UP: बेटी के साथ छेड़छाड़ करने वालों को मां ने अदालत में पहचानने से किया इनकार, केस दर्ज करने का दिया गया आदेश
छह साल पुरानी छेड़छाड़ की एक घटना में अदालत में आरोपियों की पहचान से इन्कार करना एक महिला को भारी पड़ गया। पॉक्सो कोर्ट ने महिला के खिलाफ झूठे बयान देने और अदालत का समय नष्ट करने के आरोप में प्रकीर्णवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। साक्ष्य के अभाव में आरोपियों नवाब और समीर को बरी कर दिया गया।
घटना कविनगर क्षेत्र की है। अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, एक महिला ने 25 मार्च 2019 को कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि उसकी 13 वर्षीय बेटी से दो युवक छेड़छाड़ करते थे। महिला ने रिपोर्ट में यह भी कहा था कि वह आरोपियों को पहचानती है। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर नवाब और समीर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान किशोरी ने अदालत में बयान दिया कि छेड़छाड़ की घटना तो हुई थी, लेकिन अदालत में मौजूद नवाब और समीर को नहीं पहचानती। वहीं किशोरी की मां ने अदालत में कहा कि उसने रिपोर्ट बेटी के कहने पर दर्ज कराई थी और वह स्वयं आरोपियों को नहीं पहचानती। अदालत ने पाया कि रिपोर्ट दर्ज कराते समय महिला ने कहा था कि वह आरोपियों को पहचानती है, जबकि अदालत में उसका बयान बदल गया। न्यायाधीश ने कहा कि महिला के झूठे बयान से न सिर्फ अदालत का समय बर्बाद हुआ, बल्कि दो निर्दोष व्यक्तियों को झूठे मुकदमे में फंसाया गया। इस आधार पर कोर्ट ने महिला के खिलाफ प्रकीर्णवाद (झूठे साक्ष्य और अदालत को गुमराह करने से संबंधित आपराधिक प्रक्रिया) दर्ज करने का आदेश दिया।