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Ghaziabad News: आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ आसमां से जमीन तक दिखा वायु सेना का पराक्रम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 02:35 AM IST
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The Air Force demonstrated its prowess from the skies to the ground with modern fighter jets.
वायु सेना दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल में हरक्यूलस से सलामी देते वायु सेना के पॉयलट। संवाद
साहिबाबाद। आसमान में लहराता हुआ तिरंगा और जमीन पर कदमताल करते भारतीय वायु सेना के जवान देश के गौरव तिरंगे को अपनी सलामी दे रहे थे। कुछ ऐसा ही गौरवान्वित दृश्य मंगलवार की सुबह हिंडन एयरफोर्स परिसर में वायु सेना दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल परेड में देखने को मिली।
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आठ अक्तूबर को भारतीय वायु सेना अपना 94वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस बार वायुसेना का यह कार्यक्रम अचूक, अद्द्य व सटीक थीम पर आयोजित कर रहा है। इससे पहले मंगलवार को हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर फुल ड्रेस रिहर्सल हुई। इसकी शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। सबसे पहले तीन हेलीकॉप्टरों ने राष्ट्रध्वज के साथ परिसर में प्रवेश किया। हेलीकॉप्टरों के जरिये जवानों ने ध्वज फॉर्मेशन बनाई, जिसमें बीच में उड़ रहे हेलीकॉप्टर के नीचे भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा गर्व से लहरा रहा था। रिहर्सल के मुख्य अतिथि एयर मार्शल जॉर्ज थॉमस की अगुवाई में सभी जवानों ने तिरंगे को सलामी दी। फ्लैग विंटेज फ्लीट ने भी हवाई करतब दिखाए। इसके साथ ही स्टैटिक डिस्प्ले में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, मिसाइलों और एयर डिफेंस सिस्टम को प्रदर्शित किया गया। वायु सेना की ओर से पहली बार आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ वायुसेना की पुरानी विरासत भी सामने आई। विंटेज फ्लीट के हवाई प्रदर्शन ने परेड में वायुसेना की विरासत को भी दिखाया। रिहर्सल के दौरान जवानों के परिजन और आम लोग भी मौजूद रहे। आठ अक्तूबर 1932 में भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई और 1933 में वायुसेना का पहला परिचालन स्क्वाड्रन बनाया गया था।
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मैदान में पहली बार दिखे ब्रह्मोस और थ्री नॉट थ्री को लीड करती महिला जवान
रिहर्सल के दौरान ब्रह्मोस के साथ ही थ्री नॉट थ्री को लीड करतीं महिला जवानों ने दर्शक दीर्घा में शामिल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कदम ताल मिलाते हुए हथियार से शत्रु पर निशाना साधती हुईं महिला जवानों की जुगलबंदी देखते ही बनती थी। यह पहली बार है जब किसी महिला सैन्यकर्मी ने इस पारंपरिक और महत्वपूर्ण थ्री नॉट थ्री ड्रिल की कमान संभाली और टुकड़ी का नेतृत्व किया। इस विशेष ड्रिल में महिला बटालियन शामिल हुईं, इसमें एक फ्लाइट लीडर (महिला कर्मी) के साथ कुल 35 जवान कदमताल मिलाते नजर आए।
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इनसेट

सुबह सात बजे से एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचने लगे जवानों के परिवार

- नागौर से आईं महिलाओं के देशी अंदाज ने सभी का खींचा ध्यान
एयरफोर्स डे के रिहर्सल में सुबह सात बजे से लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दिल्ली-एनसीआर से पहुंचा तो कोई अपनों का पराक्रम देखने को दूसरे राज्य व शहरों से विशेष तौर पर इसी कार्यक्रम के लिए पहुंचा था। राजस्थान के नागौर से आईं निरमा, चिम्मा और सायर के देसी अंदाज ने लोगों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम के बाद जब लोग प्रदर्शनी में लगे लड़ाकू विमानों के साथ सेल्फी लेने पहुंचे। उन्हीं के बीच राजस्थान की यह महिलाएं अपने क्षेत्रीय लिबास में कार्यक्रम में शामिल होकर सबका ध्यान खींचा। चिम्मा ने कहा कि वह अपने इस अंदाज से अपनी संस्कृती से जुड़ाव दिखाना चाहती हैं। वहीं, राजस्थान के सीकर से पहुंची गुलाब देवी ने कहा कि पहली बार इस कार्यक्रम में शामिल हुई हैं। गुलाब देवी ने कहा कि यहां आकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। वह बेटे के शौर्य को देखकर अभिभूत हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट बी मंडल की पत्नी ने कहा कि वह इस कार्यक्रम का हर साल इंतजार करती हैं, यहां आकर उन्हें फक्र होता है।
इनसेट

प्रदर्शनी में लगाए गए लड़ाकू विमानों की खासियत
ब्रह्मोस
यह हवा, जमीन और समुद्र तीनों जगह से प्रहार करने में सक्षम मल्टी-प्लेटफ़ॉर्म मिसाइल है।
राफेल
राफेल एक 4.5 पीढ़ी का, शक्तिशाली और बहुउपयोगी लड़ाकू विमान है।

एसयू-30 एमकेआई की खासियत
सुखोई एसयू-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का एक भारी, लंबी दूरी और सबसे घातक 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है। इसमें थ्रस्ट-वेक्टरिंग इंजन और कैनार्ड्स लगे हैं, इससे यह हवा में अत्यधिक तीव्र और असाधारण पैंतरेबाज़ी (कोबरा मनोवर) करने में सक्षम है।
डीओ-228 (Dornier Do-228)
एक अत्यधिक बहुमुखी और भरोसेमंद ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप हल्का परिवहन विमान है। सैन्य अभियानों से लेकर नागरिक उड्डयन तक, इस विमान का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
जगुआर फाइटर जेट
यह फाइटर जेट भारतीय वायुसेना का एक शक्तिशाली और भरोसेमंद डबल-इंजन वाला डीप-पेनेट्रेशन स्ट्राइक लड़ाकू विमान है, इसे वायुसेना में ''''शमशेर'''' नाम से भी जाना जाता है।
रोहिणी रडार
रोहिणी रडार डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एक अत्याधुनिक 3डी मध्यम दूरी का निगरानी रडार है। यह भारतीय वायु सुरक्षा प्रणाली के लिए बेहद अहम भूमिका निभाता है।
आकाश
भारतीय वायुसेना का आकाश मुख्य रूप से भारत की स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली को संदर्भित करता है, जो जमीन से हवा में मार करने वाली एक प्रमुख रक्षा प्रणाली है।
एएलएच एमके
ध्रुव के नाम से जाना जाता है, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित एक जुड़वा इंजन वाला बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर है। भारतीय वायुसेना इसके विभिन्न संस्करणों का उपयोग अपनी परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार करती है।

तेजस
एक स्वदेशी, हल्का और बहु-उपयोगी सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने डिज़ाइन और विकसित किया है।
एसआरएलएम
भारतीय वायुसेना में SRLM का तात्पर्य शॉर्ट रेंज लॉइटरिंग मुनिशन्स से है।
यह एक आधुनिक स्वदेशी हथियार प्रणाली (आत्मघाती ड्रोन या कामिकेज़ ड्रोन) है जो हवा में कुछ समय तक मंडराने और लक्ष्य की पहचान होते ही उस पर सटीक आत्मघाती हमला करने में सक्षम है।
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