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‘पहले कॉपियां जांचें फिर कोर्ट के चक्कर काटें’
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:41 AM IST
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यूपी बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं में की कोड की व्यवस्था भी नकल नहीं रोक सकी। मूल्यांकन केंद्रों पर एक ही कॉपी में दो अलग-अलग कोड संख्या की नत्थी की गई कॉपियां मिल रहीं हैं। यही नहीं शिक्षक सब कुछ देखकर भी नंबर दिए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि पहले हम कॉपियां जांचें फिर कोर्ट के चक्कर काटें। इससे तो अच्छा है कि पचड़े में न ही फंसें। सनातन धर्म इंटर कालेज में इंटर की कॉपियों के बंडल में एक छात्र की कॉपी में सबसे ऊपर कोड संख्या बी-13 अंकित है। जबकि कुछ पन्नों के बाद अंदर एक और कॉपी लगा दी गई है जिसकी कोड संख्या बी-16 है।
यहां तक कि दोनों अलग-अलग कॉपियों की हैंड राइटिंग भी अलग है। हैरानी की बात यह है परीक्षक इसकी जानकारी न तो केंद्र व्यवस्थापक को और न डीआईओएस को दे रहे हैं।
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शिक्षकों ने भी झाड़ा पल्ला
कोड वाली कॉपियों में गड़बड़ी के बावजूद कॉपी जांच रहे परीक्षक नंबर चढ़ा रहे हैं। बोर्ड ने इस बार आदेश किया था कि बिना कोड की कॉपी मिलने पर उसकी जानकारी निदेशालय को दी जाएगी। अब एक साथ दो-दो कोड की कॉपी नत्थी होने पर कोई दिशा-निर्देश न होने पर परीक्षक किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते।
परीक्षकों का कहना है कि कॉपी की सूचना देने पर केस दर्ज होगा। इसके बाद कोर्ट का चक्कर काटते रह जाएंगे। दूसरा यदि नकल माफिया की यह करनी है तो और ज्यादा परेशानी बढ़ जाएगी। परीक्षकों का कहना है कि जब सरकार नकल माफिया पर लगाम नहीं लगा सकती तो, हम अपनी जान जोखिम में क्यों डालें।
मेधावी छात्रों ने हर पेज पर लिखा रोलनंबर
केंद्र पर कॉपियों के साथ हो रही हेराफेरी को भांप चुके मेधावी विद्यार्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज पर अपना रोल नंबर लिख डाला है। कॉपी जांच रहे परीक्षकों ने बताया कि अच्छी कॉपियों में बच्चों ने पुस्तिका के हर पेज पर अपना रोल नंबर लिखा हुआ है।
शिक्षकों का कहना है कि छात्र कॉपी के साथ हेराफेरी होने की आशंका को भांप चुके थे, इसलिए उन्होंने ऐसा किया ताकि उनकी कॉपी कोई न चुरा सके।
क्या बोले डीआईओएस
निरीक्षण के दौरान मेरे समक्ष ऐसा मामला नहीं आया है। परीक्षक यदि इन गड़बड़ियों की रिपोर्टिंग नहीं कर रहे तो यह गैर जिम्मेदारना हरकत है। इस मामले में केंद्र व्यवस्थापक और परीक्षकों से पूछताछ कर उचित कार्रवाई की जाएगी। -राज सिंह यादव, डीआईओएस
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उनका कहना है कि पहले हम कॉपियां जांचें फिर कोर्ट के चक्कर काटें। इससे तो अच्छा है कि पचड़े में न ही फंसें। सनातन धर्म इंटर कालेज में इंटर की कॉपियों के बंडल में एक छात्र की कॉपी में सबसे ऊपर कोड संख्या बी-13 अंकित है। जबकि कुछ पन्नों के बाद अंदर एक और कॉपी लगा दी गई है जिसकी कोड संख्या बी-16 है।
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यहां तक कि दोनों अलग-अलग कॉपियों की हैंड राइटिंग भी अलग है। हैरानी की बात यह है परीक्षक इसकी जानकारी न तो केंद्र व्यवस्थापक को और न डीआईओएस को दे रहे हैं।
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शिक्षकों ने भी झाड़ा पल्ला
कोड वाली कॉपियों में गड़बड़ी के बावजूद कॉपी जांच रहे परीक्षक नंबर चढ़ा रहे हैं। बोर्ड ने इस बार आदेश किया था कि बिना कोड की कॉपी मिलने पर उसकी जानकारी निदेशालय को दी जाएगी। अब एक साथ दो-दो कोड की कॉपी नत्थी होने पर कोई दिशा-निर्देश न होने पर परीक्षक किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते।
परीक्षकों का कहना है कि कॉपी की सूचना देने पर केस दर्ज होगा। इसके बाद कोर्ट का चक्कर काटते रह जाएंगे। दूसरा यदि नकल माफिया की यह करनी है तो और ज्यादा परेशानी बढ़ जाएगी। परीक्षकों का कहना है कि जब सरकार नकल माफिया पर लगाम नहीं लगा सकती तो, हम अपनी जान जोखिम में क्यों डालें।
मेधावी छात्रों ने हर पेज पर लिखा रोलनंबर
केंद्र पर कॉपियों के साथ हो रही हेराफेरी को भांप चुके मेधावी विद्यार्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज पर अपना रोल नंबर लिख डाला है। कॉपी जांच रहे परीक्षकों ने बताया कि अच्छी कॉपियों में बच्चों ने पुस्तिका के हर पेज पर अपना रोल नंबर लिखा हुआ है।
शिक्षकों का कहना है कि छात्र कॉपी के साथ हेराफेरी होने की आशंका को भांप चुके थे, इसलिए उन्होंने ऐसा किया ताकि उनकी कॉपी कोई न चुरा सके।
क्या बोले डीआईओएस
निरीक्षण के दौरान मेरे समक्ष ऐसा मामला नहीं आया है। परीक्षक यदि इन गड़बड़ियों की रिपोर्टिंग नहीं कर रहे तो यह गैर जिम्मेदारना हरकत है। इस मामले में केंद्र व्यवस्थापक और परीक्षकों से पूछताछ कर उचित कार्रवाई की जाएगी। -राज सिंह यादव, डीआईओएस