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Ghaziabad News: 22,000 इकाइयों में सिर्फ 201 ने ही लगवाए पीएनजी डीजी सेट
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साहिबाबाद। प्रदूषण कम करने की योजना सिस्टम की मेहरबानी से कागजों में ही सिमट कर रह गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 22000 उद्योगों को पीएनजी से जनरेटर चलाने की जो छह माह की मोहलत दी थी। उसमें से सिर्फ 201 इकाइयों ने ही नियम माने हैं। यानी जिले में 21,799 उद्योग डीजल से जनरेटर चला कर नियम धुआं धुआं कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नए साल से इन उद्योगों पर नकेल कसने की तैयारी कर रहा है। आईजीएल से औद्योगिक क्षेत्र का रिकॉर्ड मांगा है।
गाजियाबाद में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले यानी एमएसएमई का हब है। यहां करीब 27 हजार इस श्रेणी के निर्यातक व निर्माता उद्योग हैं। इनमें से 20 से 22 हजार कल कारखाने ऐसे हैं जो बिना पीएनजी के संचालित हो रहे थे। उनमें स्वच्छ ईंधन की जगह अलग-अलग प्रकार से ईंधन प्रयोग किये जाते थे। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 15 मई से बिना पीएनजी जनरेटर चलाने की पाबंदी लगाई थी। तब इससे उद्योगों में उत्पादन का संकट गहरा गया था। उद्यमियों की मांग पर आयोग के सदस्य सचिव अरविंद नौटियाल ने छह महीने की सशर्त मोहलत दी कि इस दरम्यान उद्यमियों को 70 प्रतिशत पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) और 30 प्रतिशत डीजल पर जनरेटर चलाने की व्यवस्था करनी होगी।
इसके बाद सिस्टम के अधिकारी आराम की स्थिति में आ गए। आईजीएल के आंकड़ें बताते हैं कि दो साल में करीब 2500 उद्योगों ने पीएनजी के लिए इच्छा जताई थी लेकिन इनमें से 1800 लोगों ने आवेदन भी किया। 1500 इकाइयों के उद्यमियों ने अभी तक कागजातों पर सहमति नहीं दी और 25 दिसंबर 2023 तक जिले में सिर्फ 201 उद्यमी ही पीएनजी आपूर्ति पर जनरेटर चला रहे हैं।
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एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे उद्यमी व आपूर्ति कंपनी
कंपनी की तरफ से बताया गया कि जिले में चार हजार किलोमीटर एरिये में गैस पाइप लाइन बिछी हुई है। उद्यमी गैस आपूर्ति के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। वहीं, साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 के उद्यमी मुकेश गुप्ता,एसपी चौहान,प्रवीण जैन का तर्क है कि कंपनी पर गैस आपूर्ति के संसाधन सीमित हैं और मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पाती। इसके अलावा पीएनजी की दर महंगी है।
इन उद्योगों को मिली थी राहत
नए आदेश के बाद जिले में फैब्रिकेटर, खराद मशीन, ड्रिल मशीन, आटा चक्की, तेल मशीन एवं जनरेटर उद्योगों को इससे बड़ी राहत मिली थी। उद्यमियों ने इस फैसले की सराहना की थी।
आयोग के निर्देश में यह थे नियम
-19 किलो वाट से कम क्षमता वाले पोर्टेबल डीजी सेट - किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होगी, केवल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के समय इन पर पाबंदी रहेगी।
-19 किलो वाट से 125 किलो वाट से कम वाले डीजी सेट- आम दिनों में कोई पाबंदी नहीं होगी लेकिन ग्रेप के दौरान दिन भर में दो घंटे के लिए डीजी सेट का संचालन किया जा सकेगा। इसके लिए भी संचालन करने वाले को डीजी सेट लॉग बुक तैयार करने होगा वह भी डिजीटली।
-125 किलो वाट से 800 किलो वाट कम वाले डीजी सेट- दोहरे ईंधन वाले होने चाहिए या फिर किसी सर्टिफाइड वेंडर से रेट्रो फिटेड ईसीडी लगा होना चाहिए। तब यह आसानी से चलाए जा सकते हैं। ग्रेप के दौरान भी।
-800 किलो वाट और उससे अधिक वाले डीजी सेट - प्रदूषित धुएं को रोकने वाले कोई डिवाइस अवश्य लगा होना चाहिए या फिर दोहरे ईंधन वाला होना चाहिए। तभी इसे चलाने की अनुमति होगी, लेकिन ग्रेप के दौरान केवल दो घंटे तक डीजी सेट चला सकते हैं वह भी लॉग बुक मेंटेंन करने के बाद डिजीटली।
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यह उद्योग ले रहे पीएनजी
बीएस रोड - 20
साउथ साइड जीटी रोड - 16
दुहाई -1
इंदिरापुरम -1
कविता नगर -2
लोनी रोड- 3
मेरठ रोड -13
मोहन नगर -20
मुरादनगर -1
पांडव नगर - 1
राजनगर -1
राजेन्द्र नगर -1
