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शहर में रहना हुआ महंगा

ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद Updated Thu, 23 Jun 2016 12:28 AM IST
नगर निगम
नगर ‌निगम - फोटो : अमर उजाला
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इतनी तेजी से तो मौसम का भी मिजाज नहीं बदला, जितनी तेजी से महापौर का रवैया बदल गया। दरअसल, निगम में अफसरों ने हाउस टैक्स छूट खत्म की तो जनवरी में महापौर का उपचुनाव लड़ रहे भाजपा नेता अशु वर्मा समेत तमाम भाजपाइयों को लगा कि अफसर जनता पर अत्याचार कर रहे हैं।
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उन्होंने चुनाव जीतने के बाद छूट जारी रखने का वादा किया था। फरवरी में उनकी ताजपोशी हो गई, लेकिन महज चार महीने बाद वही महापौर और भाजपा पार्षद हाउस टैक्स में छूट का विरोध कर रहे हैं।

बुधवार को नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक हुई तो महापौर व पार्षदों ने छूट खत्म करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। निगम ने पांच फीसदी हाउस टैक्स बढ़ाकर जेब पर बोझ डाल दिया है तो दूसरी ओर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए यूजर चार्ज लागू कर जनता की जेब से मोटा पैसा निकालने का रास्ता भी तैयार कर दिया है।

अतिक्रमण साफ करने के नाम पर निगम ने एक ऐसी ‘स्पॉट फाइन पॉलिसी’ तैयार कर दी है ,जिसकी जद में ठेले वाले से लेकर बड़े शोरूम संचालक भी आ जाएंगे। कार्यकारिणी समिति की बैठक में कुल 35 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें लैंड एक्सचेंज समेत 6 प्रस्ताव निरस्त कर 29 पास कर दिए गए। अब यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किए जाएंगे। यहां से मंजूरी मिलने पर इन्हें लागू कर दिया जाएगा।

पांच फीसदी बढ़ा हाउस टैक्स, हर साल होगी बढ़ोतरी

शहर की जनता को एक बार फिर बढ़ा हाउस टैक्स देना पड़ेगा। नगर निगम ने बीते साल 10 फीसदी हाउस टैक्स बढ़ाने के बाद इस साल फिर 5 फीसदी हाउस टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। बुधवार को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में महापौर, पार्षदों और अफसरों ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह बढ़ी दरें बीते एक अप्रैल से ही लागू मानी जाएंगी।

निगम अधिकारियों का कहना है कि निगम सदन ने बीते साल एक साथ 25 फीसदी हाउस टैक्स बढ़ाने को मंजूरी न देकर 10 फीसदी हाउस टैक्स बढ़ाया था। उसी के साथ हर साल 5 फीसदी हाउस टैक्स बढ़ाने का भी प्रस्ताव पास किया था।

ऐसे में सदन के उसी फैसले को लागू किया गया है। पार्षदों ने भी निगम की आमदनी बढ़ाने की दलील देते हुए इस पर मुहर लगा दी है। हाउस टैक्स बढ़ने का असर शहर के करीब पौने तीन लाख भवन मालिकों पर पड़ेगा। सबसे ज्यादा असर ऐसे कामर्शियल भवनों, मॉल्स, मल्टीप्लेक्स पर पड़ेगा जिनका हाउस टैक्स सालाना लाखों में होता है।

बढ़ जाएगी एनुअल रेंटल वेल्यू
हाउस टैक्स की दरों में पांच फीसदी की बढ़ोतरी किए जाने के बाद भवनों की एनुअल रेंटल वेल्यू बढ़ जाएगी। इसी पर नगर निगम 10-10 फीसदी हाउस टैक्स और वाटर टैक्स वसूलता है।

जबकि एआरवी की 4 फीसदी रकम सीवर टैक्स के रूप में वसूली जाती है। एआरवी का कुल 24 फीसदी टैक्स वसूला जाता है। मिसाल के तौर पर पहले 2000 रुपये सालाना संपत्ति कर देने वाले भवन मालिक को 2100 रुपये चुकाने होंगे। इसी अनुपात में टैक्स में बढ़ोतरी होगी।

थोड़ा सा कूड़ा उठेगा...यूजर चार्ज जेब ज्यादा ढीली करेगा

शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए जरूरी डंपिंग ग्राउंड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट है नहीं और निगम ने यूजर चार्ज की दरें भी तय कर दीं। इस दायरे में ईडब्ल्यूएस मकानों, पॉश कॉलोनियों और छोटे दुकानदारों से लेकर मॉल्स-मल्टीप्लेक्स को भी ला दिया गया है।

पूर्व में जहां 70 से 500 रुपये यूजर चार्ज तय किया गया था, वहीं अब इसे 50 हजार रुपये महीना तक बढ़ा दिया गया है। छोटे दुकानदारों को भी अब यूजर चार्ज के रूप में 1000-1500 रुपये चुकाने पड़ेंगे।

