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Ghaziabad News: नए कानून आने पर भी पुलिस का ढर्रा पुराना
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सुमित शिशौदिया
साहिबाबाद। अंग्रेजों के जमाने के कानून की जगह भले ही एक जुलाई से भारतीय न्याय संहिता के नाम से नए कानून आ गए हों लेकिन पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करने का पुराना ढर्रा नहीं छोड़ रही है। नए कानून में ई-मेल और फोन पर मिली सूचना पर भी तत्काल केस दर्ज करने का प्रावधान हैं लेकिन पुलिस तहरीर मिलने पर भी देरी कर रही है। कई मामलों में तो यह देरी 10 से 15 दिन तक की रही।
एक जुलाई को नया कानून लागू होते ही पुलिस ने फोन से सूचना के आधार पर मुकदमा दर्ज कर खूब वाहवाही लूटी थी, लेकिन समय बीतते ही पुलिस पुराने ढर्रे पर ही नजर आ रही है। एक जुलाई की रात आठ बजे के बाद चोरों ने शिप्रा मार्केट में जयप्रीत सिंह की गाड़ी का शीशा तोड़कर लैपटॉप और सामान चोरी कर लिया था। उन्होंने पुलिस को सूचना देने के बाद घर जाकर ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन जांच के नाम पर पुलिस ने 15 दिन बाद मुकदमा दर्ज किया। सिर्फ यही एक केस ऐसा नहीं है, ऐसे और भी मामले हैं, जिसमें लोगों को भटकना पड़ रहा है।
केस एक
12 दिन में हुई सुनवाई
वैशाली के अलकनंदा अपार्टमेंट में बीकॉम के छात्र मनीष से दो जुलाई को बदमाशों ने आईफोन-15 लूट लिया था। कौशांबी थाने में शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने 12 दिन तक उन्हें जांच के बहाने टहलाया। मुकदमा दर्ज नहीं करने पर जब उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही तो थानाध्यक्ष के कहने पर 13 जुलाई को मुकदमा दर्ज किया गया। इससे पहले पुलिसकर्मियों ने उन्हें ऑनलाइन एफआईआर का तरीका समझाकर घर भेज दिया था।
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केस दो
पांच दिन बाद दर्ज हुआ केस
आदित्य वर्ल्ड सिटी के आशीष कुमार के चाचा से 11 जुलाई की रात हाईवे पर बदमाशों ने फोन लूट लिया था। दोनों दिल्ली से लौट रहे थे। इंदिरापुरम पुलिस को सूचना दी उसके बाद उन्हें शिप्रा चौकी और अभयखंड चौकी के चक्कर कटाए गए। पुलिस ने पांचवें दिन लूट का मुकदमा दर्ज किया।
ऑनलाइन एफआईआर में तकनीकी दिक्कत से समय लगता है। ई-एफआईआर नहीं होने से वादी को थाने में शिकायत देनी होती है। इनमें समस्या यह सामने आई है कि लोग घटना का विवरण, घटनास्थल, समय और अन्य महत्वपूर्ण तथ्य नहीं बता पा रहे हैं। नए कानून के तहत ऑनलाइन सूचना देने के बाद तीन दिन के अंदर वादी को थाने में हस्ताक्षर करने और बयान देने आना होगा।
- निमिष पाटिल, डीसीपी
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साहिबाबाद। अंग्रेजों के जमाने के कानून की जगह भले ही एक जुलाई से भारतीय न्याय संहिता के नाम से नए कानून आ गए हों लेकिन पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करने का पुराना ढर्रा नहीं छोड़ रही है। नए कानून में ई-मेल और फोन पर मिली सूचना पर भी तत्काल केस दर्ज करने का प्रावधान हैं लेकिन पुलिस तहरीर मिलने पर भी देरी कर रही है। कई मामलों में तो यह देरी 10 से 15 दिन तक की रही।
एक जुलाई को नया कानून लागू होते ही पुलिस ने फोन से सूचना के आधार पर मुकदमा दर्ज कर खूब वाहवाही लूटी थी, लेकिन समय बीतते ही पुलिस पुराने ढर्रे पर ही नजर आ रही है। एक जुलाई की रात आठ बजे के बाद चोरों ने शिप्रा मार्केट में जयप्रीत सिंह की गाड़ी का शीशा तोड़कर लैपटॉप और सामान चोरी कर लिया था। उन्होंने पुलिस को सूचना देने के बाद घर जाकर ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन जांच के नाम पर पुलिस ने 15 दिन बाद मुकदमा दर्ज किया। सिर्फ यही एक केस ऐसा नहीं है, ऐसे और भी मामले हैं, जिसमें लोगों को भटकना पड़ रहा है।
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केस एक
12 दिन में हुई सुनवाई
वैशाली के अलकनंदा अपार्टमेंट में बीकॉम के छात्र मनीष से दो जुलाई को बदमाशों ने आईफोन-15 लूट लिया था। कौशांबी थाने में शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने 12 दिन तक उन्हें जांच के बहाने टहलाया। मुकदमा दर्ज नहीं करने पर जब उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही तो थानाध्यक्ष के कहने पर 13 जुलाई को मुकदमा दर्ज किया गया। इससे पहले पुलिसकर्मियों ने उन्हें ऑनलाइन एफआईआर का तरीका समझाकर घर भेज दिया था।
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केस दो
पांच दिन बाद दर्ज हुआ केस
आदित्य वर्ल्ड सिटी के आशीष कुमार के चाचा से 11 जुलाई की रात हाईवे पर बदमाशों ने फोन लूट लिया था। दोनों दिल्ली से लौट रहे थे। इंदिरापुरम पुलिस को सूचना दी उसके बाद उन्हें शिप्रा चौकी और अभयखंड चौकी के चक्कर कटाए गए। पुलिस ने पांचवें दिन लूट का मुकदमा दर्ज किया।
ऑनलाइन एफआईआर में तकनीकी दिक्कत से समय लगता है। ई-एफआईआर नहीं होने से वादी को थाने में शिकायत देनी होती है। इनमें समस्या यह सामने आई है कि लोग घटना का विवरण, घटनास्थल, समय और अन्य महत्वपूर्ण तथ्य नहीं बता पा रहे हैं। नए कानून के तहत ऑनलाइन सूचना देने के बाद तीन दिन के अंदर वादी को थाने में हस्ताक्षर करने और बयान देने आना होगा।
- निमिष पाटिल, डीसीपी