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Ghaziabad News: नगर निगम में गरमाई राजनीति, महापौर और अधिकारियों में तकरार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 05 Aug 2024 03:06 AM IST
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Politics heated up in Municipal Corporation, dispute between mayor and officials
गाजियाबाद। बिना अनुमति लिए महापौर कार्यालय से एक कंप्यूटर ऑपरेटर को हटाए जाने पर नगर निगम में राजनीति गरमा गई है। महापौर सुनीता दयाल ने नगर निगम अधिकारियों के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि बिना अनुमति लिए मेरे ही कार्यालय से एक कर्मचारी को हटाना मेरा अपमान करने जैसा है। इस तरह के आदेश जारी कर नगर निगम के अधिकारी मेरी आवाज को नहीं दबा सकेंगे। अधिकारियों में आखिर इतनी बेचैनी क्यों हो गई कि मेरे कार्यालय से कंप्यूटर ऑपरेटर को ही हटाने का आदेश जारी कर दिया। निगम में बरती जा रही अनियमितताओं को उजागर करती रहूंगी।
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दरअसल, पिछले कुछ दिनों से महापौर सुनीता दयाल नगर निगम में बरती जा रही अनियमितताओं को उजागर करने पर चर्चाओं में हैं। पिछले दिनों उन्होंने संपत्ति कर विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर किया था। राजनगर डिस्टि्रक्ट सेंटर (आरडीसी) कुछ व्यवसायिक संपत्तियों पर आवासीय दरों से कर लगाने के मामले का खुलासा किया था। इसके बाद शहर के एक बड़े अस्पताल पर भी कम संपत्ति कर लगाकर सरकारी राजस्व के नुकसान का मामला उठाया था। इस मामले की जांच के निर्देश निगम अधिकारियों को दिए गए थे, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिए जाने पर महापौर नाराज चल रहीं थीं।
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इस बीच दो दिन पहले ही महापौर कार्यालय में तैनात एक कंप्यूटर ऑपरेटर को हटाकर 311 एप में तैनात करने के आदेश जारी कर दिए गए। निगम में चर्चा है कि महापौर कार्यालय में तैनात ऑपरेटर निगम के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों से फाइलें मंगाने का काम कर रहा था। हालाकि, महापौर ने बताया कि उनके आदेश पर फाइलें मंगाई जा रही थीं। महापौर की जिम्मेदारी और अधिकार है कि निगम के अच्छे और बुरे काम पर नजर रखे। अगर फाइलें ठीक थीं और किसी तरह की अनियमितता नहीं थी तो अचानक इतनी बेचैनी क्यों बढ़ गई कि ऑपरेटर को हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। आदेश जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती थी कि एक बार मुझसे चर्चा करें, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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