों की कतार लग गई है। कई उद्योगपतियों ने भविष्य की व्यावसायिक योजनाओं को देखते हुए पहले से ही बड़ी मात्रा में भूमि खरीद ली है।
10 लाख से 50 लाख रुपये बीघा तक पहुंचे दाम
प्रॉपर्टी बाजार से जुड़े कारोबारियों के अनुसार वर्ष 2023 तक जिन जमीनों की कीमत 8 से 10 लाख रुपये प्रति बीघा थी, आज वही जमीन 40 से 50 लाख रुपये प्रति बीघा तक बिक रही है। एक्सप्रेसवे इंटरचेंज और हाईवे से जुड़े क्षेत्रों में जमीनों के दाम सबसे अधिक बढ़े हैं। कुछ प्रमुख स्थानों पर व्यावसायिक जमीनों की कीमत इससे भी अधिक बताई जा रही है।
पर्यटन और रोजगार का नया केंद्र बनेगा गढ़
गंगा नगरी और ब्रजघाट क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के लिए पहले से प्रसिद्ध हैं। अब एक्सप्रेसवे बनने के बाद यहां आधुनिक होटल, धार्मिक रिसॉर्ट, रिवर व्यू फार्म हाउस और पर्यटन सुविधाएं विकसित होने की संभावना बढ़ गई है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि आने वाले पांच वर्षों में गढ़ क्षेत्र पर्यटन उद्योग का बड़ा केंद्र बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ते निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। होटल, परिवहन, निर्माण कार्य, सुरक्षा सेवाएं, रेस्तरां और छोटे व्यापार से जुड़े हजारों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
विवेक शर्मा का कहना है कि गढ़ क्षेत्र में एक्सप्रेसवे और हाईवे कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा असर जमीनों की कीमतों पर पड़ा है। कई गांवों में दो वर्षों के भीतर जमीनों के दाम चार से पांच गुना तक बढ़ गए हैं।
सुरेंद्र चौहान का कहना है कि सैकड़ों किसानों ने ऊंचे दामों पर जमीन बेचकर ट्रैक्टर, आधुनिक कृषि उपकरण और नया कारोबार शुरू किया है। कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिला है।