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Ghaziabad News: अभिभावक को निजी स्कूल की 3.61 लाख रुपये बकाया फीस चुकाने का आदेश
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गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित निजी स्कूल की फीस का भुगतान नहीं करना एक अभिभावक को भारी पड़ गया। अपर सिविल जज प्रवर खंड, कोर्ट नंबर-10 ने फीस बकाया रखने के मामले में अभिभावक अरुण कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए स्कूल के पक्ष में 3,61,274 रुपये की डिक्री की है। अदालत ने बकाया रकम पर निर्णय की तारीख से अंतिम भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया है। पूरी रकम का भुगतान निर्णय की तारीख से एक माह के भीतर करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूल की ओर से दाखिल वाद के अनुसार अरुण कुमार श्रीवास्तव के दो बच्चे इंदिरापुरम स्थित निजी स्कूल में पढ़ते थे। सत्र 2018-19 और 2019-20 की फीस बकाया होने पर स्कूल प्रबंधन ने कई बार अभिभावक से संपर्क किया। एसएमएस, फोन, ई-मेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से फीस जमा करने के लिए सूचना दी गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश के बाद भी बकाया रकम जमा नहीं की गई।
अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक 31 दिसंबर 2019 तक दोनों बच्चों की कुल 2,50,124 रुपये फीस बकाया थी। इसके अलावा सत्र 2020-21 की 74,100 रुपये फीस भी बकाया रही। स्कूल ने अक्तूबर 2020 में कानूनी नोटिस भेजकर कुल 3,61,274 रुपये का भुगतान मांगा, लेकिन इसके बाद भी रकम नहीं चुकाई गई। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने अदालत में वाद दायर किया।
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मुकदमा अदालत में पहुंचने के बाद प्रतिवादी की उपस्थिति के लिए समन और नोटिस जारी किए गए। समन की तामील प्रकाशन के माध्यम से भी कराई गई, लेकिन अरुण कुमार श्रीवास्तव अदालत में उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने अपना प्रतिवाद पत्र भी दाखिल नहीं किया। इसके बाद 25 मार्च 2025 को प्रतिवाद पत्र दाखिल करने का अवसर समाप्त कर मुकदमे की सुनवाई एकपक्षीय रूप से आगे बढ़ाई गई।
सुनवाई के दौरान स्कूल की प्रधानाचार्य के बयान और अदालत में पेश दस्तावेजों को विश्वसनीय पाया गया। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने स्कूल का दावा साबित मानते हुए अभिभावक के खिलाफ एकपक्षीय डिक्री पारित कर दी।
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स्कूल की ओर से दाखिल वाद के अनुसार अरुण कुमार श्रीवास्तव के दो बच्चे इंदिरापुरम स्थित निजी स्कूल में पढ़ते थे। सत्र 2018-19 और 2019-20 की फीस बकाया होने पर स्कूल प्रबंधन ने कई बार अभिभावक से संपर्क किया। एसएमएस, फोन, ई-मेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से फीस जमा करने के लिए सूचना दी गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश के बाद भी बकाया रकम जमा नहीं की गई।
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अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक 31 दिसंबर 2019 तक दोनों बच्चों की कुल 2,50,124 रुपये फीस बकाया थी। इसके अलावा सत्र 2020-21 की 74,100 रुपये फीस भी बकाया रही। स्कूल ने अक्तूबर 2020 में कानूनी नोटिस भेजकर कुल 3,61,274 रुपये का भुगतान मांगा, लेकिन इसके बाद भी रकम नहीं चुकाई गई। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने अदालत में वाद दायर किया।
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मुकदमा अदालत में पहुंचने के बाद प्रतिवादी की उपस्थिति के लिए समन और नोटिस जारी किए गए। समन की तामील प्रकाशन के माध्यम से भी कराई गई, लेकिन अरुण कुमार श्रीवास्तव अदालत में उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने अपना प्रतिवाद पत्र भी दाखिल नहीं किया। इसके बाद 25 मार्च 2025 को प्रतिवाद पत्र दाखिल करने का अवसर समाप्त कर मुकदमे की सुनवाई एकपक्षीय रूप से आगे बढ़ाई गई।
सुनवाई के दौरान स्कूल की प्रधानाचार्य के बयान और अदालत में पेश दस्तावेजों को विश्वसनीय पाया गया। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने स्कूल का दावा साबित मानते हुए अभिभावक के खिलाफ एकपक्षीय डिक्री पारित कर दी।