बड़े अस्पतालों और 5 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा बड़े मॉल्स-मल्टीप्लेक्स को 50 हजार रुपये महीना यूजर चार्ज चुकाना होगा। छोटे अस्पतालों को भी पांच से 15 हजार रुपये तक यूजर चार्ज देना पड़ेगा।

वहीं गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले ईडब्ल्यूएस मकानों में रहने वाले लोगों को भी 40 रुपये महीना यूजर चार्ज देना पड़ेगा। कार्यकारिणी समिति ने राजनगर, कविनगर जैसी पॉश कालोनियों में और नंदग्राम, शहीदनगर, कैला भट्टा जैसे स्लम एरिया दोनों में यूजर चार्ज की दरें समान रखी हैं।

5 करोड़ की कोठी में रहने वाले और 15-20 लाख के सामान्य मकानों में रहने वाले लोगों से बराबर यूजर चार्ज लिया जाएगा। नगर निगम ने यूजर चार्ज की सूची में कई संशोधन कर बोर्ड बैठक में पेश करने की सहमति दे दी है।

भवन                                                     यूजर चार्ज
पक्का घर                                                30 रुपये
ईडब्ल्यूएस                                              40 रुपये
एमआईजी 200 वर्ग मीटर वाले                     50 रुपये
एचआईजी 200 मीटर वाले                          70 रुपये
सब्जी-फल ठेले                                        200 रुपये
चलती-फिरती दुकान वाले                           650 रुपये
सड़क किनारे मांस-मछली की दुकानें               350 रुपये
मांस की दुकानें                                         650 रुपये
छोटे रेस्टोरेंट 200 वर्ग फीट तक                    1500 रुपये
मध्यम रेस्तरां 200 वर्ग फीट तक                 2500 रुपये
फास्ट फूड विक्रेता                                     1000 रुपये
होटल 1000 गज तक                                5000 रुपये
होटल 5000 गज तक                               10 हजार रुपये
5000 गज से ज्यादा बड़े होटल                   25 हजार रुपये
कार्यालय 50 कर्मचारी तक                        250 रुपये
51 से 100 कर्मचारी तक                          500 रुपये
101 से 300 कर्मचारी तक                        750 रुपये
100 बेड से ज्यादा बड़े अस्पताल                 50 हजार रुपये
5 हजार वर्ग मीटर से छोटे मॉल्स                10 से 25 हजार रुपये
5000 वर्ग मीटर से बड़े मॉल                     50 हजार रुपये
शराब की दुकान विद कैंटीन                       10 हजार रुपये
केवल शराब की दुकान                             05 हजार रुपये
पेट्रोल पंप/सीएनजी पंप                            2 हजार रुपये

हाउस टैक्स में अब साल भर नहीं मिलेगी छूट
- नगर निगम ने हाउस टैक्स के लिए बनाया स्लैब
- टैक्स भरने में देरी की तो घटती जाएगी छूट की रकम
- शहर के लोगों को एडवांस टैक्स भरने पर भी नहीं मिलेगा फायदा

अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। हाउस टैक्स भरने वालों को अब नगर निगम पूरे साल 20 फीसदी की छूट नहीं देगा। इस साल निगम ने इसके लिए स्लैब तैयार कर दिया है। बुधवार को कार्यकारिणी बैठक में इस छूट पॉलिसी को मंजूरी मिल गई है। नई पॉलिसी के मुताबिक अब 20 फीसदी की छूट सिर्फ अगस्त महीने तक मिलेगी। इसके बाद छूट का प्रतिशत घटता चला जाएगा।
नगर निगम की नई छूट पॉलिसी के मुताबिक एक अप्रैल से 31 अगस्त तक टैक्स जमा करने वालों को 20 फीसदी छूट मिलेगी। निगम ने इस अवधि में एक महीने की बढ़ोतरी की है। अगले साल से यह अवधि 31 जुलाई तक रहेगी। एक से 30 सितंबर के बीच टैक्स जमा करने पर 15 फीसदी छूट मिलेगी। इसके बाद 30 नवंबर तक 10 फीसदी और 31 जनवरी तक 5 फीसदी छूट मिलेगी। फरवरी और मार्च में हाउस टैक्स जमा करने वालों को नगर निगम छूट नहीं देगा। निगम के कई पार्षदों ने निगम की इस पॉलिसी का विरोध किया था। उन्होंने जनता से लिए जाने वाले इस एडवांस टैक्स पर पूरे साल 20 फीसदी छूट देने की मांग की थी। बावजूद निगम अफसरों और महापौर ने इसे कार्यकारिणी में प्रस्तुत कराया और यहां से इसे मंजूरी मिल गई है। उधर यहमाना यह जा रहा है कि बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर हंगामा होगा और पार्षद इसका विरोध करेंगे।

