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Ghaziabad News: हापुड़ के 50 हजार किसानों को राहत, शीतगृह शुल्क में 20 करोड़ रुपये सब्सिडी की तैयारी
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जतिन त्यागी
हापुड़। आलू के दामों में लगातार गिरावट से आर्थिक तंगी में फंसे हापुड़ के 50 हजार किसानों को शीतगृह शुल्क में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक राहत दिलाने की तैयारी है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल खोला गया है, जिस पर किसान आवेदन कर सकते हैं। बाजार में भाव की स्थिरता को बनाए रखने के लिए भी प्लान तैयार हो रहा है, यह रिपोर्ट शासन में जल्द प्रेषित होगी।
जिले में इस वर्ष रिकॉर्ड आलू उत्पादन हुआ है, 19 शीतगृहों में करीब 2.10 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित किए गए। बाजार में बाहर का आलू नहीं है, फिर भी खरीदार नहीं मिल रहे। आलू के कारोबारी ब्रिजेश त्यागी के अनुसार इस समय चिप्सौना आलू महज 300 से 350 रुपये प्रति कट्टा तक ही बिक रहा है। जबकि 285 रुपये प्रति क्विंटल आलू का भंडारण शुल्क है।
ऐसे में किसानों की जान अटकी हुई है, क्योंकि फसल से लाभ तो दूर लागत भी नहीं निकल पा रही। बाजार में मंदी के चलते शीतगृहों में अभी भी 70 फीसदी से अधिक आलू भंडारित है। हापुड़ के करीब 50 हजार किसान इस फसल से जुड़े हैं।
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अब किसानों को राहत दिलाने के लिए पोर्टल लॉंच किया गया है। इस पर आवेदन करने पर किसान भंडारण शुल्क में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक छूट के पात्र हो जाएंगे। विभाग की मानें तो यदि सभी किसान इस योजना का लाभ उठाएं तो भंडारण शुल्क में किसानों को करीब 20 करोड़ रुपये तक की राहत मिल सकती है।
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-बाजार में भाव स्थिरता को लेकर तैयारी-
बाजार में आलू के भाव स्थिर नहीं हैं, क्योंकि इस फसल का एमएसपी भी घोषित नहीं होता। यही कारण है कि हर साल किसानों को घाटा झेलना पड़ रहा है। अब बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें हर जिले से रिपोर्ट मांगी गई है।
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-इस वर्ष आलू के बीज पर भी मिलेगी छूट-
बाजार में आलू के दामों में बड़ी गिरावट से किसान बेहाल हैं। अब आलू बुवाई का समय भी नजदीक है, ऐेसे में किसानों पर ज्यादा प्रभाव न पड़े, इसके लिए उद्यान विभाग से मिलने वाले आलू के बीज पर विशेष छूट की व्यवस्था की जाएगी।
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-आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी-
*सिर्फ ऑनलाइन आवेदन स्वीकार होगा।
*फोटोयुक्त वैध पहचान पत्र।
*आधार कार्ड, बैंक पासबुक/चेक बुक की छायाप्रति।
*रोपित आलू क्षेत्रफल का खसरा खतौनी।
*व्यापारी और आलू किसान के मध्य क्रय विक्रय का विवरण अपलोड करना अनिवार्य।
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-आवेदन की प्रक्रिया है विस्तृत-
आलू के भंडारण शुल्क में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक राहत दिलाने की योजना ठीक है। लेकिन यह प्रक्रिया बेहद विस्तृत है। शीतगृहों पर ही सीधे आवेदन कराने और राहत दिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए।-- राधेलाल त्यागी, किसान अच्छेजा।-- फोटो संख्या-- 22
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शीतगृहों में बढ़ाकर लिया जा रहा शुल्क
बाजार में आलू के दाम बेहद कम हैं, लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ शीतगृह 300 रुपये प्रति क्विंटल तक भंडारण शुल्क ले रहे हैं। विभाग द्वारा घोषित 100 रुपये की छूट काफी हद तक राहत दिलाएगी।-- -जतिन चौधरी, किसान रसूलपुरा।
