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Ghaziabad News: जिले में 1.5 लाख अस्थमा के मरीजों में दस प्रतिशत बच्चे

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 07 May 2024 04:39 AM IST
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Ten percent of the 1.5 lakh asthma patients in the district are children
गाजियाबाद। जिले में 1.50 लाख लोग अस्थमा से प्रभावित हैं। इसमें हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी हो रही है। अस्थमा प्रभावितों में 10 प्रतिशत मरीजों की उम्र दो से 14 वर्ष के बीच है। एक प्रतिशत मरीज ऐसे भी हैं, जो इलाज नहीं करवा रहे हैं। यह जानकारी विश्व अस्थमा दिवस से पूर्व आईएमए से जुड़े चिकित्सकों ने प्रेसवार्ता में दी। अस्थमा के प्रति जागरूक करने के लिए सात मई को विश्व अस्थमा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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सोमवार को आईएमए भवन में आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. वीबी जिंदल ने बताया कि देश में अस्थमा के सबसे ज्यादा मामले एनसीआर में हैं। इनमें भी गाजियाबाद अस्थमा के मामले में उत्तर प्रदेश में टॉप पर हैं। इलाज के बेहतर संसाधन होने से गाजियाबाद और एनसीआर में अस्थमा के कारण होने वाली मौत न के बराबर हैं। डॉ. जिंदल ने कहा कि गर्मी बढ़ रही है। ऐसे मौसम में अस्थमा के मरीज को सतर्क रहने की जरूरत है।
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गर्भस्थ शिशु को गंभीर खतरा
आईएमए गाजियाबाद की अध्यक्ष व वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वाणी पुरी रावत ने बताया कि यदि गर्भवती महिला को अस्थमा है तो गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए घातक होता है। इसके कारण बच्चे का विकास प्रभावित होता है। उसकी मौत भी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को इससे बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। कई अध्ययन में पता चला है कि गर्भावस्था में अस्थमा बढ़ता और घटता भी है। कई मामलों तो हार्मोनल बदलाव के चलते अस्थमा खत्म भी हो जाता है।
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सावधानी से करें इन्हेलर का प्रयोग

आईएमए गाजियाबाद के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि कोरोना काल में फेफड़ों में सबसे अधिक संक्रमण फैला था। अब लोगों में फेफड़ों की सेहत को लेकर जागरूकता आई है। पहले लोग फेफड़ों में होने वाले संक्रमण को लेकर गंभीर नहीं थे। डॉ. आशीष ने कहा कि अस्थमा में इन्हेलर से फौरी तौर पर आराम मिल जाता है, लेकिन इनका इस्तेमाल संभलकर करना चाहिए। इन्हेलर के ज्यादा प्रयोग या लापरवाही से बीमारी गंभीर भी हो सकती है। इन्हेलर लेने के बाद कुल्ला जरूर करना चाहिए और केवल बताई गई मात्रा में ही इन्हेलर लेना चाहिए।


अस्थमा के शुरुआती लक्षण
लंबे समय तक रहने वाली खांसी, सुबह और शाम के समय होने वाली खांसी, बार-बार छींक आना, खांसी और छींक के साथ कफ आना, यह अस्थमा के प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों के उभरने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को धूल से एलर्जी होती है उन्हें किसी भी तरह के प्रदूषण से भी बचना चाहिए। डॉ. आशीष ने बताया कि सांस लेने में परेशानी, व्यायाम के बाद खांसी, सांस लेने के दौरान घरघराहट और छाती में जकड़न महसूस होना भी अस्थमा के लक्षण हैं।


इनसे अस्थमा से होगा बचाव
धूम्रपान बंद करने से बचें, धूम्रपान कर रहे लोगों के आसपास न जाएं।

प्रदूषण से बचने के लिए घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाएं।

नियमित व्यायाम करें।

पौष्टिक आहार लें।
अनावश्यक दवाइयों का सेवन करने से बचें।
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