निगम नहीं बांटेगा बिल
नगर निगम अधिकारियों ने भवन मालिकों से अपील की है कि वह डिमांड बिल का इंतजार न करें और अपना हाउस टैक्स निगम के जोनल कार्यालय में या ऑनलाइन जमा कर दें। यहीं से उन्हें ड्यू टैक्स की रकम का पता चल पाएगा। नगर आयुक्त अब्दुल समद का कहना है कि उनके पास इतने कर्मचारी नहीं हैं कि वह पूरे शहर में टैक्स बिल बंटवा सकें।

स्पॉट फाइन पॉलिसी पास:
कूड़ा सड़क पर फेंका तो खिंच जाएगा फोटो
- डेयरियों पर भी कसेगा शिकंजा
गाजियाबाद। अब सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंका तो आपका फोटो खिंच सकता है। इस फोटो के आधार पर ही नगर निगम आपसे जुर्माना वसूलेगा। नगर निगम ने बुधवार को ‘स्पॉट फाइन पॉलिसी’ को मंजूरी दे दी है। इसके दायरे में कचरा फैलाकर गंदगी करने वाले दुकानदारों, ठेले-खोमचे वालों और गोबर सीवर व नालों में बहाने वाले डेयरी संचालकों को भी शामिल किया गया है। निगम मौके पर ही जुर्माने की वसूली करेगा।
नगर निगम एक ऐसा मोबाइल एप लांच करेगा जिस पर कोई भी व्यक्ति सड़क पर कूड़ा फेंकने, गंदगी करने वालों की फोटो खींचकर डिटेल के साथ भेज सकेगा। इसके बाद नगर निगम की स्थानीय टीम मौके पर पहुंचकर संबंधित मकान मालिक से जुर्माना वसूल करेगा। खासबात यह है कि  निगम को मिलने वाली जुर्माना राशि से 20 या 25 फीसदी रकम फोटो खींचकर भेजने वाले व्यक्ति को दिया जाएगा। निगम को उम्मीद है कि इससे शहर में हजारों ऐसे वॉलिंटियर मिल जाएंगे जो शहर को साफ रखने में निगम की मदद करेंगे। नगर निगम कार्यकारिणी समिति ने जुर्माने की रकम भी तय कर दी है।
..
    कार्य                                                                                 जुर्माना
आवासीय भवन मालिकों द्वारा सड़क पर कचरा फेंकना        100 रुपये
दुकानदार द्वारा कचरा फेंकना                                                 250 रुपये
रेस्तरां से कचरा फेंका जाने पर                                             400 रुपये
होटल मालिकों द्वारा कचरा फेंकने पर                                     500 रुपये
उद्योगों द्वारा कचरा फेंकने पर                                                 1000 रुपये
ठेला वालों के कूड़ा फेंकने पर                                             200 रुपये
डेयरियों से गोबर बहाने पर                                                 5000 रुपये
मकान-दुकान निर्माण का मलबा डालने पर                         5000 रुपये
परिवहन के दौरान मलबा आदि गिरने पर                         1000 रुपये
सरकारी दीवारों पर पेंटिंग, बैनर लगाने पर                         5000 रुपये
बिना अनुमति रोड कटिंग पर                                             5000 रुपये
विवाह स्थलों के बाहर कचरा डालने पर                         5000 रुपये
व्यवसायियों द्वारा ढका डस्टबिन न रखने पर                     1000 रुपये
सरकारी जमीन पर बिल्डिंग मेटीरियल डालकर बेचना         5000 रुपये
पालतू जानवरों को घुमाने के दौरान गंदगी करने पर             1000 रुपये

सड़क किनारे कामर्शियल वाहन खड़े करने पर फाइन
 नगर निगम ने अतिक्रमण पॉलिसी भी पास कर दी है। इसमें निगम ने एक से ज्यादा प्राइवेट कारों को साइड पटरी पर खड़ी करने की छूट दे दी है, लेकिन कामर्शियल वाहनों को अतिक्रमण के दायरे में रखा गया है। ऐसे वाहनों को सड़क किनारे खड़ा किया गया तो नगर निगम जुर्माना वसूलेगा। इससे पहले निगम ने एक से ज्यादा प्राइवेट वाहनों को भी इस दायरे में रखा था, लेकिन विरोध के चलते इसे अब पॉलिसी से बाहर कर दिया है।

निगम की पॉलिसी के मुताबिक अब फड़ लगाकर, दुकानों के बाहर सामान रखकर, खोखा-गुमटी लगाकर अतिक्रमण करने वालों से 10 से 20 रुपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा। निगम अधिकारियों के मुताबिक दो पहिया वाहनों पर 200 रुपये प्रतिदिन, तीन पहिया वाहनों पर 500 रुपये और चार पहिया वाहनों पर 1000 रुपये और चार पहिया वाहनों के अतिरिक्त 1500 रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगाया जाएगा।

