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Ghaziabad News: 1400 पार्कों में सिर्फ 35 लिए गए गोद, योजना बेपटरी
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गाजियाबाद। शहर के पार्कों को हरा-भरा बनाने और बेहतर रखरखाव के उद्देश्य से शुरू की गई नगर निगम की ''''''''पार्क गोद योजना'''''''' एक साल बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। नगर निगम के 1,400 पार्कों में से अब तक सिर्फ 35 ही गोद दिए जा सके हैं। हद तो यह है कि गोद दिए गए कुछ पार्कों में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें आ रही हैं। इसने योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ पार्कों को गोद लेने वाले लोगों और संस्थाओं ने उनका स्वरूप ही बदल दिया है। पार्कों में आम नागरिकों की आवाजाही रोकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सुबह-शाम टहलने और बच्चों के खेलने के लिए बने पार्कों के निजी इस्तेमाल की भी शिकायत है। कुछ लोगों ने पार्क की ओर अपने भवनों के दरवाजे खोल लिए हैं।
इससे पार्कों के मूल स्वरूप और सार्वजनिक उपयोग पर असर पड़ रहा है। शिकायतकर्ता नवीन शर्मा ने बताया कि निगरानी के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के कारण योजना का अपेक्षित लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। इंदिरापुरम निवासी मुरारी लाल समेत अन्य लोगों ने नगर आयुक्त से गोद दिए गए सभी पार्कों की जांच कराने की मांग की। पार्षद नरेश जाटव ने अवैध रूप से खोले गए दरवाजों को बंद कराने की मांग की है।
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समझौता भी हो चुका है रद्द
नगर निगम ने वैसे तो कुल 37 पार्काें को गोद दिया था। इसमें नेहरूनगर के एक निजी स्कूल और एक निजी संस्था को दिए गए पार्क के समझौते को रद्द किया जा चुका है। इन पार्कों के विषय में भी लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ताला डालकर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है, जबकि समझौते में आम लोगों की सुविधा, घूमने, टहलने आदि का ध्यान रखने की बात स्पष्ट तौर पर लिखी हुई थी।
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जिम्मेदार बोले : शिकायत मिली तो होगा निरीक्षण
उद्यान अधिकारी डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि पार्क गोद योजना का उद्देश्य केवल पार्कों का सुंदरीकरण और रखरखाव करना है। आम जनता का प्रवेश रोकने या पार्क की ओर निजी दरवाजा खोलने की अनुमति नहीं है। ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित पार्क का निरीक्षण कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर पार्क का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा। नियम तोड़ने पर दो पार्कों को वापस भी ले लिया गया है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ पार्कों को गोद लेने वाले लोगों और संस्थाओं ने उनका स्वरूप ही बदल दिया है। पार्कों में आम नागरिकों की आवाजाही रोकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सुबह-शाम टहलने और बच्चों के खेलने के लिए बने पार्कों के निजी इस्तेमाल की भी शिकायत है। कुछ लोगों ने पार्क की ओर अपने भवनों के दरवाजे खोल लिए हैं।
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इससे पार्कों के मूल स्वरूप और सार्वजनिक उपयोग पर असर पड़ रहा है। शिकायतकर्ता नवीन शर्मा ने बताया कि निगरानी के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के कारण योजना का अपेक्षित लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। इंदिरापुरम निवासी मुरारी लाल समेत अन्य लोगों ने नगर आयुक्त से गोद दिए गए सभी पार्कों की जांच कराने की मांग की। पार्षद नरेश जाटव ने अवैध रूप से खोले गए दरवाजों को बंद कराने की मांग की है।
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समझौता भी हो चुका है रद्द
नगर निगम ने वैसे तो कुल 37 पार्काें को गोद दिया था। इसमें नेहरूनगर के एक निजी स्कूल और एक निजी संस्था को दिए गए पार्क के समझौते को रद्द किया जा चुका है। इन पार्कों के विषय में भी लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ताला डालकर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है, जबकि समझौते में आम लोगों की सुविधा, घूमने, टहलने आदि का ध्यान रखने की बात स्पष्ट तौर पर लिखी हुई थी।
जिम्मेदार बोले : शिकायत मिली तो होगा निरीक्षण
उद्यान अधिकारी डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि पार्क गोद योजना का उद्देश्य केवल पार्कों का सुंदरीकरण और रखरखाव करना है। आम जनता का प्रवेश रोकने या पार्क की ओर निजी दरवाजा खोलने की अनुमति नहीं है। ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित पार्क का निरीक्षण कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर पार्क का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा। नियम तोड़ने पर दो पार्कों को वापस भी ले लिया गया है।