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नोटबंदी से सुस्त पड़ी विकास की रफ्तार
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Tue, 13 Dec 2016 12:33 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी का असर सिर्फ आम जनता, कारोबारी और नौकरीपेशा लोगों पर ही नहीं पड़ा है, शहर के विकास का पहिया भी इसकी वजह से धीमा हो गया है। नोटबंदी को एक महीने बाद भी नई करेंसी की किल्लत दूर न होने से नगर निगम, जीडीए, आवास विकास परिषद और पीडब्ल्यूडी के सड़क, सीवर, नाले निर्माण के कार्यों पर अब ब्रेक लगने लगा है।
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बैंकों से पैसा निकालने में हो रही परेशानी और पुराने नोटों के बंद होने से ठेकेदार अब मजदूरों को पैसा नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में मजदूरों ने भी काम छोड़ दिया है। हालात जल्द ही सामान्य नहीं हुए तो विकास कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे।नगर निगम ने अवस्थापना, 14वें वित्त और अन्य मदों से विकास कार्यों को शुरू कराया था।
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शहर भर में कांट्रेक्टर फर्मों ने इन कार्यों को शुरू कर दिया था लेकिन नोटबंदी की मार से यह सभी काम रुकने लगे हैं। संजय नगर के पी-ब्लॉक, राजनगर, वसुंधरा, शालीमार गार्डन, राजेंद्र नगर, ब्रिज विहार में सड़क निर्माण समेत कई स्थानों पर पब्लिक और सामुदायिक शौचालय का निर्माण का काम भी बीच में रुक गया है।
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ठेकेदारों की मानें तो लेबर को उन्हें कैश में दिहाड़ी का भुगतान करना पड़ता है। अधिकांश मजदूर दूसरे राज्यों के हैं, उनके न तो बैंक खाते हैं और न ही वह बैंक में पैसा डालने की स्थिति में है। दिन भर में मजदूरी करके जितना पैसा कमाते हैं, उसी से शाम को उनके घर का चूल्हा जलता है। कांट्रेक्टरों के पास जितना कैश था, वह खर्च कर चुके हैं।
अब बैंकों में कैश की कमी की वजह से उनका अपना पैसा भी नहीं मिल रहा। ऐसे में लेबर को पैसा देना मुश्किल हो रहा है। पैसा नहीं मिल रहा तो लेबर ने भी काम छोड़ दिया है। इसकी वजह से शहर में करीब 30 से 40 फीसदी विकास कार्य रुक गए हैं। जीडीए के भी निर्माण कार्य अब बंद होने लगे हैं।
जीडीए ने बीते दिनों कई निर्माण कार्यों और बिल्डिंग प्रोजेक्ट को शुरू कराया था।
नोटबंदी की वजह से लेबर को पैसा दे पाना मुश्किल हो रहा है। कैश की किल्लत लंबी चली तो स्थिति और खराब हो जाएगी। बैंकों से पैसा निकालने की लिमिट बढ़ाई जानी चाहिए ताकि लेबर को पैसा दिया जा सके। तभी विकास कार्य करा पाना संभव हो सकेगा।- अजय त्यागी, अध्यक्ष, नगर निगम कांट्रेक्टर संघ
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सीमेंट, ईंट, टाइल्स, रोड़ी समेत सभी रॉ मैटेरियल कैश भुगतान पर मिलता है। नोटबंदी की वजह के बाद नई करेंसी की किल्लत हो गई है। मजदूरों को पैसा नहीं मिल रहा तो उन्होंने भी काम छोड़ दिया। नोटबंदी का फैसला सही है, लेकिन इसके लागू करने के तरीके से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।- राजीव शर्मा, अध्यक्ष, गाजियाबाद बिल्डर वेलफेयर एसोसिएशन
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आवास विकास परिषद को नहीं मिल रहे ग्राहक
साहिबाबाद। आवास विकास परिषद की योजनाओं को भी नोटबंदी से जूझना पड़ रहा है। आलम यह है कि मंडोला विहार में पिछले सप्ताह लांच की गई प्लाटों की योजना को खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। योजना को लांच हुए पांच दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक एक भी आवेदन परिषद को नहीं मिला है।
आविप ने छह दिसंबर को मंडोला विहार में 80-200 वर्गमीटर के प्लाटों की योजना लांच की थी। रियल एस्टेट में मंदी के दौरान प्लाटों की योजना लांच करने के पीछे परिषद को उम्मीद थी की लोग प्लाट खरीदने में रुचि दिखाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कैश की किल्लत के कारण आवेदनकर्ता बैंकों तक ही नहीं पहुंच रहे हैं।
हालांकि आवास आयुक्त आरपी सिंह का कहना है कि योजना में आमतौर पर अंतिम दिनों में ही बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग जल्द ही योजना में रुचि दिखाते हुए आवेदन करेंगे।
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बिल्डरों के प्रोजेक्ट ठप
आवास विकास परिषद के साथ निजी बिल्डरों के प्रोजेक्ट का भी हाल बुरा है। आलम यह है कि बिल्डर कैश की कमी के चलते मजदूरों को दिहाड़ी नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते फिलहाल सभी प्रोजेक्ट में काम रुका हुआ है।
गाजियाबाद बिल्डर एसोसिएशन के महासचिव मनोज गोयल ने बताया कि मजदूरों को देने के लिए कैश ही नहीं, ऐसे में ज्यादातर प्रोजेक्ट का काम रुक गया है। कैश की कमी के चलते बुकिंग भी पूरी तरह बंद ही है, लेकिन उम्मीद है कि नए साल में मार्केट में तेजी आएगी।
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पे-आर्डर, ड्राफ्ट, एफडी पर ब्रेक
नोटबंदी के बाद बैंकों में केवल नगदी निकालने और जमा कराने का काम ही हो पा रहा है। पे-ऑर्डर, ड्राफ्ट व एफडी सहित बाकी जरूरी कामों पर ब्रेक लगा गया है। लोग चेकबुक के लिए भी मुश्किल से आवेदन कर पा रहे हैं। बैंकों का 80 फीसदी स्टाफ कैश ट्रांजेक्शन में व्यस्त होने से बाकी काम लगभग ठप पड़ गए हैं।
डासना-मुरादनगर लिंक रोड का काम रुका
गाजियाबाद। पीडब्ल्यूडी की ओर से डासना से मुरादनगर के बीच बनी रही लिंक रोड का निर्माण कार्य भी नोटबंदी के चलते रुक गया है। 11 किलोमीटर लंबी रोड के लिए शासन से 19 करोड़ रुपये के बजट पर मुहर लगी थी। पहली किस्त में विभाग को नौ करोड़ रुपए मिले, जिससे एक लेन की रोड का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
नवंबर के पहले सप्ताह में लिंक रोड के निर्माण के लिए 10 करोड़ की दूसरी किस्त मिलनी थी लेकिन नोटबंदी के चलते शासन ने बजट जारी नहीं किया। सड़क निर्माण में लगे मजदूरों व अन्य का भुगतान रुकने से रोड के निर्माण कार्य पर भी ब्रेक लग गया।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता पवन वर्मा ने बताया कि सड़क निर्माण की दूसरी किस्त मिलने के बाद फिर से काम शुरू कराया जाएगा।