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Ghaziabad News: तीन दिन तक गर्भवती महिला अस्पताल के काटती रही चक्कर, नहीं किया भर्ती
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गाजियाबाद। प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती तीन दिन तक परिजनों के साथ जिला महिला अस्पताल के चक्कर काटती रही, लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। रविवार को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंची, लेकिन जांच कराने के नाम पर बाहर भेज दिया गया। चार घंटे तक जांच के लिए भटकती रही, दोबारा अस्पताल पहुंचने पर रेफर करने के नाम पर बाहर का रास्ता दिखा गया। बताया गया कि सर्जन नहीं है, इसलिए प्रसव नहीं कराया जा सकता है। जबकि सीएमओ ने निर्देश दिया है कि पहले किसी भी गर्भवती को भर्ती कर इलाज किया जाए, बहुत गंभीर स्थिति होने पर ही रेफर किया जाए।
मुरादनगर के नूरगंज निवासी चांद मोहम्मद ने बताया कि उनकी पत्नी नरगिस गर्भवती हैं। नौ माह का समय पूरा होने के बाद प्रसव पीड़ा होने लगी तो बृहस्पतिवार को नरगिस को जिला महिला अस्पताल ले गए। बताया कि महिला अस्पताल से ही उनका इलाज चल रहा था। डाक्टरों ने जांच कराने की सलाह दी। जांच में रक्तचाप बढ़ा हुआ आया। डाॅक्टर ने दवा लिख दी। शुक्रवार को डाॅक्टर ने फिर से जांच कराई तो रिपोर्ट सामान्य थी, इसके बाद शनिवार को सिजेरियन प्रसव कराने का समय दिया। शनिवार को सुबह 11 बजे से शाम छह बजे तक अस्पताल में दर्द से तड़पती रही। डाक्टर पहले आपरेशन करने की बात कहती रहीं, लेकिन देर शाम को कहा गया कि अब सोमवार को आपरेशन होगा, इसलिए वापस घर जाओ। उसके बाद वह घर लौट गए। रविवार को दोपहर अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस से महिला अस्पताल पहुंची। लेबर रूम में मौजूद डाॅक्टर ने बाहर से अल्ट्रासांउड जांच कराने के लिए लिख दिया। बाहर अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए भटकते रहे, लेकिन अधिकांश केंद्र बंद थे। प्रसव पीड़ा में ही वह अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए जगह-जगह भटकती रही, शाम चार बजे उन्हें दिल्ली जीटीबी के लिए रेफर कर दिया।
इस मामले में अस्पताल की सीएमएस डॉ.अलका शर्मा का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हो सकता है गर्भवती को कोई गंभीर परेशानी रही हो। सोमवार को पूरे प्रकरण की जानकारी करुंगी। अगर स्टाफ की कमी पाई गई तो कार्रवाई करूंगी।
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मुरादनगर के नूरगंज निवासी चांद मोहम्मद ने बताया कि उनकी पत्नी नरगिस गर्भवती हैं। नौ माह का समय पूरा होने के बाद प्रसव पीड़ा होने लगी तो बृहस्पतिवार को नरगिस को जिला महिला अस्पताल ले गए। बताया कि महिला अस्पताल से ही उनका इलाज चल रहा था। डाक्टरों ने जांच कराने की सलाह दी। जांच में रक्तचाप बढ़ा हुआ आया। डाॅक्टर ने दवा लिख दी। शुक्रवार को डाॅक्टर ने फिर से जांच कराई तो रिपोर्ट सामान्य थी, इसके बाद शनिवार को सिजेरियन प्रसव कराने का समय दिया। शनिवार को सुबह 11 बजे से शाम छह बजे तक अस्पताल में दर्द से तड़पती रही। डाक्टर पहले आपरेशन करने की बात कहती रहीं, लेकिन देर शाम को कहा गया कि अब सोमवार को आपरेशन होगा, इसलिए वापस घर जाओ। उसके बाद वह घर लौट गए। रविवार को दोपहर अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस से महिला अस्पताल पहुंची। लेबर रूम में मौजूद डाॅक्टर ने बाहर से अल्ट्रासांउड जांच कराने के लिए लिख दिया। बाहर अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए भटकते रहे, लेकिन अधिकांश केंद्र बंद थे। प्रसव पीड़ा में ही वह अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए जगह-जगह भटकती रही, शाम चार बजे उन्हें दिल्ली जीटीबी के लिए रेफर कर दिया।
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इस मामले में अस्पताल की सीएमएस डॉ.अलका शर्मा का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हो सकता है गर्भवती को कोई गंभीर परेशानी रही हो। सोमवार को पूरे प्रकरण की जानकारी करुंगी। अगर स्टाफ की कमी पाई गई तो कार्रवाई करूंगी।
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