अगले दिन दोबारा अतिक्रमण करने पर जुर्माने की रकम दोगुनी हो जाएगी। स्थायी अतिक्रमण के लिए पहले दिन 50 रुपये और दूसरे दिन 100 रुपये प्रति वर्ग फुट जुर्माना वसूला जाएगा। जुर्माना समय पर अदा न करने पर यह हाउस टैक्स में जोड़कर 12 फीसदी ब्याज भी वसूला जाएगा। ऐसे वाहन मालिकों से जिनके मकान नहीं है उनसे आरसी जारी कर जुर्माना वसूल किया जाएगा।

हज हाउस को निगम ने दी जमीन
नगर निगम ने हज हाउस को जमीन देने का प्रस्ताव भी पास कर दिया है। हज हाउस के लिए करीब तीन हेक्टेयर से ज्यादा जमीन देने पर कार्यकारिणी समिति सहमत हो गई है। इससे पहले निगम बोर्ड ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया था।

कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने पर सहमति
नगर निगम ने बोर्ड प्रस्ताव, संविदा, आउट सोर्सिंग, कांशीराम योजना के अंतर्गत नियुक्त किए गए कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव को  मंजूरी दे दी है। इनका वेतन 7500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार 300 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा।

कार्यकारिणी समिति से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब बोर्ड बैठक में और फिर शासन को भेजा जाएगा। बढ़े वेतन को नगर निगम द्वारा वहन करने की स्थिति में शासन से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। निगम के इस निर्णय से हजारों की संख्या में कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

अन्य खास फैसले
- इंदिरापुरम में बने 74 एमएलडी एसटीपी को सशर्त टेकओवर करने पर सहमति
- आउट सोर्सिंग पर तैनात होंगे तहसीलदार-नायब तहसीलदार
- निगम में बनेगी चौकी, दो दरोगा और 10 सिपाही होंगे तैनात
- स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करने के लिए प्राइवेट फर्म को हायर करने की सहमति
- संपत्तियों-सड़कों का सेटेलाइट सर्वे कराने का प्रस्ताव पास
- वार्डों में सड़क निर्माण, इंटरलाकिंग, नाली निर्माण के 180 कार्यों को मंजूरी मिली
- वार्ड-23 और कृष्णा विहार कुटी में बनेंगे सामुदायिक भवन
- बिजलीघरों को बंजर जमीन देने के प्रस्ताव पास
- प्राइवेट बिल्डरों से लैंड एक्सचेंज के प्रस्ताव खारिज किए
- सुदामापुरी में कब्रिस्तान को जमीन देगा निगम
- स्वीमिंग पूल-फैक्ट्री संचालकों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने होंगे
- हर वार्ड में लगेंगे 10 एलईडी लाइट्स, 3-3 झूला सेट और 15-15 बेंच

कूड़ा कलेक्शन के लिए तय किए यूजर चार्ज की दरों में संशोधन होगा। अभी बोर्ड बैठक में चर्चा के बाद इस पर जनता से आपत्तियां मांगी जाएंगी। इनके निस्तारण के बाद फिर सदन से मंजूरी लेकर फाइनल दरें लागू की जाएंगी। निगम की आमदनी बढ़ाने के लिए कुछ कड़े निर्णय लेने पड़ेंगे। तभी शहर आगे बढ़ सकेगा। - अशु वर्मा, महापौर
..
निगम का फोकस शहर में विकास कराने पर है। बीते साल बंपर काम कराए गए हैं। इसके लिए आमदनी बढ़ाना भी जरूरी है। आम सहमति से ही इनकम बढ़ाने के फैसले लिए गए हैं। जल्द ही नगर निगम हर वार्ड में करीब 1-1 करोड़ के विकास कार्य कराएगा। - अब्दुल समद, नगर आयुक्त

एमओयू न किया तो सिटी फॉरेस्ट को वापस लेगा निगम

नगर निगम ने सिटी फॉरेस्ट को लेकर एमओयू साइन करने के लिए जीडीए को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। एमओयू साइन न किया तो नगर निगम सिटी फॉरेस्ट को जीडीए से वापस ले लेगा।

निगम ने जीडीए की ओर से कार्यकारिणी बैठक में भेजे गए किसानों से लैंड एक्सचेंज का प्रस्ताव भी निरस्त कर दिया था। इस प्रस्ताव में सिटी फॉरेस्ट के बीच आ रही किसानों की जमीन को लेकर उन्हें किनारे पर जमीन देने की अनुमति मांगी गई थी।
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