{"_id":"663960d69d98d0724b08aa27","slug":"pregnant-woman-dies-during-treatment-in-district-womens-hospital-ghaziabad-news-c-30-gbd1013-370623-2024-05-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: जिला महिला अस्पताल में इलाज के दौरान गर्भवती की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: जिला महिला अस्पताल में इलाज के दौरान गर्भवती की मौत
विज्ञापन
गाजियाबाद। नोएडा सेक्टर-63 छिजारसी से जिला महिला अस्पताल में भर्ती आठ माह की गर्भवती मोनिका की इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया गया कि गर्भवती को मिर्गी के दौरे पड़ते थे। दौरा पड़ने और उल्टी होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला की मौत होने पर अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। बिना पोस्ट मार्टम कराए ही महिला का शव ले जाने की जिद पर पुलिस और परिजनों में नोकझोंक भी हुई। बाद में पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया।
छिजारसी निवासी सोनी की 27 वर्षीय पत्नी मोनिका को जिला महिला अस्पताल में रात 1.20 बजे भर्ती कराया गया था। उस समय उच्च रक्तचाप होने के साथ ही उल्टी और मिर्गी के दौरे भी पड़ रहे थे। इमरजेंसी में डॉक्टर ने जांच के बाद महिला का इलाज शुरू किया था, लेकिन भर्ती होने के 20 मिनट में ही मोनिका की मौत हो गई। एक साल पहले ही मोनिका और सोनी की शादी हुई थी। इससे पहले दोनों लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे थे। गर्भवती के परिवार की कुछ महिलाओं ने डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाने का भी आरोप लगाया। इसके बाद एसीपी प्रियाश्री पाल ने मौत का कारण जानने के लिए शव का पोस्टमॉर्टम कराने का निर्देश दिए। हालांकि करीब तीन घंटे तक पुलिस और परिजनों के बीच पोस्टमॉर्टम को लेकर नोकझोंक होती रही। बाद में पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
अस्पताल के सीएमएस डाॅ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि विजयनगर स्थित जीवन ज्योति अस्पताल से मोनिका को रेफर किया था। उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। गर्भवती एलेम्पीसिया की शिकार थी। लेबर रूम में मौजूद डॉक्टरों ने उसे बचाने के काफी प्रयास किया, लेकिन हालात गंभीर होने से मृत्यु हो गई। सीएमएस ने बताया कि परिजनों का आरोप बेबुनियाद था।
विज्ञापन
विज्ञापन
छिजारसी निवासी सोनी की 27 वर्षीय पत्नी मोनिका को जिला महिला अस्पताल में रात 1.20 बजे भर्ती कराया गया था। उस समय उच्च रक्तचाप होने के साथ ही उल्टी और मिर्गी के दौरे भी पड़ रहे थे। इमरजेंसी में डॉक्टर ने जांच के बाद महिला का इलाज शुरू किया था, लेकिन भर्ती होने के 20 मिनट में ही मोनिका की मौत हो गई। एक साल पहले ही मोनिका और सोनी की शादी हुई थी। इससे पहले दोनों लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे थे। गर्भवती के परिवार की कुछ महिलाओं ने डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाने का भी आरोप लगाया। इसके बाद एसीपी प्रियाश्री पाल ने मौत का कारण जानने के लिए शव का पोस्टमॉर्टम कराने का निर्देश दिए। हालांकि करीब तीन घंटे तक पुलिस और परिजनों के बीच पोस्टमॉर्टम को लेकर नोकझोंक होती रही। बाद में पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
विज्ञापन
अस्पताल के सीएमएस डाॅ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि विजयनगर स्थित जीवन ज्योति अस्पताल से मोनिका को रेफर किया था। उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। गर्भवती एलेम्पीसिया की शिकार थी। लेबर रूम में मौजूद डॉक्टरों ने उसे बचाने के काफी प्रयास किया, लेकिन हालात गंभीर होने से मृत्यु हो गई। सीएमएस ने बताया कि परिजनों का आरोप बेबुनियाद था।
विज्ञापन