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भरोसे पर डाका : बदमाशों को कोठी में घुसाने के बाद ही गया था नौकर चंदन
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राजू मलिक
गाजियाबाद। कारोबारी रामदास गुप्ता की कोठी में डाका मंगलवार की रात नौ बजे पड़ा लेकिन बदमाश इससे एक घंटा पहले ही आ गए थे। इसकी जानकारी सुरक्षा गार्ड विष्णु ने पुलिस को दी है। विष्णु ने बताया है कि वह रात आठ बजे चंदन के कमरे में गए थे। चंदन वहां नहीं था। उसी समय दो लोग वहां आए थे। चंदन ने ही उन्हें कोठी के अंदर घुसाया था।
विष्णु का कहना है कि उन्होंने उन दोनों से जैसे ही पूछताछ शुरू की, वैसे ही उन्होंने उन्हें पकड़ लिया और उनके हाथ उनके ही मफलर से बांध दिए। इसके बाद बदमाश वहां से चले गए। विष्णु ने पुलिस को बताया कि रात आठ बजे उन्होंने मेन गेट अंदर से बंद कर दिया।
इसके बाद कोठी में देख रहे थे कि कोठी में कौन-कौन नौकर रह गया है जिन्हें बाहर जाना है। चंदन को ढूंढा तो वह नहीं मिला। इस पर वह उसके कमरे में गए। इससे कुछ देर पहले तक चंदन वहीं पर था। इससे साफ है कि आठ बजे के आसपास ही वह बदमाशों को कोठी के अंदर घुसाकर अपने कमरे में छिपा गया और चुपचाप दीवार कूदकर चला गया। एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि जांच पड़ताल में सामने आया है कि नौकर चंदन ने ही बदमाशों को घर में घुसाया था।
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चंदन के न घर का पता
और न ही परिवार का
जिस चंदन पर वारदात कराने का शक है, उसके न घर का पता चला है और न ही परिवार का। उसने कभी अपने घर और परिवार के बारे में कुछ बताया ही नहीं। रामदास गुप्ता ने बताया कि चंदन दो साल में पहले पास काम मांगने के लिए आया था। उन्होंने घर के कामकाज के लिए रख लिया। दो साल में कभी एक तो कभी दो महीनों के लिए गायब रहा। दोनों बार कहा कि घर गया था। उससे जब भी घर और परिवार के बारे में पूछा, उसने कुछ बताया ही नहीं। रामदास गुप्ता के बेटे सौरव गुप्ता का कहना है कि वे लोग 40 साल से कविनगर में रह रहे हैं। इससे पहले गौतमबुद्धनगर के रबुपुरा में रहते थे। यह पहला मौका है जब उनके परिवार के साथ कोई वारदात हुई है। यह वारदात घर के भेदी नौकर चंदन ने कराई है।
सीसीटीवी कैमरे बंद
नहीं मिल सका सुराग
कोठी में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं लेकिन, ये बंद थे। पुलिस को कोई फुटेज नहीं मिल सकी। अगर कैमरे चल रहे होते तो बदमाशों के बारे में काफी जानकारी मिल सकती थी। पुलिस अब घटना के दौरान कविनगर के ए ब्लाक में सक्रिय रहे मोबाइल नंबर का पता लगा रही है। इनकी डिटेल निकलवाई जाएगी। बदमाशों ने चंदन को काॅल की थी। उम्मीद है कि चंदन और उससे बात करने वाले बदमाश के बारे में कुछ पता चल सकेगा।
हम लुटेरे हैं...हमें पैसा चाहिए
कारोबारी रामदास गुप्ता ने बताया कि बदमाशों ने आते ही चंदन का नाम लिया। वे उनके नजदीक आ गए। उन्होंने उनसे पूछा कि वे कौन हैं और क्या चाहते हैं। इस पर एक बदमाश बोला, हम लुटेरे हैं, हमें पैसा चाहिए। इतना कहते ही बदमाश ने उनका गला पकड़ लिया। दूसरे बदमाश ने पत्नी का गला पकड़ लिया। दोनों बदमाशों ने चाकू निकाल लिए। इसके बाद बदमाश उन्हें पकड़कर कमरे में ले गए। वहां अलमारी खुलवाकर कैश निकलवाया। कैश लेकर पुरानी अलमारी की चाबी ले ली। चाबी से अलमारी खोलकर गहने निकाले।
बेटा और पोती गए थे गोवा
रामदास गुप्ता ने बताया कि उनके बड़े बेटे गौरव गुप्ता की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी अमेरिका और छोटी अजमेर में पढ़ाई कर रही हैं। नववर्ष मनाने के लिए वह घर पर आई हुईं थीं। चार जनवरी को गौरव अपनी दोनों बेटियों के साथ गोवा घूमने गए थे। छोटे बेटे सौरव गुप्ता दिल्ली में रहते हैं। नौकर चंदन को पता था कि घर में केवल वृद्ध दंपती हैं। ऐसे में उसने अपने साथियों के साथ डकैती की घटना को अंजाम दिया है।
