{"_id":"65df9f51b42241f8ee09fda1","slug":"the-case-lasted-for-32-years-and-got-a-punishment-of-five-years-ghaziabad-news-c-30-gbd1015-320580-2024-02-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: 32 साल चला केस और पांच साल की मिली सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: 32 साल चला केस और पांच साल की मिली सजा
विज्ञापन
गाजियाबाद। फर्जीवाड़े के मामले में 32 साल तक केस चलने के बाद बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने यूको बैंक के तत्कालीन प्रबंधक को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 80 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि केके भारद्वाज 1992 में मुजफ्फरनगर स्थित यूको बैंक शाखा में प्रबंधक थे। आरोप है कि तैनाती के दौरान इन्होंने पद का दुरुपयोग कर कई लोगों के साथ मिलकर फॉरेन एक्सचेंज (इम्यूनिटीज) स्कीम 1991 के अंतर्गत आयकर में छूट प्रदान करने का दावा किया था। इन्होंने फर्जी खाते खोल, बैंक ड्राफ्ट बनाकर उसके वाउचर पर जाली हस्ताक्षर करने का भी आरोप है। जिससे लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले में 31 मार्च 1993 को सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद केके भारद्वाज को गिरफ्तार किया था। पुख्ता साक्ष्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने सजा सुनाई है।
विज्ञापन
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि केके भारद्वाज 1992 में मुजफ्फरनगर स्थित यूको बैंक शाखा में प्रबंधक थे। आरोप है कि तैनाती के दौरान इन्होंने पद का दुरुपयोग कर कई लोगों के साथ मिलकर फॉरेन एक्सचेंज (इम्यूनिटीज) स्कीम 1991 के अंतर्गत आयकर में छूट प्रदान करने का दावा किया था। इन्होंने फर्जी खाते खोल, बैंक ड्राफ्ट बनाकर उसके वाउचर पर जाली हस्ताक्षर करने का भी आरोप है। जिससे लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले में 31 मार्च 1993 को सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद केके भारद्वाज को गिरफ्तार किया था। पुख्ता साक्ष्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने सजा सुनाई है।
विज्ञापन