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Ghaziabad News: नमी, प्रदूषण व फंगस से संक्रमण के साथ बढ़ रही सांस की तकलीफ

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 01:53 AM IST
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Respiratory distress is increasing due to humidity, pollution and fungal infection
गाजियाबाद। बरसात के बाद नमी, प्रदूषण और फंगस से बुखार व संक्रमण के साथ सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि यह समस्या अधिकतर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण हो रही है, न कि दमा के रोगियों में दिखाई देने वाले अस्थमा अटैक की तरह है। डॉक्टर का कहना है कि मरीजों में अचानक सांस फूलना, तेज बुखार, गले में खराश, खांसी और शरीर में दर्द के लक्षण देखे जा रहे हैं। एमएमजी अस्पताल में रोजाना 150 से 200 मरीज बुखार का इलाज कराने आ रहे हैं, इनमें 70 फीसदी मरीजों को सांस में परेशानी हो रही है। जबकि एक सप्ताह में ऐसे 14 मरीज भर्ती हुए हैं, जो समय पर इलाज कराने से स्वस्थ हो गए। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम बदलने के इस दौर में सतर्क रहकर और शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेकर, बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
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कोरोना वाले लक्षण, लेकिन जांच में सामान्य वायरल : आईएमए के पूर्व प्रदेश सचिव व वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीबी जिंदल का कहना है कि ऐसे मरीजों की जांच के बाद पता चलता है कि उनके फेफड़ों में सूजन या संक्रमण की वजह से ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो रहा है। कई मामलों में यह लक्षण कोरोना जैसी गंभीर बीमारियों से मेल खा सकते हैं, लेकिन जांच में यह सामान्य मौसमी संक्रमण ही पाया गया है। इलाज के दौरान मरीजों को आठ से दस दिन तक दवाएं लेनी पड़ रही हैं। अधिकांश मामलों में जल्दी उपचार शुरू होने पर तेजी से सुधार हो रहा है।
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दमा और संक्रमण में सांस की तकलीफ में अंतर : वहीं एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार ने स्पष्ट किया कि दमा और संक्रमण से होने वाली सांस की तकलीफ में अंतर है। दमा एक पुरानी बीमारी है, जो मौसम में बदलाव, धूल, धुएं या एलर्जी के कारण बढ़ती है। जबकि इस समय जो मरीज अस्पताल आ रहे हैं, उनकी तकलीफ अस्थायी संक्रमण की वजह से है। इसमें फेफड़ों के अंदर बलगम जमना, वायुमार्ग में सूजन और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना अहम कारण हैं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि मरीज खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें, ताकि सही कारण और इलाज का निर्धारण हो सके। सांस की समस्या को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों के लिए।
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इस तरह से करें संक्रमण व बुखार से बचाव : साफ-सफाई का ध्यान रखना, पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक आहार लेना और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना जरूरी है। साथ ही तेज बुखार, लगातार खांसी या अचानक सांस फूलने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
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