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गाजियाबाद। कारोबारी रामदास गुप्ता की कोठी में डाका मंगलवार की रात नौ बजे पड़ा लेकिन बदमाश इससे एक घंटा पहले ही आ गए थे। इसकी जानकारी सुरक्षा गार्ड विष्णु ने पुलिस को दी है। विष्णु ने बताया है कि वह रात आठ बजे चंदन के कमरे में गए थे। चंदन वहां नहीं था। उसी समय दो लोग वहां आए थे। चंदन ने ही उन्हें कोठी के अंदर घुसाया था।
विष्णु का कहना है कि उन्होंने उन दोनों से जैसे ही पूछताछ शुरू की, वैसे ही उन्होंने उन्हें पकड़ लिया और उनके हाथ उनके ही मफलर से बांध दिए। इसके बाद बदमाश वहां से चले गए। विष्णु ने पुलिस को बताया कि रात आठ बजे उन्होंने मेन गेट अंदर से बंद कर दिया।
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इसके बाद कोठी में देख रहे थे कि कोठी में कौन-कौन नौकर रह गया है जिन्हें बाहर जाना है। चंदन को ढूंढा तो वह नहीं मिला। इस पर वह उसके कमरे में गए। इससे कुछ देर पहले तक चंदन वहीं पर था। इससे साफ है कि आठ बजे के आसपास ही वह बदमाशों को कोठी के अंदर घुसाकर अपने कमरे में छिपा गया और चुपचाप दीवार कूदकर चला गया। एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि जांच पड़ताल में सामने आया है कि नौकर चंदन ने ही बदमाशों को घर में घुसाया था।
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चंदन के न घर का पता
और न ही परिवार का
जिस चंदन पर वारदात कराने का शक है, उसके न घर का पता चला है और न ही परिवार का। उसने कभी अपने घर और परिवार के बारे में कुछ बताया ही नहीं। रामदास गुप्ता ने बताया कि चंदन दो साल में पहले पास काम मांगने के लिए आया था। उन्होंने घर के कामकाज के लिए रख लिया। दो साल में कभी एक तो कभी दो महीनों के लिए गायब रहा। दोनों बार कहा कि घर गया था। उससे जब भी घर और परिवार के बारे में पूछा, उसने कुछ बताया ही नहीं। रामदास गुप्ता के बेटे सौरव गुप्ता का कहना है कि वे लोग 40 साल से कविनगर में रह रहे हैं। इससे पहले गौतमबुद्धनगर के रबुपुरा में रहते थे। यह पहला मौका है जब उनके परिवार के साथ कोई वारदात हुई है। यह वारदात घर के भेदी नौकर चंदन ने कराई है।
सीसीटीवी कैमरे बंद
नहीं मिल सका सुराग
कोठी में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं लेकिन, ये बंद थे। पुलिस को कोई फुटेज नहीं मिल सकी। अगर कैमरे चल रहे होते तो बदमाशों के बारे में काफी जानकारी मिल सकती थी। पुलिस अब घटना के दौरान कविनगर के ए ब्लाक में सक्रिय रहे मोबाइल नंबर का पता लगा रही है। इनकी डिटेल निकलवाई जाएगी। बदमाशों ने चंदन को काॅल की थी। उम्मीद है कि चंदन और उससे बात करने वाले बदमाश के बारे में कुछ पता चल सकेगा।
हम लुटेरे हैं...हमें पैसा चाहिए
कारोबारी रामदास गुप्ता ने बताया कि बदमाशों ने आते ही चंदन का नाम लिया। वे उनके नजदीक आ गए। उन्होंने उनसे पूछा कि वे कौन हैं और क्या चाहते हैं। इस पर एक बदमाश बोला, हम लुटेरे हैं, हमें पैसा चाहिए। इतना कहते ही बदमाश ने उनका गला पकड़ लिया। दूसरे बदमाश ने पत्नी का गला पकड़ लिया। दोनों बदमाशों ने चाकू निकाल लिए। इसके बाद बदमाश उन्हें पकड़कर कमरे में ले गए। वहां अलमारी खुलवाकर कैश निकलवाया। कैश लेकर पुरानी अलमारी की चाबी ले ली। चाबी से अलमारी खोलकर गहने निकाले।
बेटा और पोती गए थे गोवा
रामदास गुप्ता ने बताया कि उनके बड़े बेटे गौरव गुप्ता की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी अमेरिका और छोटी अजमेर में पढ़ाई कर रही हैं। नववर्ष मनाने के लिए वह घर पर आई हुईं थीं। चार जनवरी को गौरव अपनी दोनों बेटियों के साथ गोवा घूमने गए थे। छोटे बेटे सौरव गुप्ता दिल्ली में रहते हैं। नौकर चंदन को पता था कि घर में केवल वृद्ध दंपती हैं। ऐसे में उसने अपने साथियों के साथ डकैती की घटना को अंजाम दिया है।