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Ghaziabad News: ठप पड़े विकास कार्याें से हटेगा ब्रेक, 100 वार्डाें में होंगे 50 करोड़ के काम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jul 2023 01:09 AM IST
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The brake will be removed from stalled development works, works worth 50 crores will be done in 100 wards
गाजियाबाद। शहर में ठप पड़े विकास कार्य फिर से शुरू होंगे। नगर निगम हर वार्ड में दिसंबर तक 50-50 लाख के विकास कार्य कराएगा। यानी 100 वार्डाें में 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नगर निगम की ओर से हर वार्ड में 10-10 बेंच और 50-50 स्ट्रीट लाइटें भी दी जाएंगी। नए सदन के गठन के बाद शुक्रवार को हुई कार्यकारिणी समिति की पहली बैठक में वार्ड का कोटा तय कर दिया गया है। सीवर जाम से परेशान पार्षदों ने प्राइवेट कंपनी वीए टेक वबाग के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने और यूजर चार्ज वसूली का ठेका खत्म करने समेत 10 अन्य प्रस्तावों पर भी सहमति की मुहर लगा दी है।
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नगर निगम सभागार में महापौर सुनीता दयाल की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में सबसे पहले समिति के उपाध्यक्ष का निर्विरोध चुनाव हुआ। भाजपा के पार्षद राजीव शर्मा कार्यकारिणी समिति के उपाध्यक्ष बने। बैठक के एजेंडे में प्रस्ताव शामिल नहीं थे, इसकी वजह से महापौर की अनुमति पर अन्य मौखिक प्रस्तावों पर चर्चा की गई। पार्षदों ने शहर में विकास कार्य ठप होने का मुद्दा उठाया। उपाध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा कि वार्डाें की जनता पार्षदों से विकास कार्य कराने की उम्मीद से बांधे हुए हैं। बीते साल काम कम हुए हैं, ऐसे में उन्होंने इस साल हर वार्ड में एक-एक करोड़ के विकास कार्य कराने का प्रस्ताव रखा। अधिकारियों ने इस पर असमर्थता जताई। इसके बाद महापौर ने एक करोड़ की बजाय हर वार्ड में दिसंबर तक 50-50 लाख के काम कराने पर सहमति दी। हर वार्ड में 25 बेंच और 100 स्ट्रीट लाइटें लगाने के प्रस्ताव को भी संशोधित कर उन्होंने 10 बेंच और 50-50 स्ट्रीट लाइटें लगाने पर सहमति दे दी।
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कूड़ा निस्तारण का ठेका निरस्त न होने पर भड़के पार्षद
बीते दिनों महापौर सुनीता दयाल ने दिल्ली की गाड़ियों को नगर निगम के डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा लाते हुए पकड़कर पुलिस को सौंपा था। इस मामले में बैंकफुट पर आए अफसरों ने कूड़ा निस्तारण का काम कर रही फर्म का ठेका 12 जुलाई तक निरस्त कर नए सिरे से टेंडर जारी करने का दावा किया था, लेकिन ऐसा नहीं किया। अफसरों की मेहरबानी से अभी भी वही फर्म काम कर रही है। इस पर कार्यकारिणी बैठक में पार्षद भड़क गए। उन्होंने नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार से इस पर जवाब मांगा। वह घुमाकर जवाब देने लगे और कहा कि कोई ऐसी फर्म नहीं मिली जो खुद ही लैंडफिल साइट के लिए किसानों से जमीन का इंतजाम भी कर ले। इस पर पार्षद और नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि जमीन का इंतजाम नगर निगम के अधिकारी करें और पुरानी फर्म का टेंडर निरस्त कर दोबारा टेंडर जारी किए जाएं।
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पंजीकरण कराने से पहले कुत्तों का बधियाकरण कराना जरूरी
अब अगर एक साल से ज्यादा उम्र का कुत्ता पालना है तो नगर निगम में पंजीकरण कराने के लिए उसका बधियाकरण कराना जरूरी होगा। कुत्ते की उम्र अगर कम तो एक साल का होने पर बधियाकरण कराना होगा। नसबंदी के सर्टिफिकेट के बिना नगर निगम में उसका पंजीकरण नहीं होगा। कुत्ते के बीमार होने की स्थिति में इससे छूट मिल सकेगी। वहीं 200 वर्ग गज के मकान में अधिकतम 2 कुत्ते और 300 वर्ग गज के मकान में अधिकतम 4 कुत्ते पालने की अनुमति मिल सकेगी। पांच या इससे ज्यादा कुत्ते पालने के लिए पशु शेल्टर के नियम लागू होंगे ओर इसे आवासीय क्षेत्र में नहीं रखा जा सकेगा। इसके साथ ही पेट शॉप और कुत्तों का क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों को पांच हजार रुपये शुल्क जमा कराकर नगर निगम में पंजीकरण कराना होगा। निगम के नियमों की अवहेलना करने पर उन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। कार्यकारिणी ने इन प्रस्तावों को भी पास कर दिया है।
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