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Ghaziabad News: बेलगाम डग्गामार बसों में हर दिन जोखिम में होती है यात्रियों की जान
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साहिबाबाद। ग्रेटर नोएडा में हुए बस हादसे के बाद भी न तो परिवहन विभाग ही सजग हुआ है और न ही निजी बस संचालकों पर कोई असर पड़ा है। क्षेत्र में डग्गामार अनफिट बसें बेलगाम दौड़कर हर दिन यात्रियों की जान जोखिम में होती है और भगवान भरोसे ही वह गंतव्य तक पहुंचते हैं। इनमें सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, निजी बसें छोटी और लंबी दूरी सब पर धड़ल्ले से चल रही हैं। कौशांबी मेट्रो स्टेशन के पीछे सर्विस रोड हो या फिर मोहन नगर स्थित वर्ल्ड स्कॉवयर मॉल के बराबर की सड़क व लालकुआं पर इन बसों को आसानी से देखा जा सकता है।
मोहन नगर डिपो के पास खड़ी दो डग्गामार बसें लोनी व मुरादनगर रूट पर चलती हैं। दोनों बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। वहीं, कौशांबी मेट्रो स्टेशन के पीछे सर्विस रोड पर खड़ी लखनऊ जाने वाली बस में बाहर से देखने में बेहतर थी, लेकिन अंदर व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ भी नहीं था। बस में न तो फर्स्ट एड बॉक्स था और न ही अग्निशमन यंत्र लगा हुआ। जब परिचालक से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हर दिन क्या हादसा हो जाता है। निजी बसों में चालक-परिचालकों की मनमानी यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। वहीं, दूसरी ओर परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में अपनी लाचारी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निजी बसों पर परिवहन निगम का कोई जोर नहीं चलता है। यह स्थिति यात्रियों के लिए चिंताजनक है।
क्या बोले अधिकारी
निजी बसों को फिटनेस का सर्टिफिकेट आरटीओ कार्यालय से दिया जाता है। निजी बस संचालक आम तौर पर सीमित परमिट पर बसों का संचालन बेधड़क किसी भी मार्ग पर किया जाता है। इन बसों में लापरवाही पर आरटीओ टीम ही पुलिस के साथ मिलकर कार्यवाही करती है। केसरी नंदन चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम
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मोहन नगर डिपो के पास खड़ी दो डग्गामार बसें लोनी व मुरादनगर रूट पर चलती हैं। दोनों बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। वहीं, कौशांबी मेट्रो स्टेशन के पीछे सर्विस रोड पर खड़ी लखनऊ जाने वाली बस में बाहर से देखने में बेहतर थी, लेकिन अंदर व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ भी नहीं था। बस में न तो फर्स्ट एड बॉक्स था और न ही अग्निशमन यंत्र लगा हुआ। जब परिचालक से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हर दिन क्या हादसा हो जाता है। निजी बसों में चालक-परिचालकों की मनमानी यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। वहीं, दूसरी ओर परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में अपनी लाचारी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निजी बसों पर परिवहन निगम का कोई जोर नहीं चलता है। यह स्थिति यात्रियों के लिए चिंताजनक है।
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क्या बोले अधिकारी
निजी बसों को फिटनेस का सर्टिफिकेट आरटीओ कार्यालय से दिया जाता है। निजी बस संचालक आम तौर पर सीमित परमिट पर बसों का संचालन बेधड़क किसी भी मार्ग पर किया जाता है। इन बसों में लापरवाही पर आरटीओ टीम ही पुलिस के साथ मिलकर कार्यवाही करती है। केसरी नंदन चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम
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