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बच्चों! संभलकर फेंकना गुब्बारा... जिन्दगी न मिलेगी दोबारा
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 24 Mar 2016 12:04 AM IST
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होली
- फोटो : अमर उजाला
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होली पर सब मस्ती में डूबे हैं। क्या बच्चे, क्या बड़े। कॉलोनी में धमाचौकड़ी मचाती बच्चों की टोली राहगीरों को रंगों से सराबोर करने को बेताब है। पिचकारी और रंगों से भरे गुब्बारों से रंगने में बच्चे कुछ ज्यादा ही उत्साहित रहते हैं।
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बच्चे छत ही नहीं रेलिंग पर भी खड़े होकर रंग भरे गुब्बारे फेंकते हैं। ऐसे में पैरेंट्स को यह ध्यान रखना होगा कि इस दौरान उनसे कोई हादसा न हो जाए। कहीं गुब्बारा फेंकने के चक्कर में बच्चे रेलिंग या छत से न गिर जाएं।
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दिल्ली के रानीबाग इलाके में ऐसा ही हादसा हो चुका है। रेलिंग से गुब्बारा फेंकने के चक्कर में बच्चा सड़क पर आ गिरा। इस समय वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। बच्चे के गुब्बारा मारने और उसके नीचे गिरने की क्लिप आजकल व्हाट्स एप पर वायरल है।
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आपके आसपास ऐसा हादसा न हो जाए, इसका ध्यान रखना सबकी जिम्मेदारी है। डीएम विमल कुमार शर्मा ने लोगों से अपील की है कि होली के इस त्योहार को हर्षोल्लास से मनाएं, मगर हुड़दंग न मचाएं।
इसके साथ ही बड़ों को चाहिए कि वह बच्चों को अपनी निगरानी में रखकर ही होली खिलाएं। रंगों के फुहार में खूब भीगें, गुलाल और अबीर से सतरंगी हो जाए और हर तरफ मुस्कुराहट बांटें। मगर होली में खुशियों के रंग बांटने में अपना और अपनों का ख्याल रखना कतई ना भूलें।
होली बातों का रखें ख्याल
- अंडों, गुब्बारों, मिट्टी और कीचड़ से होली न खेलें।
- सिर्फ हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करें।
- डॉक्टरों और अस्पताल के फोन नंबर पास रखें।
- नशे से दूरी बनाए रखें।
रंग खेलने से पहले ये करें तैयारी
- रंग खेलने से पहले नारियल का तेल या वैसलीन लगाएं
- बालों के बचाने के लिए टोपी पहले या सिर पर कपड़ा बांधें।
- शरीर के खुले भागों पर नारियल तेल और मॉश्चराइजर लगाएं।
- कपड़े ऐसे पहने, जिससे शरीर पूरी तरह ढक जाए।
इंसेट: ऐसे छुड़ाए रंगों को: ब्यूटी एक्पसर्ट की सलाह
- कच्चे दूध और ब्रेड को भिगोकर रंग साफ करें
- रंग लगते ही फौरन पानी से धोएं।
- सॉफ्ट साबुन का ही इस्तेमाल करे।
- त्वचा को रगड़े नहीं।
- रंग नहीं जाए तो दो से तीन बार नहाए।
इंसेट: आई स्पेशलिस्ट डा. संजय तेवतिया के अनुसार
- आंखों में रंग या गुलाल चला जाए तो फौरन आंखों को धोए
- आंखों को रगड़े या मसलें नहीं।
- अस्थमा रोगी और सांस के रोगी सूखे रंगों से बचे
- बालों में रंग डाले जाने पर झाड़े नहीं।
- डॉक्टर को फौरन दिखाएं।
- जिन्हें एलर्जी है, वे रंगों से दूर रहे।
डॉक्टरों की सलाह
बाजार की खाने की वस्तुओं से परहेज करें। मिलावटी खाद्य पदार्थों से म्युकस मेमबरेंस (मुंह, पेट, आंत आदि की झिल्ली) पर असर पड़ता है। छाले पड़ने के साथ ही घाव का रूप ले सकते हैं। बच्चों को कालरा और टाइफायड जैसी बीमारी मिलावटी खाने से हो सकती है। ऐसे में घर के बने पकवान ही खाएं। - डा. अंशुल वार्ष्णेय, फिजिशियन
लाल रंग में मरकरी सल्फेट, बैंगनी में क्रोमियम, हरे में ब्रोमाइड व कापर सल्फेट अैर काले में लेड ऑक्साइड होता है। इन केमिकल से एलर्जी हो सकती है। नेचुरल और आर्गेनिक रंगों से खेलें। कान और नाक में रंगों को जाने से बचाएं। - डा. बीपी त्यागी , ईएनटी स्पेशलिस्ट
रंगों में मिले भारी तत्व त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंगों से बचाने के लिए होली खेलने से पहले त्वचा पर तेल या पेट्रोलियम जेली का प्रयोग करें। परेशानी होने पर फौरन डॉक्टर को दिखाएं, जिससे समय रहते इलाज मिल सके।
- डा. भावुक मित्तल, स्किन स्पेशलिस्ट
अस्पतालों में रहेगी विशेष व्यवस्था
होली के मद्देनजर एमएमजी और संयुक्त जिला अस्पताल में अतिरिक्त एहतियात बरती जाएगी। इसके लिए अस्पताल में अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की गई है। अस्पताल में इमरजेंसी सेवाओं के स्टाफ को भी बढ़ाया जाएगा।
इमरजेंसी में ऑन कॉल डॉक्टर बुलाए जाएंगे जिसमें सर्जन आदि शामिल रहेंगे। अस्पताल में दस अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि दवाओं का संपूर्ण स्टॉक रखने के साथ ही नर्स और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के साथ ही डॉक्टरों की तैनाती रहेगी।
ट्रॉमा सेंटर में सर्जन हर वक्त तैनात रहेंगे। एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. सुनील वाधवा ने बताया इमरजेंसी सेवाएं चुस्त होगी, जिससे किसी भी परिस्थिति से निपटा जा सकते। पैरामेडिकल स्टाफ की पूरी क्षमता रहेगी। सीएमओ ने बताया कि किसी भी इमरजेंसी के लिए एंबुलेंस सेवा चुस्त रहेगी।