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Ghaziabad News: गाजियाबाद का नाम बदलने का प्रस्ताव पास
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गाजियाबाद। नगर निगम की बोर्ड बैठक में मंगलवार को गाजियाबाद जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। 100 पार्षदों में से बैठक में मौजूद 89 में 87 ने इसका समर्थन किया। पांच मिनट की चर्चा के बाद ही महापौर सुनीता दयाल ने जैसे ही कहा, नाम बदले जाने का प्रस्ताव मंजूर किया जाता है, वैसे ही सदन में भारत माता के जयकारे गूंजने लगे।
बोर्ड बैठक के लिए यह प्रस्ताव वार्ड 100 (इंदिरापुरम क्षेत्र) से भाजपा के पार्षद संजय सिंह ने रखा था। उन्होंने दो नाम सुझाए थे, गजनगर या हरनंदीनगर। पार्षदों ने कहा कि यह प्रस्ताव महापौर सुनीता दयाल स्वयं पेश करें।
इस पर प्रस्ताव रखते हुए महापौर ने कहा, गाजियाबाद का नाम बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही है। यह ऐतिहासिक काम अब पूरा होने जा रहा है। इस प्रस्ताव को जल्द ही शासन के पास भेज दिया जाएगा। उनके यह कहते ही पार्षद मेज थपथपाने लगे। पार्षद खड़े हो गए और भारत माता के जयकारे लगाने लगे।
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गाजियाबाद का नाम बदलने का निर्णय शासन के स्तर से होगा। नया नाम क्या होगा, यह भी शासन ही तय करेगा। - सुनीता दयाल, महापौर।
नाम बदलने से हालात बदलेंगे क्या
(विरोध में भी उठे सुर)
गाजियाबाद का नाम बदलने के प्रस्ताव पर सिर्फ चार पार्षदों ने समर्थन नहीं किया। इनमें से दो महिला पार्षद खामोश रहीं जबकि दो पार्षदों ने विरोध दर्ज कराते हुए सवाल उठाए। वार्ड 90 के सपा पार्षद आदिल मलिक ने कहा कि गाजियाबाद का नाम बदलने से हालात बदल जाएंगे क्या? जब हालात नहीं बदलेंगे तो नाम बदलने का कोई औचित्य नहीं। इसे नहीं बदला जाना चाहिए। वार्ड 67 से कांग्रेस के पार्षद अजय शर्मा ने कहा कि गाजियाबाद का नाम बदलने पर भारी खर्च आएगा। जब इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया तो 350 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। सभी संकेतक, दफ्तरों के बोर्ड और दस्तावेज में नाम बदला जाता है। गाजियाबाद का नाम बदलने पर इतना बजट कहां से आएगा?
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बोर्ड बैठक के लिए यह प्रस्ताव वार्ड 100 (इंदिरापुरम क्षेत्र) से भाजपा के पार्षद संजय सिंह ने रखा था। उन्होंने दो नाम सुझाए थे, गजनगर या हरनंदीनगर। पार्षदों ने कहा कि यह प्रस्ताव महापौर सुनीता दयाल स्वयं पेश करें।
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इस पर प्रस्ताव रखते हुए महापौर ने कहा, गाजियाबाद का नाम बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही है। यह ऐतिहासिक काम अब पूरा होने जा रहा है। इस प्रस्ताव को जल्द ही शासन के पास भेज दिया जाएगा। उनके यह कहते ही पार्षद मेज थपथपाने लगे। पार्षद खड़े हो गए और भारत माता के जयकारे लगाने लगे।
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गाजियाबाद का नाम बदलने का निर्णय शासन के स्तर से होगा। नया नाम क्या होगा, यह भी शासन ही तय करेगा। - सुनीता दयाल, महापौर।
नाम बदलने से हालात बदलेंगे क्या
(विरोध में भी उठे सुर)
गाजियाबाद का नाम बदलने के प्रस्ताव पर सिर्फ चार पार्षदों ने समर्थन नहीं किया। इनमें से दो महिला पार्षद खामोश रहीं जबकि दो पार्षदों ने विरोध दर्ज कराते हुए सवाल उठाए। वार्ड 90 के सपा पार्षद आदिल मलिक ने कहा कि गाजियाबाद का नाम बदलने से हालात बदल जाएंगे क्या? जब हालात नहीं बदलेंगे तो नाम बदलने का कोई औचित्य नहीं। इसे नहीं बदला जाना चाहिए। वार्ड 67 से कांग्रेस के पार्षद अजय शर्मा ने कहा कि गाजियाबाद का नाम बदलने पर भारी खर्च आएगा। जब इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया तो 350 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। सभी संकेतक, दफ्तरों के बोर्ड और दस्तावेज में नाम बदला जाता है। गाजियाबाद का नाम बदलने पर इतना बजट कहां से आएगा?