साहिबाबाद साइट 4 - 58
ट्रोनिका सिटी -54
उद्योग कुंज - 3
विजय नगर - 6
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कोट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक विकास मिश्र का कहना है कि जिन उद्योगों में जनरेटर चलाने में पीएनजी का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उनकी जांच कर कर कार्रवाई की जाएगी।
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गाजियाबाद में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले यानी एमएसएमई का हब है। यहां करीब 27 हजार इस श्रेणी के निर्यातक व निर्माता उद्योग हैं। इनमें से 20 से 22 हजार कल कारखाने ऐसे हैं जो बिना पीएनजी के संचालित हो रहे थे। उनमें स्वच्छ ईंधन की जगह अलग-अलग प्रकार से ईंधन प्रयोग किये जाते थे। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 15 मई से बिना पीएनजी जनरेटर चलाने की पाबंदी लगाई थी। तब इससे उद्योगों में उत्पादन का संकट गहरा गया था। उद्यमियों की मांग पर आयोग के सदस्य सचिव अरविंद नौटियाल ने छह महीने की सशर्त मोहलत दी कि इस दरम्यान उद्यमियों को 70 प्रतिशत पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) और 30 प्रतिशत डीजल पर जनरेटर चलाने की व्यवस्था करनी होगी।
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इसके बाद सिस्टम के अधिकारी आराम की स्थिति में आ गए। आईजीएल के आंकड़ें बताते हैं कि दो साल में करीब 2500 उद्योगों ने पीएनजी के लिए इच्छा जताई थी लेकिन इनमें से 1800 लोगों ने आवेदन भी किया। 1500 इकाइयों के उद्यमियों ने अभी तक कागजातों पर सहमति नहीं दी और 25 दिसंबर 2023 तक जिले में सिर्फ 201 उद्यमी ही पीएनजी आपूर्ति पर जनरेटर चला रहे हैं।
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एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे उद्यमी व आपूर्ति कंपनी
कंपनी की तरफ से बताया गया कि जिले में चार हजार किलोमीटर एरिये में गैस पाइप लाइन बिछी हुई है। उद्यमी गैस आपूर्ति के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। वहीं, साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 के उद्यमी मुकेश गुप्ता,एसपी चौहान,प्रवीण जैन का तर्क है कि कंपनी पर गैस आपूर्ति के संसाधन सीमित हैं और मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पाती। इसके अलावा पीएनजी की दर महंगी है।
इन उद्योगों को मिली थी राहत
नए आदेश के बाद जिले में फैब्रिकेटर, खराद मशीन, ड्रिल मशीन, आटा चक्की, तेल मशीन एवं जनरेटर उद्योगों को इससे बड़ी राहत मिली थी। उद्यमियों ने इस फैसले की सराहना की थी।
आयोग के निर्देश में यह थे नियम
-19 किलो वाट से कम क्षमता वाले पोर्टेबल डीजी सेट - किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होगी, केवल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के समय इन पर पाबंदी रहेगी।
-19 किलो वाट से 125 किलो वाट से कम वाले डीजी सेट- आम दिनों में कोई पाबंदी नहीं होगी लेकिन ग्रेप के दौरान दिन भर में दो घंटे के लिए डीजी सेट का संचालन किया जा सकेगा। इसके लिए भी संचालन करने वाले को डीजी सेट लॉग बुक तैयार करने होगा वह भी डिजीटली।
-125 किलो वाट से 800 किलो वाट कम वाले डीजी सेट- दोहरे ईंधन वाले होने चाहिए या फिर किसी सर्टिफाइड वेंडर से रेट्रो फिटेड ईसीडी लगा होना चाहिए। तब यह आसानी से चलाए जा सकते हैं। ग्रेप के दौरान भी।
-800 किलो वाट और उससे अधिक वाले डीजी सेट - प्रदूषित धुएं को रोकने वाले कोई डिवाइस अवश्य लगा होना चाहिए या फिर दोहरे ईंधन वाला होना चाहिए। तभी इसे चलाने की अनुमति होगी, लेकिन ग्रेप के दौरान केवल दो घंटे तक डीजी सेट चला सकते हैं वह भी लॉग बुक मेंटेंन करने के बाद डिजीटली।
यह उद्योग ले रहे पीएनजी
बीएस रोड - 20
साउथ साइड जीटी रोड - 16
दुहाई -1
इंदिरापुरम -1
कविता नगर -2
लोनी रोड- 3
मेरठ रोड -13
मोहन नगर -20
मुरादनगर -1
पांडव नगर - 1
राजनगर -1
राजेन्द्र नगर -1
साहिबाबाद साइट 4 - 58
ट्रोनिका सिटी -54
उद्योग कुंज - 3
विजय नगर - 6
कोट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक विकास मिश्र का कहना है कि जिन उद्योगों में जनरेटर चलाने में पीएनजी का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उनकी जांच कर कर कार्रवाई की जाएगी।