{"_id":"693f0f6213c0ebd70503a342","slug":"ssj-agrotech-directors-booked-for-gst-evasion-and-fraud-ghaziabad-news-c-30-gbd1036-781789-2025-12-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: एसएसजे एग्रोटेक के निदेशकों पर जीएसटी चोरी और धोखाधड़ी की प्राथमिकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: एसएसजे एग्रोटेक के निदेशकों पर जीएसटी चोरी और धोखाधड़ी की प्राथमिकी
विज्ञापन
गाजियाबाद। मेरठ रोड स्थित आर्यनगर की मैसर्स त्रिवेणी ऑयल कंपनी के मालिक ने लखनऊ के गोमतीनगर की मैसर्स एसएसजे एग्रोटेक के निदेशक सुकांत, निकांत जैन व संजय पाल समेत चार के खिलाफ पर जीएसटी चोरी, धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि ऐसा करके फर्म निदेशकाें ने सरकार को भी राजस्व का नुकसान पहुंचाया।
डीसीपी नगर धवल जायसवाल ने बताया कि त्रिवेणी ऑयल कंपनी के मालिक ने शिकायत देकर बताया कि उनका लखनऊ की मैसर्स एसएसजे एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड फर्म के निदेशकों से सुपीरियर व्हाइट कैरोसिन अाॅयल सप्लाई देने के लिए समझौता हुआ था। कैरोसिन खरीदने के बाद 1.08 करोड़ के आठ बिल उनको दिए गए, इनकी एवज में 16.58 लाख रुपये जीएसटी भी अदा की गई, लेकिन फर्म निदेशकों ने इसको विभाग में जमा नहीं किया। कई बार उनसे इसके लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्हाेंने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई गई। बाद में उन्होंने संपर्क तोड़ दिया। जीएसटी से उनको इसका नोटिस मिला तो उनको इस धनराशि का भुगतान करना पड़ा। मूल धनराशि के साथ उनको जुर्माना राशि भी अदा करनी पड़ी। यह न केवल उनके साथ धोखाधड़ी की गई बल्कि सरकार को भी राजस्व का नुकसान पहुंचाने का उनके द्वारा प्रयास किया गया।
यह है नियम
टैक्स के वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर गर्ग ने बताया कि क्रेता ने यदि विक्रेता को बिल के अनुसार पूरा भुगतान किया है तो नियम के मुताबिक, इसमें विक्रेता को जीएसटी की धनराशि को जमा करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह टैक्स चोरी के साथ धोखाधड़ी का भी मामला है। इसमें थाने में प्राथमिकी के अलावा क्रेता सीधे तौर पर जीएसटी में शिकायत व ट्रिब्यूनल में भी अपना वाद दायर कर सकता है। साक्ष्यों के आधार पर विभागीय स्तर इसमें कठोर कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डीसीपी नगर धवल जायसवाल ने बताया कि त्रिवेणी ऑयल कंपनी के मालिक ने शिकायत देकर बताया कि उनका लखनऊ की मैसर्स एसएसजे एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड फर्म के निदेशकों से सुपीरियर व्हाइट कैरोसिन अाॅयल सप्लाई देने के लिए समझौता हुआ था। कैरोसिन खरीदने के बाद 1.08 करोड़ के आठ बिल उनको दिए गए, इनकी एवज में 16.58 लाख रुपये जीएसटी भी अदा की गई, लेकिन फर्म निदेशकों ने इसको विभाग में जमा नहीं किया। कई बार उनसे इसके लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्हाेंने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई गई। बाद में उन्होंने संपर्क तोड़ दिया। जीएसटी से उनको इसका नोटिस मिला तो उनको इस धनराशि का भुगतान करना पड़ा। मूल धनराशि के साथ उनको जुर्माना राशि भी अदा करनी पड़ी। यह न केवल उनके साथ धोखाधड़ी की गई बल्कि सरकार को भी राजस्व का नुकसान पहुंचाने का उनके द्वारा प्रयास किया गया।
विज्ञापन
यह है नियम
टैक्स के वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर गर्ग ने बताया कि क्रेता ने यदि विक्रेता को बिल के अनुसार पूरा भुगतान किया है तो नियम के मुताबिक, इसमें विक्रेता को जीएसटी की धनराशि को जमा करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह टैक्स चोरी के साथ धोखाधड़ी का भी मामला है। इसमें थाने में प्राथमिकी के अलावा क्रेता सीधे तौर पर जीएसटी में शिकायत व ट्रिब्यूनल में भी अपना वाद दायर कर सकता है। साक्ष्यों के आधार पर विभागीय स्तर इसमें कठोर कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है।
विज्ञापन