{"_id":"69124a4d0c2df330270bdb75","slug":"over-100000-people-received-rabies-vaccination-in-10-months-ghaziabad-news-c-30-gbd1036-759030-2025-11-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: दस महीने में एक लाख से अधिक लोगों ने लगवाया रेबीज से बचाव का टीका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: दस महीने में एक लाख से अधिक लोगों ने लगवाया रेबीज से बचाव का टीका
विज्ञापन
गाजियाबाद। लावारिस कुत्तों और बंदरों का आतंक लगातार बना हुआ है। स्थिति यह है कि हर दिन कुत्ते, बंदर या अन्य जानवरों के काटने के 300 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते 10 माह में कुल 1,10,337 लोग कुत्तों समेत अन्य जानवरों के काटने का शिकार हुए हैं।
अक्तूबर में 11,456 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी गई, जबकि सितंबर में यह संख्या 11,911 थी। इसके बावजूद शहर के गली-मोहल्लों से लेकर हाईराइज सोसायटियों तक लोग आवारा कुत्तों के डर में जी रहे हैं। कई जगह लोग घर से बाहर निकलते समय डंडा लेकर चलते हैं। सोसायटी वासियों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों में दिखती है, धरातल पर हालात जस के तस हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला अस्पतालों के साथ-साथ सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज इंजेक्शन की सुविधा शुरू कर दी है। एमएमजी अस्पताल, संयुक्त जिला अस्पताल और सीएचसी केंद्रों पर रोज सैकड़ों लोग वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। एमएमजी अस्पताल के डाग बाइट क्लीनिक के प्रभारी डॉ. नितिन प्रियदर्शी का कहना है कि रोजाना ओपीडी में 250 - 300 से अधिक घायल आते हैं, इनमें से रोजाना 110 से 125 नए घायल होते हैं। उन्होंने बताया कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसे केवल नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि कुत्ते के काटने के बाद घाव पर कोई घरेलू नुस्खा जैसे लाल मिर्च या हल्दी न लगाएं, बल्कि तुरंत कपड़े धोने वाले साबुन से घाव धोकर नजदीकी अस्पताल में इलाज कराएं।
विज्ञापन
एमएमजी अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए एंटी रेबीज सीरम की सुविधा उपलब्ध है। यह इंजेक्शन उन मरीजों को लगाया जाता है जिन्हें गहरा या कई जगहों पर काटा गया हो। हालांकि, संजयनगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में मुख्य वैक्सीनेशन सेंटर होने के बावजूद एंटी रेबीज सीरम नहीं लगाया जा रहा है और गंभीर मरीजों को दिल्ली रेफर करना पड़ता है।
नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन की सुविधा जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी सभी जगह उपलब्ध है, जबकि एंटी रेबीज सीरम फिलहाल केवल एमएमजी अस्पताल में लगाया जा रहा है। नोडल अधिकारी ने बताया कि जनवरी में 11,834, फरवरी में 12,452, मार्च में 11,438, अप्रैल में 9,392, मई में 11,008, जून में 9,859, जुलाई में 9,111, अगस्त में 11,876, सितंबर में 11,911 और अक्तूबर में 11,456 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई है।
विज्ञापन
अक्तूबर में 11,456 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी गई, जबकि सितंबर में यह संख्या 11,911 थी। इसके बावजूद शहर के गली-मोहल्लों से लेकर हाईराइज सोसायटियों तक लोग आवारा कुत्तों के डर में जी रहे हैं। कई जगह लोग घर से बाहर निकलते समय डंडा लेकर चलते हैं। सोसायटी वासियों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों में दिखती है, धरातल पर हालात जस के तस हैं।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला अस्पतालों के साथ-साथ सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज इंजेक्शन की सुविधा शुरू कर दी है। एमएमजी अस्पताल, संयुक्त जिला अस्पताल और सीएचसी केंद्रों पर रोज सैकड़ों लोग वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। एमएमजी अस्पताल के डाग बाइट क्लीनिक के प्रभारी डॉ. नितिन प्रियदर्शी का कहना है कि रोजाना ओपीडी में 250 - 300 से अधिक घायल आते हैं, इनमें से रोजाना 110 से 125 नए घायल होते हैं। उन्होंने बताया कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसे केवल नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि कुत्ते के काटने के बाद घाव पर कोई घरेलू नुस्खा जैसे लाल मिर्च या हल्दी न लगाएं, बल्कि तुरंत कपड़े धोने वाले साबुन से घाव धोकर नजदीकी अस्पताल में इलाज कराएं।
विज्ञापन
एमएमजी अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए एंटी रेबीज सीरम की सुविधा उपलब्ध है। यह इंजेक्शन उन मरीजों को लगाया जाता है जिन्हें गहरा या कई जगहों पर काटा गया हो। हालांकि, संजयनगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में मुख्य वैक्सीनेशन सेंटर होने के बावजूद एंटी रेबीज सीरम नहीं लगाया जा रहा है और गंभीर मरीजों को दिल्ली रेफर करना पड़ता है।
नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन की सुविधा जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी सभी जगह उपलब्ध है, जबकि एंटी रेबीज सीरम फिलहाल केवल एमएमजी अस्पताल में लगाया जा रहा है। नोडल अधिकारी ने बताया कि जनवरी में 11,834, फरवरी में 12,452, मार्च में 11,438, अप्रैल में 9,392, मई में 11,008, जून में 9,859, जुलाई में 9,111, अगस्त में 11,876, सितंबर में 11,911 और अक्तूबर में 11,456 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई है।