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Ghaziabad News: एक साथ नहीं होगा कुर्की का नोटिस और आदेश
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गाजियाबाद। किसी भी आपराधिक मामले में आरोपी के अदालत में पेश नहीं होने पर अब कुर्की का नोटिस और कुर्की का आदेश एक साथ नहीं होगा। अदालत से नोटिस जारी होने के 30 दिन बाद ही आरोपी के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर कुर्की करने का आदेश जारी होगा। संपत्ति भी सिर्फ वही कुर्क की जाएगी, जो आरोपी के नाम पर दर्ज होगी। उसके परिवार की संपत्ति दर्ज नहीं होगी।
बुधवार को जनपद न्यायालय सभागार में न्यायिक अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता न्यायालय के वरिष्ठ अधिकारी प्रशासनिक अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हीरालाल ने बैठक की। बैठक में प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि विशेष रूप से न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति को निर्दिष्ट स्थान और समय पर उपस्थित होने के लिए जारी की गई लिखित उद्घोषणा का प्रकाशन कम से कम तीस दिन पहले किया जाएगा। इसके साथ ही, न्यायालय को अपने आदेश में यह स्पष्ट करना होगा कि जिसके खिलाफ वारंट जारी किया गया है, वह फरार है या गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को छिपा रहा है।
संपत्ति की कुर्की के आदेश से पहले यह दर्ज करना आवश्यक होगा कि संलग्न की जाने वाली संपत्ति उद्घोषित व्यक्ति की है। इस आदेश में न्यायालय को स्वतंत्र न्यायिक विचार का प्रयोग करना होगा। यदि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संलग्न संपत्ति पर दावा किया जाता है और कहा जाता है कि संपत्ति का अभियुक्त से कोई संबंध नहीं है, तो न्यायालय को इस दावे की जांच करनी होगी। बैठक में सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे बीएनएसएस की धारा 84 और 85 के प्रावधानों के तहत आदेश जारी करें। बैठक में सभी न्यायिक अधिकारी और कोर्ट मैनेजर उपस्थित थे।
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बुधवार को जनपद न्यायालय सभागार में न्यायिक अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता न्यायालय के वरिष्ठ अधिकारी प्रशासनिक अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हीरालाल ने बैठक की। बैठक में प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि विशेष रूप से न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति को निर्दिष्ट स्थान और समय पर उपस्थित होने के लिए जारी की गई लिखित उद्घोषणा का प्रकाशन कम से कम तीस दिन पहले किया जाएगा। इसके साथ ही, न्यायालय को अपने आदेश में यह स्पष्ट करना होगा कि जिसके खिलाफ वारंट जारी किया गया है, वह फरार है या गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को छिपा रहा है।
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संपत्ति की कुर्की के आदेश से पहले यह दर्ज करना आवश्यक होगा कि संलग्न की जाने वाली संपत्ति उद्घोषित व्यक्ति की है। इस आदेश में न्यायालय को स्वतंत्र न्यायिक विचार का प्रयोग करना होगा। यदि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संलग्न संपत्ति पर दावा किया जाता है और कहा जाता है कि संपत्ति का अभियुक्त से कोई संबंध नहीं है, तो न्यायालय को इस दावे की जांच करनी होगी। बैठक में सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे बीएनएसएस की धारा 84 और 85 के प्रावधानों के तहत आदेश जारी करें। बैठक में सभी न्यायिक अधिकारी और कोर्ट मैनेजर उपस्थित थे।
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