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Ghaziabad News: सम्मन तामील कराने आए सिपाही को पीटा...पुलिस चौकी तक घसीटा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2025 12:03 AM IST
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The constable who came to serve the summons was beaten...dragged to the police post
लोनी। लोनी बाॅर्डर के जवाहर नगर में सम्मन तामील कराने के लिए पहुंचे सीबीआई के सिपाही वीरी सिंह को सेवानिृत्त शिक्षक लक्ष्मण सिंह और उसके बेटे दीपक ने पहले बेरहमी से पीटा और फिर काॅलर पकड़कर घसीटते हुए 250 दूर पुलिस चौकी तक ले गए। पिटाई और घसीटे जाने से वीरी सिंह घायल हो गए। इसके बावजूद पिता-पुत्र उन्हें पीटते रहे। चौकी प्रभारी के आ जाने पर उनके सामने भी पीटा।
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चौकी के सिपाहियों ने बड़ी मुश्किल से वीरी सिंह को छुड़ाया और दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता ( बीएनएस ) के तहत लूट के प्रयास की धारा 309 (2), चोरी का प्रयास 317 (2), जानबूझकर चोट पहुंचाना 115 (2), सरकारी कर्मी को काम करने से रोकने और आपराधिक बल का इस्तेमाल की धाराओं 121 (1), 132 और 126 (2) में नामजद मुकदमा दर्ज किया है।
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एसीपी अंकुर विहार अजय कुमार सिंह ने बताया कि लक्ष्मण प्रसाद सीबीआई कोर्ट में चल रहे भ्रष्टाचार के एक मामले में गवाह है। न्यायालय से गवाही देने के लिए पहुंचने का सम्मन जारी हुआ था। बृहस्पतिवार की शाम सीबीआई के सिपाही वीरी सिंह सम्मन तामील कराने उनके घर पहुंचे थे। जैसे ही वीरी सिंह ने सम्मन दिखाया, लक्ष्मण सिंह और दीपक ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया।
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लक्ष्मण सिंह ने जब अपना पहचान पत्र दिखाया तो उसे छीनने की कोशिश करने लगे। इस पर लक्ष्मण सिंह डायल 112 पर फोन करने के लिए मोबाइल निकाला तो दीपक ने मोबाइल छीन लिया। पुलिस चौकी में दोनों का रवैया बदला नहीं। वे सिपाही को पीटते ही रहे। दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।




आरोपी बोली, सिपाही



को फर्जी समझकर पीटा



एसीपी ने आरोपियों से पूछताछ की। उनसे मुख्य रूप से यही सवाल पूछा गया कि सिपाही को पीटने की वजह क्या रही। एसीपी ने बताया कि दोनों का जवाब था कि वे सिपाही को फर्जी समझ बैठे। उन्हें लगा कि पैसा वसूली के लिए सिपाही सम्मन जारी होने की बात कह रहा है। इसलिए, उसकी पिटाई कर दी। उसने भागने का प्रयास किया, इसलिए पकड़कर पुलिस चौकी तक ले गए। एसीपी का कहना है कि अगर आरोपियों को सिपाही के फर्जी होने का शक था तो उन्हें पुलिस को सूचना देनी चाहिए थे। कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था। सिपाही ने सिर्फ गवाही का सम्मन रिसीव करने के लिए कहा था।
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