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Ghaziabad News: भीषण गर्मी में गर्भवती महिलाओं की बढ़ी परेशानी, बचाव जरूरी
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गाजियाबाद। बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है और इसका अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। पांच दिनों से अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम 26 से 28 डिग्री बना हुआ है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का जोखिम बढ़ा सकती है। हाल ही में प्रकाशित एक चिकित्सा शोध के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने से गर्भवती महिलाओं में डिहाइड्रेशन, उच्च रक्तचाप की परेशानी बढ़ी है।
आईएमए गाजियाबाद की अध्यक्ष व महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अल्पना कंसल का कहना है कि गर्मी से होने वाली परेशानियों के कई कारण सामने आ रहे हैं। शरीर में पानी की कमी, अत्यधिक पसीना आना, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, लंबे समय तक धूप में रहना और पोषण की कमी शामिल हैं। ये सभी परेशानी गर्भवती महिलाओं की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। हालांकि पर्याप्त मात्रा में जल और नारियल पानी का सेवन, दोपहर में बाहर निकलने से बचना, ताजे फल- हल्का भोजन लेना, नियमित आराम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने भी गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है, ताकि गर्मी में उनका और शिशु का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
धूप में निकलने से बचें
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि गर्मी अधिक है और शरीर का तापमान संतुलित रखना भी जरूरी है। गर्भवती महिलाओं में पानी की कमी तेजी से होती है, जिससे चक्कर आना, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इनसे बचना चाहिए। वहीं, महिला रोग विशेषज्ञ व पूर्व सीएमएस डॉ. श्रद्धा यादव ने बताया कि गर्मी का असर केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। गर्मी से असहजता के कारण गर्भवती महिलाओं में तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है, जो गर्भस्थ शिशु के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
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आईएमए गाजियाबाद की अध्यक्ष व महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अल्पना कंसल का कहना है कि गर्मी से होने वाली परेशानियों के कई कारण सामने आ रहे हैं। शरीर में पानी की कमी, अत्यधिक पसीना आना, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, लंबे समय तक धूप में रहना और पोषण की कमी शामिल हैं। ये सभी परेशानी गर्भवती महिलाओं की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। हालांकि पर्याप्त मात्रा में जल और नारियल पानी का सेवन, दोपहर में बाहर निकलने से बचना, ताजे फल- हल्का भोजन लेना, नियमित आराम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने भी गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है, ताकि गर्मी में उनका और शिशु का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
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धूप में निकलने से बचें
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि गर्मी अधिक है और शरीर का तापमान संतुलित रखना भी जरूरी है। गर्भवती महिलाओं में पानी की कमी तेजी से होती है, जिससे चक्कर आना, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इनसे बचना चाहिए। वहीं, महिला रोग विशेषज्ञ व पूर्व सीएमएस डॉ. श्रद्धा यादव ने बताया कि गर्मी का असर केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। गर्मी से असहजता के कारण गर्भवती महिलाओं में तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है, जो गर्भस्थ शिशु के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
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