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ये है गाजियाबाद...यहां की हर सांस में घुल रहा प्रदूषण का ‘जहर’
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
Updated Thu, 21 Jul 2016 12:40 AM IST
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प्रदूषण
- फोटो : Getty
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सड़क की बात छोड़ दीजिए, आपके घर के अंदर जो हवा आ रही है, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पैमाने पर वह भी प्रदूषित है। गाजियाबाद में आवासीय क्षेत्र में वायु प्रदूषण मानक से तीन गुना अधिक है यानी आप अपने घरों के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं। इससे सबसे अधिक प्रभावित सांस के रोगी होते हैं।
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आवासीय क्षेत्र में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम)-10 के कण 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कुछ कम हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक पीएम-10 मई में 285.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जबकि मार्च में ये 297.3 और अप्रैल में 292.1 था। पीएम-10 का 200 से अधिक होना लोगों की सेहत पर खतरा है।
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उधर, पीएम-2.5 से और भी खतरा है, जिसकी जांच फिलहाल गाजियाबाद में नियमित तौर पर नहीं हो रही है। यह कण इतना सूक्ष्म होता है कि सांस के जरिए रक्त तक पहुंच जाता है। फेफड़ों के साथ ही शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। पलमोनोलॉजिस्ट डा. केके पांडे ने बताया कि पीएम-10 के कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर जम जाते हैं, जिससे लोग अस्थमा और अन्य श्वास संबंधी रोगों की चपेट में आ रहे हैं।
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वर्ष की शुरुआत में सबसे अधिक था प्रदूषण
वर्ष की शुरुआत जनवरी 2016 में टीएचए में पीएम-10 मानक का चार गुना 402.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था और गाजियाबाद में मानक से साढ़े तीन गुना अधिक 354.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था।
अन्य देशों में कम हैं पीएम-10 के मानक
एशियाई देशों को छोड़ दें तो अन्य देशों में पीएम-10 के मानक काफी कम हैं। जहां एशियाई देशों में पीएम-10 का मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है, वहीं यूरोप के देशों में ये 20 और अफ्रीका के देशों में ये 60 ही है।
बारिश के बाद लीजिए खुलकर सांस
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैज्ञानिक अधिकारी सपना श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश के बाद वायु में पीएम-10 और पीएम-2.5 की मात्रा घट जाती है और वायुमंडल में मौजूद धूल के कण भी जमीन पर आ जाते हैं। ऐसे में आसमान साफ होने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ नहीं होती है।
बढ़ते प्रदूषण पर एनजीटी सख्त
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर एनजीटी ने भी सख्त रुख अपनाया हुआ है। यही कारण है कि दिल्ली में 10 साल पुरानी डीजल की गाड़ियों की एंट्री बैन कर दी गई है। संदेश साफ है कि यदि पर्यावरण को बचाने के लिए कड़े कदम न उठाए गए तो हालात और भयावह हो जाएंगे।
हरियाली बढ़ाकर प्रदूषण कम करें
हॉट सिटी में ग्रीनरी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे कौशांबी निवासी गुलशन सदाना ने बताया कि प्रदूषण को कम करने के लिए हरियाली बढ़ाना बेहद जरूरी है। पेड़ों के होने से लोगोें के पास पर्याप्त मात्रा में शुद्ध ऑक्सीजन होगी, जिससे लोगों को हो रहे श्वास रोग से निजात मिलेगी।