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-किसान जल्द करें आवेदन-
आलू उत्पादक किसानों को राहत दिलाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। पोर्टल पर आवेदन कर किसान राहत पा सकते हैं। शीतगृह अधिक शुल्क नहीं वसूल सकेंगे, इस संबंध में चेतावनी दी गई है।-- डॉ.हरित, जिला उद्यान अधिकारी।
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हापुड़। आलू के दामों में लगातार गिरावट से आर्थिक तंगी में फंसे हापुड़ के 50 हजार किसानों को शीतगृह शुल्क में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक राहत दिलाने की तैयारी है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल खोला गया है, जिस पर किसान आवेदन कर सकते हैं। बाजार में भाव की स्थिरता को बनाए रखने के लिए भी प्लान तैयार हो रहा है, यह रिपोर्ट शासन में जल्द प्रेषित होगी।
जिले में इस वर्ष रिकॉर्ड आलू उत्पादन हुआ है, 19 शीतगृहों में करीब 2.10 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित किए गए। बाजार में बाहर का आलू नहीं है, फिर भी खरीदार नहीं मिल रहे। आलू के कारोबारी ब्रिजेश त्यागी के अनुसार इस समय चिप्सौना आलू महज 300 से 350 रुपये प्रति कट्टा तक ही बिक रहा है। जबकि 285 रुपये प्रति क्विंटल आलू का भंडारण शुल्क है।
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ऐसे में किसानों की जान अटकी हुई है, क्योंकि फसल से लाभ तो दूर लागत भी नहीं निकल पा रही। बाजार में मंदी के चलते शीतगृहों में अभी भी 70 फीसदी से अधिक आलू भंडारित है। हापुड़ के करीब 50 हजार किसान इस फसल से जुड़े हैं।
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अब किसानों को राहत दिलाने के लिए पोर्टल लॉंच किया गया है। इस पर आवेदन करने पर किसान भंडारण शुल्क में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक छूट के पात्र हो जाएंगे। विभाग की मानें तो यदि सभी किसान इस योजना का लाभ उठाएं तो भंडारण शुल्क में किसानों को करीब 20 करोड़ रुपये तक की राहत मिल सकती है।
-बाजार में भाव स्थिरता को लेकर तैयारी-
बाजार में आलू के भाव स्थिर नहीं हैं, क्योंकि इस फसल का एमएसपी भी घोषित नहीं होता। यही कारण है कि हर साल किसानों को घाटा झेलना पड़ रहा है। अब बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें हर जिले से रिपोर्ट मांगी गई है।
-इस वर्ष आलू के बीज पर भी मिलेगी छूट-
बाजार में आलू के दामों में बड़ी गिरावट से किसान बेहाल हैं। अब आलू बुवाई का समय भी नजदीक है, ऐेसे में किसानों पर ज्यादा प्रभाव न पड़े, इसके लिए उद्यान विभाग से मिलने वाले आलू के बीज पर विशेष छूट की व्यवस्था की जाएगी।
-आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी-
*सिर्फ ऑनलाइन आवेदन स्वीकार होगा।
*फोटोयुक्त वैध पहचान पत्र।
*आधार कार्ड, बैंक पासबुक/चेक बुक की छायाप्रति।
*रोपित आलू क्षेत्रफल का खसरा खतौनी।
*व्यापारी और आलू किसान के मध्य क्रय विक्रय का विवरण अपलोड करना अनिवार्य।
-आवेदन की प्रक्रिया है विस्तृत-
आलू के भंडारण शुल्क में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक राहत दिलाने की योजना ठीक है। लेकिन यह प्रक्रिया बेहद विस्तृत है। शीतगृहों पर ही सीधे आवेदन कराने और राहत दिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
शीतगृहों में बढ़ाकर लिया जा रहा शुल्क
बाजार में आलू के दाम बेहद कम हैं, लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ शीतगृह 300 रुपये प्रति क्विंटल तक भंडारण शुल्क ले रहे हैं। विभाग द्वारा घोषित 100 रुपये की छूट काफी हद तक राहत दिलाएगी।
-किसान जल्द करें आवेदन-
आलू उत्पादक किसानों को राहत दिलाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। पोर्टल पर आवेदन कर किसान राहत पा सकते हैं। शीतगृह अधिक शुल्क नहीं वसूल सकेंगे, इस संबंध में चेतावनी दी गई है।