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Ghaziabad News: सात अस्पताल में नहीं मिला इलाज एक दिन के शिशु की टूट गई सांस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jul 2023 12:56 AM IST
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One day old baby's breath was broken, treatment not found in seven hospitals
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की राज गार्डन कालोनी के निवासी मजदूर मोहम्मद आलम और हसीना खातून के एक दिन के बेटे की इलाज न मिल पाने से मौत हो गई। उसे सांस लेने में तकलीफ थी। परिजन उसे लेकर अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे। 18 घंटे में गाजियाबाद से दिल्ली तक के सात बड़े अस्पतालों में दिखाया लेकिन भर्ती करने के बजाय हर जगह रेफर किया गया। कहीं बेड खाली नहीं होने की वजह बताई तो कहीं आईसीयू न होने की मजबूरी। आखिर में संयुक्त जिला अस्पताल से हापुड़ के रामा मेडिकल काॅलेज ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया।
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मोहम्मद आलम के भाई तैयब ने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे सामान्य प्रसव से बच्चे का जन्म जिला मिहला अस्पताल में हुआ था। डाॅक्टर ने सांस लेने में तकलीफ बताकर सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में रखा लेकिन, रात नौ बजे यह कहकर रेफर कर दिया कि हालत में सुधार नहीं है। उसे इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में रखा जाना जरूरी है और यह यहां नहीं है। इस पर वे लोग उसे एंबुलेंस से नोएडा के चाइल्ड पीजीआई ले गए। वहां आईसीयू में बेड खाली न बताकर कहीं और ले जाने के लिए कहा गया।
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रात में पहले उसे दिल्ली के लोक नारायण जय प्रकाश (एलएनजेपी) और फिर कलावती अस्पताल ले गए। दोनों जगह एक ही जवाब मिला, आईसीयू में बेड खाली नहीं है... कहीं और ले जाओ। मंगलवार सुबह दिल्ली के ही चाचा नेहरु अस्पताल ले गया। वहां भी इलाज नहीं, कहीं और ले जाने की सलाह ही मिली। इस पर वापस गाजियाबाद आए और संतोष मेडिकल काॅलेज के अस्पताल में दिखाया। यहां भर्ती न किए जाने पर संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचे। संयुक्त अस्पताल में आईसीयू न होने की मजबूरी बताकर इलाज नहीं दिया गया तो हापुड़ के रामा मेडिकल के लिए काॅलेज चल दिए। रास्ते में दोपहर तीन बजे शिशु ने दम तोड़ दिया।
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अस्पताल और इलाज न देने की वजह
1. जिला महिला अस्पताल, गाजियाबाद - आईसीयू नहीं है।
2. चाइल्ड पीजीआई, नोएडा - आईसीयू में बेड खाली नहीं है।
3. कलावती अस्पताल, दिल्ली - आईसीयू में बेड खाली नहीं है।
4. एलएनजेपी अस्पताल, दिल्ली - आईसीयू में बेड खाली नहीं है।
5. चाचा नेहरू अस्पताल, दिल्ली - हालत बहुत गंभीर है।
6. संतोष मेडिकल काॅलेज, गाजियाबाद - हालत बहुत गंभीर है।
7. संयुक्त जिला अस्पताल, गाजियाबाद - आईसीयू नहीं है।


पेट में चला गया था पानी

महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुमाता तालिब का कहना है कि हलीमा खातून ने 8वें बच्चे को जन्म दिया था। गर्भ में बच्चे के पेट में गंदा पानी चला गया था। सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसे आईसीयू की जरूरत थी। इसलिए, एंबुलेंस से चाइल्ड पीजीआई के लिए रेफर कर दिया गया था।



शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि इस मामले की पूरी जानकारी महिला अस्पताल की सीएमएमस और बच्चे के पिता से मांगी गई है। किसी भी मरीज को प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य है। अगर किसी भी अस्पताल में बच्चे को बिना इलाज वापस भेज दिया गया है तो इसकी गंभीरता से जांच कराकर पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।




पैसा होता तो निजी अस्पताल में ले जाते
मोहम्मद आलम के भाई तैयब ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा, हम मजदूर हैं, हमारे पास पैसा नहीं है, इसलिए सरकारी अस्पताल में जाना मजबूरी है। अगर हमारे पास बहुत पैसा होता तो किसी महंगे निजी अस्पताल में ले जाते। शायद वहां इलाज मिल जाता और बच्चे की जान बच जाती।
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