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Ghaziabad News: सोसायटियों में गीला-सूखे कचरे का प्रस्ताव पड़ा ठंडा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:34 AM IST
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Proposal for wet and dry waste segregation in housing societies put on the back burner.
गाजियाबाद। शहर की हाउसिंग सोसायटियों में गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग करने का प्रस्ताव ठंडा पड़ा है। कई बार गीला-सूखा कचरा अलग न करने पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई, लेकिन आज तक योजना परवान नहीं चढ़ सकी। इसके साथ ही सोसायटियों में जीरो वेस्ट कंपोस्ट प्लांट का नियम भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। फेडरेशन इसके पीछे नगर निगम की गलत नीति और अव्यवस्थित व्यवस्था को जिम्मेदार बता रहा है।
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नियमानुसार हर सोसायटी में जीरो वेस्ट प्रबंधन अनिवार्य है, यानी कचरे का निस्तारण सोसायटी परिसर में प्लांट लगाकर खुद करना होता है। जहां यह व्यवस्था लागू नहीं है, वहां गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर नगर निगम को देना अनिवार्य है। इसके लिए लोगों को हाउस टैक्स में 10 प्रतिशत की छूट भी दी गई है, लेकिन जागरूकता और जानकारी के अभाव में यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
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फ्लैट ऑनर्स फेडरेशन के मुख्य संरक्षक कर्नल टीपीएस त्यागी (सेवानिवृत्त) का कहना है कि किसी भी योजना को लागू करने से पहले धरातल पर तैयारी जरूरी है। निगम की जो गाड़ी कूड़ा उठाने आती है, वह इतनी छोटी है और उसमें जगह इतनी कम है कि पूरा कचरा ही मुश्किल से आ पाता है। ऐसे में गीला-सूखा अलग से कैसे उठेगा। लोगों को जागरूक किया जाए और ऐसी व्यवस्था हो कि सोसायटी के बाहर ही दोनों प्रकार का कचरा अलग-अलग रखा जाए और गाड़ी उठा ले। बिना तैयारी के योजना का कोई लाभ नहीं। जीरो वेस्ट की योजना भी निगम की लापरवाही और बिल्डरों की मनमानी से अधूरी है।
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आरडब्ल्यूए फेडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबव्रत चौधरी का कहना है कि पहले लोगों को गीले-सूखे कचरे के लिए जागरूक और प्रशिक्षित करना होगा, तभी योजना सफल होगी। कूड़े की गाड़ी कचरा उठाने के लिए ठीक से रुकती ही नहीं है। राजनगर एक्सटेंशन फेडरेशन के अध्यक्ष सचिन त्यागी का कहना है कि सोसायटियों को जागरूक करने की जरूरत है।



क्या है प्रस्ताव
हाउसिंग सोसायटियों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने का प्रस्ताव पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकना और सोसायटियों को स्वच्छ बनाना है। गीले कचरे से सोसायटी के अंदर ही जैविक खाद तैयार की जा सकती है।

वर्गीकरण
हरा डस्टबिन (गीला कचरा): रसोई का कचरा, सब्जियों-फलों के छिलके, बचा खाना, चाय पत्ती, सूखी पत्तियां, अंडे के छिलके।

नीला डस्टबिन (सूखा कचरा): प्लास्टिक बोतलें, कागज, अखबार, गत्ते, कांच, धातु, कपड़े।

लाल बैग (हानिकारक कचरा): सेनेटरी पैड, डायपर, दवाइयां, सीएफएल बल्ब, बैटरियां।
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