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Ghaziabad News: जनसंख्या नियंत्रण कानून बनने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले खत्म नहीं होगा आमरण अनशन
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साहिबाबाद। लाजपतनगर स्थित सामुदायिक केंद्र पर रविवार को जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के लिए महापंचायत की गई। इसमें जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल चौधरी ने एलान किया कि कानून बनने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले आमरण अनशन खत्म नहीं होगा। केंद्र के संबंधित विभाग से मंत्री अनशन स्थल पर आकर कानून बनाने की प्रक्रिया की घोषणा करें। कानून वैसा बने जैसा हम चाहते हैं। दिवाली के दिन 12 नवंबर को दूसरी महापंचायत रामलीला मैदान में होगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से लाजपतनगर से अनशन बंद करने की कोशिश या उठा दिया गया तो गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में अनशन शुरू होगा। अगर वहां से भी उठाया गया तो मेरठ कमिश्नरी में अनशन अनवरत जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर इस अनशन के बीच कुछ हो गया तो मेरे बाद विनय हिंदू, भोज कुमार, ललित फौजी, ममता अनशन पर बैठेंगी। वहीं, जरूरत पड़ी तो लाल चौक पर भी अनशन किया जाएगा।
दो बिंदुओं पर दूसरी महापंचायत में होगा निर्णय
पंचायत में आमरण अनशन के संबंध में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के साथ दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष चर्चा हुई। पहला यह कि अगर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं तो घरों पर और गांव के बाहर वोट नहीं के पोस्टर, होर्डिग, बैनर और स्टीकर लगाए जाएं। दूसरा देशभर के 400 जिलों में एक साथ वहां की स्थानीय टोलियां अनशन और धरना शुरू किया जाए। 9 नवंबर को देश भर के सभी जिलों में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें आमरण अनशन का उल्लेख भी रहेगा।
कानून बनने के बाद मनाएंगे दिवाली
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनने के बाद दिवाली मनाई जाएगी। 14 साल का वनवास के बाद लंका पर विजय करने के बाद अयोध्या आने पर जिस तरह घी के दिए जलाए गए थे, उसी तरह कानून बनने के बाद दिवाली मनाई जाएगी।
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सरकारी सुविधा समाप्त कर दी जाए
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि असाम, बंगाल, मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में नई पीढ़ी के परिवार में दो से ज्यादा बच्चे नहीं पाए गए। मगर देश की आबादी 143 करोड़ को पार कर चुकी है। आबादी के मामले में हम विश्व में पहले पायदान पर हो गए हैं। जब सभी के पास दो बच्चे हैं तो यह आबादी बढ़ कहां से रही है। इसे मिटाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून बने। कानून बनने के एक वर्ष के बाद तीसरी संतान पैदा करने वालों पर सभी सरकारी सुविधाएं समाप्त हो। इसके साथ ही उनका वोट डालने का अधिकारी भी समाप्त किया जाए। इसके बावजूद भी इस कानून को कोई नहीं माने तो देशद्रोह माना जाए। उसका नसबंदी करने के साथ जेल में बंद कर दिया जाए। इसके लिए हम सभी को एकजुट होना होगा। अगर सभी एकजुट हो गए तो अपना भारत देश हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा।
150 संगठनों ने किया सहयोग
गाजियाबाद उद्योग व्यापार मंडल, महादेव सेना नई दिल्ली, नागरिक पेंशनर सेवा संस्थान, साहिबाबाद एक्स सर्विस एसोसिएशन, राजपूत एकता समिति लोनी गाजियाबाद, हापुड़ केमिस्ट एसोसिएशन, विशाल मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी हापुड, इंडस्ट्रियल ट्रेड वेलफेयर एसोसिएशन, लाठर खाप उत्तर प्रदेश, श्री भैरव बाबा ठैटेरान पंचायत समिति, भारतीय किसान यूनियन हापुड़, जनकल्याण ट्रस्ट गाजियाबाद, अखिल भारतीय खत्री युवा महासभा गाजियाबाद, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा गाजियाबाद, जनशक्ति सुरक्षा समिति दिल्ली, जय भवानी राजपूताना संगठन अर्थला, आद्रिका (एनजीओ), राजपूत विकास समिति, कर्मयोगी ज्यते एसोसिएशन, शिवसेना मुजफ्फरनगर, ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल रहे। इसके अलावा कई राज्यों से लोग आए थे और करीब अस्सी से अधिक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
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दो बिंदुओं पर दूसरी महापंचायत में होगा निर्णय
पंचायत में आमरण अनशन के संबंध में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के साथ दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष चर्चा हुई। पहला यह कि अगर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं तो घरों पर और गांव के बाहर वोट नहीं के पोस्टर, होर्डिग, बैनर और स्टीकर लगाए जाएं। दूसरा देशभर के 400 जिलों में एक साथ वहां की स्थानीय टोलियां अनशन और धरना शुरू किया जाए। 9 नवंबर को देश भर के सभी जिलों में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें आमरण अनशन का उल्लेख भी रहेगा।
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कानून बनने के बाद मनाएंगे दिवाली
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनने के बाद दिवाली मनाई जाएगी। 14 साल का वनवास के बाद लंका पर विजय करने के बाद अयोध्या आने पर जिस तरह घी के दिए जलाए गए थे, उसी तरह कानून बनने के बाद दिवाली मनाई जाएगी।
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सरकारी सुविधा समाप्त कर दी जाए
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि असाम, बंगाल, मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में नई पीढ़ी के परिवार में दो से ज्यादा बच्चे नहीं पाए गए। मगर देश की आबादी 143 करोड़ को पार कर चुकी है। आबादी के मामले में हम विश्व में पहले पायदान पर हो गए हैं। जब सभी के पास दो बच्चे हैं तो यह आबादी बढ़ कहां से रही है। इसे मिटाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून बने। कानून बनने के एक वर्ष के बाद तीसरी संतान पैदा करने वालों पर सभी सरकारी सुविधाएं समाप्त हो। इसके साथ ही उनका वोट डालने का अधिकारी भी समाप्त किया जाए। इसके बावजूद भी इस कानून को कोई नहीं माने तो देशद्रोह माना जाए। उसका नसबंदी करने के साथ जेल में बंद कर दिया जाए। इसके लिए हम सभी को एकजुट होना होगा। अगर सभी एकजुट हो गए तो अपना भारत देश हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा।
150 संगठनों ने किया सहयोग
गाजियाबाद उद्योग व्यापार मंडल, महादेव सेना नई दिल्ली, नागरिक पेंशनर सेवा संस्थान, साहिबाबाद एक्स सर्विस एसोसिएशन, राजपूत एकता समिति लोनी गाजियाबाद, हापुड़ केमिस्ट एसोसिएशन, विशाल मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी हापुड, इंडस्ट्रियल ट्रेड वेलफेयर एसोसिएशन, लाठर खाप उत्तर प्रदेश, श्री भैरव बाबा ठैटेरान पंचायत समिति, भारतीय किसान यूनियन हापुड़, जनकल्याण ट्रस्ट गाजियाबाद, अखिल भारतीय खत्री युवा महासभा गाजियाबाद, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा गाजियाबाद, जनशक्ति सुरक्षा समिति दिल्ली, जय भवानी राजपूताना संगठन अर्थला, आद्रिका (एनजीओ), राजपूत विकास समिति, कर्मयोगी ज्यते एसोसिएशन, शिवसेना मुजफ्फरनगर, ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल रहे। इसके अलावा कई राज्यों से लोग आए थे और करीब अस्सी से अधिक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।