फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   One crore rupees cheated from 50 people, two arrested

Ghaziabad News: 50 लोगों से ठगे एक करोड़ रुपये, दो गिरफ्तार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 06 Apr 2023 12:35 AM IST
विज्ञापन
One crore rupees cheated from 50 people, two arrested
गाजियाबाद। किस्त जमा न होने पर बीच में ही बंद हुई बीमा पॉलिसी को फिर से शुरू कराकर पूरी रकम दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले दो ठगों को क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार ठग लोगों से बैंक खाते किराए पर लेकर उनमें ठगी की रकम मंगाते थे। गिरफ्तार किए गए दोनों ठग दिल्ली के रहने वाले हैं और अब तक करीब 50 से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाकर एक करोड़ की रकम ठग चुके हैं।
विज्ञापन

हाल ही में उन्होंने नूरनगर में रहने वाले एक इंजीनियर से छह लाख रुपये ठग लिए थे। अपराध शाखा के अपर पुलिस उपायुक्त सच्चिदानंद सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए ठग सिद्धार्थ (32) निवासी सेक्टर-7 रोहिणी और गौरव (27) निवासी डी-ब्लॉक हर्ष विहार है। सिद्धार्थ पहले इंश्योरेंस की किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था, जबकि गौरव कॉल सेंटर में काम करता था। यहीं से इन्होंने बीमा पॉलिसी के बारे में पूरी जानकारी ली और फिर ठगी के धंधे में उतर गए।
विज्ञापन

उनके पास से ठगी किए हुए 12.09 लाख रुपये बरामद हुए हैं। इनमें से छह लाख रुपये नूरनगर में रहने वाले इंजीनियर फूलचंद से की गई ठगी के हैं, जबकि अन्य रकम गुजरात निवासी एक शिक्षक से ठगी गई है। गुजरात पुलिस से संपर्क कर उनकी जानकारी जुटाई जाएगी। उनका कहना है कि दोनों ठगों के नंबर साइबर पोर्टल पर अपलोड किए जाने के बाद पता चल पाएगा कि उन्होंने और कहां-कहां ठगी की वारदात की हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ब्रोकर से खरीदा था पॉलिसी धारकों का डाटा
अपर पुलिस उपायुक्त ने बताया कि शातिरों ने 2019 में ब्रोकर श्रीकांत से बीमा पॉलिसी का डाटा 30 हजार रुपये में खरीदा था। जिसमें पॉलिसी धारकों का नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, पॉलिसी नंबर और धनराशि अंकित थी। इसके जरिए वह ऐसे पॉलिसी धारकों को चिह्नित करते थे जिनकी पॉलिसी पूर्व में किस्त जमा न होने की वजह से रद्द हो चुकी होती थी। उन पॉलिसी को फिर से शुरू कराने और पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर पूरी रकम दिलाने के नाम पर वह टूट चुकी किस्त की रकम अपने बैंक खातों में डलवा लेते थे। इसके बाद वह रकम को निकालकर आपस में हिस्सा बांट लेते थे।

20 फीसदी हिस्सेदारी पर किराए पर लेते थे खाते
ठगी करने वाले सिद्धार्थ और गौरव बैंक खाते अपने नाम से नहीं खुलवाते थे, बल्कि लोगों को मुनाफे की 20 फीसदी रकम हिस्सेदारी के रूप में देने का लालच देकर किराए पर लेते थे। उनके साथी सार्थक, विपिन और श्रीकांत उन्हें बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। किसी खाते में अगर एक महीने में ठगी की 10 लाख की रकम ट्रांसफर कराई तो इनमें से दो लाख रुपये बैंक खाते वाले को दिए जाते थे, बाकी आठ लाख रुपये ठग आपस में बांट लेते थे।


तीन-चार वारदात के बाद तोड़ देते थे मोबाइल और सिम
पुलिस से बचने के लिए ठग ऐसा प्लान बनाते थे कि उन्हें कोई ट्रेस न कर सके। अपर पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पकड़े गए ठग सिद्धार्थ और गौरव ठगी की तीन-चार वारदात करने के बाद मोबाइल और सिम तोड़कर फेंक देते थे। इसके बाद उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था। इसके बाद अगली वारदात करने के लिए वह फिर से नया सिम और मोबाइल खरीद लेते थे। दिल्ली का ही एक युवक उन्हें सिम उपलब्ध कराता था, उसकी भी तलाश की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed