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Ghaziabad News: दुष्कर्म के आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज
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गाजियाबाद। साहिबाबाद थाना क्षेत्र में किशोरी को बहला-फुसलाकर घर से ले जाकर निकाह करने के बाद दुष्कर्म करने के आरोपी हासिम की दूसरी जमानत अर्जी पॉक्सोकोर्ट ने खारिज कर दी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट लाल बाबू यादव ने मंगलवार को यह आदेश पारित किया।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने साहिबाबाद थाने में दो अप्रैल 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया था कि उनकी 16 वर्षीय किशोरी काे बहला-फुसला कर घर से भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी की ओर से दायर दूसरी जमानत अर्जी में दावा किया गया कि वह निर्दोष है। पूर्व में अदालत में उपस्थित न हो पाने का कारण दुर्घटना था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी ने बाद में विवाह कर लिया और जानबूझकर फरार नहीं था। वहीं, विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी लंबे समय तक न्यायालय से अनुपस्थित रहा, जिससे मुकदमे के निस्तारण में देरी हुई। अभियोजन ने यह भी कहा कि आरोपी की अनुपस्थिति के समर्थन में कोई चिकित्सीय प्रमाण नहीं है। अदालत ने पत्रावली और उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपी वर्ष 2017 से कई वर्षों तक न्यायालय में उपस्थित नहीं रहा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। मामले की गंभीरता और आरोपी के आचरण को देखते हुए अदालत ने जमानत देने के पर्याप्त आधार नहीं पाए और उसकी दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने साहिबाबाद थाने में दो अप्रैल 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया था कि उनकी 16 वर्षीय किशोरी काे बहला-फुसला कर घर से भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी की ओर से दायर दूसरी जमानत अर्जी में दावा किया गया कि वह निर्दोष है। पूर्व में अदालत में उपस्थित न हो पाने का कारण दुर्घटना था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी ने बाद में विवाह कर लिया और जानबूझकर फरार नहीं था। वहीं, विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी लंबे समय तक न्यायालय से अनुपस्थित रहा, जिससे मुकदमे के निस्तारण में देरी हुई। अभियोजन ने यह भी कहा कि आरोपी की अनुपस्थिति के समर्थन में कोई चिकित्सीय प्रमाण नहीं है। अदालत ने पत्रावली और उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपी वर्ष 2017 से कई वर्षों तक न्यायालय में उपस्थित नहीं रहा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। मामले की गंभीरता और आरोपी के आचरण को देखते हुए अदालत ने जमानत देने के पर्याप्त आधार नहीं पाए और उसकी दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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