अवैध ब्रेकर से गई राहुल की जान: परिजनों ने पूछा किसने बनवाया और क्यों हटाया? आईजीआरएस से भी नहीं मिला जवाब
शालीमार गार्डन थानाक्षेत्र के राजेंद्र नगर सेक्टर दो में सात जून की रात को हुए सड़क हादसे में 34 वर्षीय राहुल कुमार की जान चली गई थी। यह हादसा कॉलोनी में अवैध रूप से बनाए गए एक ब्रेकर के कारण हुआ। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इस बात का खुलासा हुआ। घटना के बाद राहुल कुमार के परिजनों ने पुलिस और नगर निगम से शिकायत की। परिजनों ने मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर भी की।
विस्तार
साहिबाबाद के कॉलोनी में अवैध तौर पर बनाए गए ब्रेकर से 7 जून भोपुरा निवासी राहुल कुमार (34) की मौत हो गई थी। हादसे के एक दिन बाद पुलिस जांच में इसका खुलासा हुआ था। इसके बाद परिजनों ने मामले की शिकायत पुलिस और नगर निगम से भी की। परिजनों ने कॉलोनी में बिना मानकों के बनाए गए ब्रेकर पर भी सवाल उठाए थे लेकिन आज तक उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
बाद में परिजनों ने मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर की तो वहां जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला है। आईजीआरएस पर किए गए सवालों के जवाब की जगह निगम अधिकारियों ने बताया कि यह जानकारी आईजीआरएस के माध्यम से देना उपयुक्त नहीं है। निगम अधिकारियों के इस जवाब से परिजनों में व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई है। शालीमार गार्डन थानाक्षेत्र के राजेंद्र नगर सेक्टर दो स्थित आरएम ब्लॉक सोसायटी के सामने सात जून की देर रात हुए हादसे में घायल टीलामोड़ के भोपुरा निवासी राहुल कुमार (34) की मौत हो गई थी।
वहीं, ब्रेकर की बात तब सामने आई जब पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली। युवक के परिजनों का आरोप है कि ब्रेकर सोसायटी आरडब्ल्यूए ने बनवाया था। मृतक के साले सुमित कुमार का कहना है कि मामले में वह लोग केवल इतना जानना चाहते थे कि यह ब्रेकर किसके कहने पर किसने बनवाया और क्या यह मानकों के मुताबिक बनाया गया था। उन्होंने बताया कि पहले पुलिस और निगम अधिकारी से मौखिक शिकायत करने के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने 10 जुलाई को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में उन्होंने केवल यही सूचना उपलब्ध कराने की मांग की थी कि किसने ब्रेकर बनवाया और हादसे के अगले ही दिन यह ब्रेकर क्यों हटा दिया गया। ब्रेकर बना भी तो यहां कोई शाइनबोर्ड क्यों नहीं लगाया गया था। सुमित का कहना है कि उनके सवालों के जवाब में पोर्टल पर निगम की तरफ से जवाब मिला कि इन सवालों के जवाब यहां नहीं दिए जा सकते। सुमित का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई सवाल नहीं किया था जिसका जवाब देने पर राष्ट्र की सुरक्षा का कोई अहित होता या फिर कोई बड़ी परेशानी खड़ी की जाती। उनका कहना है कि यदि जवाब नहीं देना है तो इस तरह के पोर्टल का क्या औचित्य रह जाता है।
नगर आयुक्त से भी नहीं मिलने दिया गया
मृतक के साले सुमित कुमार का आरोप है कि इस संबंध में वह दो से तीन बार नगर आयुक्त से भी शिकायत करने निगम मुख्यालय पहुंचे लेकिन वहां किसी ने उन्हें मिलने नहीं दिया गया। कभी नगर आयुक्त के मीटिंग में होने तो कभी निरीक्षण पर होने की बात बता कर टहला दिया गया।