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Ghaziabad News: रखरखाव का जिम्मा ही नहीं आमदनी का जरिया भी लेगा निगम
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योगेश शर्मा
गाजियाबाद। इंदिरापुरम के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम संभालेगा, यह तो लगभग तय हो गया है लेकिन इंदिरापुरम से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को होने वाली आमदनी का जरिया भी निगम अपने हिस्से में लेगा। हालांकि, इस पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। दरअसल, हस्तांतरण की प्रक्रिया से पहले निगम ने जीडीए के सामने कुछ और मांगे रख दी हैं। मसलन, 29 हजार भवनों का जल-सीवर शुल्क ही नहीं बल्कि सामुदायिक केंद्र और खेल अकादमी से मिलने वाला किराया भी निगम वसूलेगा। साथ ही, कचरा निस्तारण के लिए मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर और कचरा ट्रांसफर स्टेशन की जमीन भी मांगी है।
लगभग 1200 एकड़ में फैले 4.50 लाख से ज्यादा आबादी वाले इंदिरापुरम क्षेत्र के हस्तांतरण के लिए जीडीए और नगर निगम का संयुक्त सर्वे पूरा हो चुका है। आधिकारिक स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। चर्चा जोरों पर है कि 15 से 30 अगस्त के बीच हस्तांतरण की औपचारिकता को पूरा कर लिया जाएगा। इस बीच नगर निगम ने वो संसाधन और सुविधाएं भी मांग ली हैं, जो जीडीए की आमदनी का स्त्रोत हैं। इंदिरापुरम के अंतर्गत मकनपुर और अभयखंड में सामुदायिक केंद्र हैं, जिनका किराया जीडीए वसूलता है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर भवन भी इसी क्षेत्र में है।
एक बैडमिंटन और क्रिकेट अकादमी भी है, जिनका लीज रेंट जीडीए वसूलता है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार बहुमंजिला इमारत वाले इंदिरापुरम क्षेत्र में कुल यूनिटों (मकानों) की संख्या 72 हजार हैं, जिनमें लगभग 29 हजार यूनिटों से करीब 26 करोड़ रुपया जल-सीवर शुल्क जीडीए वसूल रहा है, जबकि 17 से 20 करोड़ रुपये टैक्स नगर निगम को भी मिलता है। हस्तांतरण के बाद जीडीए को मिलने वाला शुल्क भी निगम को मिलने लगेगा।
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कचरा प्रबंधन होगा बड़ी चुनौती
नगर निगम क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 1200 मिट्रिक टन कचरे के निस्तारण में कई चुनौतियां आ रही है। ऐसे में इंदिरापुरम के रखरखाव की जिम्मेदारी मिलने के बाद वहां से प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले करीब 150 टन कचरे को ठिकाने लगा पाना आसान नहीं होगा। नगर निगम ने इसके लिए जीडीए से मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर और कचरा ट्रांसफर स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराने को कहा है।
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अब बजट में नहीं फंसेगा पेंच
इंदिरापुरम हस्तांतरण के लिए पहले 350 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन जीडीए की तरफ से इतनी राशि देने पर सहमति नहीं जताई थी। इसके बाद 200 से 250 करोड़ रुपये पर सहमति बनी थी लेकिन इतनी राशि भी नहीं मिल सकी, जिसकी वजह से हस्तांतरण की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। हालाकि, निगम अधिकारियों का तर्क है कि इस बार दोनों विभागों ने संयुक्त सर्वे किया है। इसलिए बजट को लेकर कोई पेंच नहीं फंसेगा।
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बयान
इंदिरापुरम के संयुक्त सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जीडीए उपाध्यक्ष के साथ जल्द ही बैठक की जाएगी। सामुदायिक केंद्रों सहित अन्य सुविधाओं को निगम को देने की मांग हमने की है। - विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त
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गाजियाबाद। इंदिरापुरम के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम संभालेगा, यह तो लगभग तय हो गया है लेकिन इंदिरापुरम से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को होने वाली आमदनी का जरिया भी निगम अपने हिस्से में लेगा। हालांकि, इस पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। दरअसल, हस्तांतरण की प्रक्रिया से पहले निगम ने जीडीए के सामने कुछ और मांगे रख दी हैं। मसलन, 29 हजार भवनों का जल-सीवर शुल्क ही नहीं बल्कि सामुदायिक केंद्र और खेल अकादमी से मिलने वाला किराया भी निगम वसूलेगा। साथ ही, कचरा निस्तारण के लिए मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर और कचरा ट्रांसफर स्टेशन की जमीन भी मांगी है।
लगभग 1200 एकड़ में फैले 4.50 लाख से ज्यादा आबादी वाले इंदिरापुरम क्षेत्र के हस्तांतरण के लिए जीडीए और नगर निगम का संयुक्त सर्वे पूरा हो चुका है। आधिकारिक स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। चर्चा जोरों पर है कि 15 से 30 अगस्त के बीच हस्तांतरण की औपचारिकता को पूरा कर लिया जाएगा। इस बीच नगर निगम ने वो संसाधन और सुविधाएं भी मांग ली हैं, जो जीडीए की आमदनी का स्त्रोत हैं। इंदिरापुरम के अंतर्गत मकनपुर और अभयखंड में सामुदायिक केंद्र हैं, जिनका किराया जीडीए वसूलता है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर भवन भी इसी क्षेत्र में है।
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एक बैडमिंटन और क्रिकेट अकादमी भी है, जिनका लीज रेंट जीडीए वसूलता है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार बहुमंजिला इमारत वाले इंदिरापुरम क्षेत्र में कुल यूनिटों (मकानों) की संख्या 72 हजार हैं, जिनमें लगभग 29 हजार यूनिटों से करीब 26 करोड़ रुपया जल-सीवर शुल्क जीडीए वसूल रहा है, जबकि 17 से 20 करोड़ रुपये टैक्स नगर निगम को भी मिलता है। हस्तांतरण के बाद जीडीए को मिलने वाला शुल्क भी निगम को मिलने लगेगा।
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कचरा प्रबंधन होगा बड़ी चुनौती
नगर निगम क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 1200 मिट्रिक टन कचरे के निस्तारण में कई चुनौतियां आ रही है। ऐसे में इंदिरापुरम के रखरखाव की जिम्मेदारी मिलने के बाद वहां से प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले करीब 150 टन कचरे को ठिकाने लगा पाना आसान नहीं होगा। नगर निगम ने इसके लिए जीडीए से मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर और कचरा ट्रांसफर स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराने को कहा है।
अब बजट में नहीं फंसेगा पेंच
इंदिरापुरम हस्तांतरण के लिए पहले 350 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन जीडीए की तरफ से इतनी राशि देने पर सहमति नहीं जताई थी। इसके बाद 200 से 250 करोड़ रुपये पर सहमति बनी थी लेकिन इतनी राशि भी नहीं मिल सकी, जिसकी वजह से हस्तांतरण की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। हालाकि, निगम अधिकारियों का तर्क है कि इस बार दोनों विभागों ने संयुक्त सर्वे किया है। इसलिए बजट को लेकर कोई पेंच नहीं फंसेगा।
बयान
इंदिरापुरम के संयुक्त सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जीडीए उपाध्यक्ष के साथ जल्द ही बैठक की जाएगी। सामुदायिक केंद्रों सहित अन्य सुविधाओं को निगम को देने की मांग हमने की है। - विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त