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Ghaziabad News: सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, 200 की बजाय अब भरना होगा 22 करोड़ का जुर्माना

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 13 Oct 2023 01:02 AM IST
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Supreme Court gave relief, instead of Rs 200, now a fine of Rs 22 crores will have to be paid.
साहिबाबाद। जीडीए और नगर निगम पर पूर्व में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तरफ से शक्ति खंड 4 स्थित डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा नहीं फेंकने के आदेश का पालन न करने पर 200 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। इसमें 150 करोड़ का जुर्माना नगर निगम और जीडीए पर 50 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। इसके खिलाफ दोनों ही विभागों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस मामले में सोमवार को हुई सुनवाई में जीडीए और नगर निगम को राहत देते हुए जुर्माना राशि को 200 करोड़ से घटाकर 22 करोड़ कर दी गई। इनमें 20 करोड़ जुर्माना जीडीए और 2 करोड़ का जुर्माना नगर निगम को भरना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों ही एजेंसियों को छह हफ्ते में यह रुपए जमा करवाने होंगे। इस जुर्माना राशि को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने में ठीक करवाने में लगाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कनफेडरेशन ऑफ ट्रांस हिंडन आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने खुशी जताई है। दरअसल आवासीय इलाके शक्ति खंड 4 के डंपिंग ग्राउंड के कारण होने वाले प्रदूषण से निजात पाने के लिए फेडरेशन लंबे समय से लड़ाई लड़ रही है। यह केस 2018 से ही चल रहा था। इसमें कई बार आरडब्ल्यूए के बैनर तले स्थानीय लोगों ने प्रदूषण के खिलाफ नारेबाजी और पैदल मार्च भी निकाला था। सबसे पहले एनजीटी ने अपनी सुनवाई में पचास लाख का जुर्माना लगाने के साथ ही डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा फेंकने को बंद करने के आदेश दिए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर पिछले साल 6 सितंबर को 200 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि नगर निगम और जीडीए दोनों इस डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा हटवाएगा। जीडीए ने यहां से कूड़ा हटाने की बात मानी और यहां मियावाकी पद्वती से पौधे लगाने की बात कही। वहीं जुर्माना राशि के विरोध में जीडीए और नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसी मामले में सोमवार को सुनवाई हुई।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा निगरानी
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन की निगरानी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। आवासीय इलाके से कूड़े का निस्तारण और एसटीपी की समस्या से लोगों को नगर निगम और जीडीए निजात दिला रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा की जाएगी। साथ ही जुर्माने की राशि का उपयोग प्रदूषण से राहत दिलाने में खर्च किया जाएगा।
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लगातार डाला जा रहा था कूड़ा
फेडरेशन पदाधिकारी कुलदीप सक्सेना ने बताया कि एनजीटी आदेश के बावजूद जीडीए की ओर से यहां लगातार कूड़ा डाला जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट में हमने वर्तमान की तस्वीर और वीडियो साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किए जिससे यह साबित हो गया कि जीडीए एवं नगर निगम एनजीटी आदेश के बावजूद लोगों को प्रदूषण से राहत नहीं दिला पा रहे।
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