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Ghaziabad News: एक गाड़ी में चलेंगे अधिकारी, सिर्फ कानून-व्यवस्था की स्थिति में साथ रहेगा एस्कॉर्ट
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गाजियाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईंधन बचाने की अपील का असर गाजियाबाद प्रशासन में भी दिखने लगा है। जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ ने सभी विभागाध्यक्षों को अनावश्यक वाहनों के प्रयोग से बचने और कारपूलिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने अपनी एस्कॉर्ट व्यवस्था भी हटाने का निर्णय लिया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में ही एस्कॉर्ट वाहन का उपयोग किया जाएगा, जबकि सामान्य परिस्थितियों में एक से अधिक वाहनों का काफिला लेकर चलने से बचना होगा। उन्होंने अधिकारियों को एक ही वाहन में साझा यात्रा करने की सलाह दी है।
ऑनलाइन बैठकों पर जोर, फिजिकल मीटिंग सीमित होंगी
प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बड़े मामलों को छोड़कर अधिकांश बैठकों को अब ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने विभागों को भी निर्देश दिए हैं कि जरूरत न होने पर कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने के बजाय वर्चुअल संवाद को प्राथमिकता दी जाए। इसका उद्देश्य समय और ईंधन दोनों की बचत करना है।
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जनता से भी सहयोग की अपील
जिलाधिकारी ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें और आवश्यकता अनुसार ही यात्रा करें। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल के दौरान वर्क फ्रॉम होम मॉडल सफल रहा था, जिसे अब भी जरूरत के अनुसार अपनाया जा सकता है। उनका कहना है कि यह पहल देशहित में ऊर्जा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।
विधायकों ने भी घटाया काफिला, इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुझान
प्रशासन की इस पहल का असर जनप्रतिनिधियों पर भी देखने को मिल रहा है। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने बताया कि वे स्थानीय कार्यक्रमों में कई बार पैदल पहुंच रहे हैं और अब उनका काफिला भी सीमित कर दिया गया है। उनके काफिले में शहर के लिए दो गाड़ियां और बाहर जाने के लिए सिर्फ एक गाड़ी रखी गई है। मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी पहले से ही एक ही कार का उपयोग कर रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। सदर विधायक संजीव शर्मा ने अपने काफिले को चार से घटाकर दो वाहनों तक सीमित कर दिया है और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर भी विचार कर रहे हैं।
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जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में ही एस्कॉर्ट वाहन का उपयोग किया जाएगा, जबकि सामान्य परिस्थितियों में एक से अधिक वाहनों का काफिला लेकर चलने से बचना होगा। उन्होंने अधिकारियों को एक ही वाहन में साझा यात्रा करने की सलाह दी है।
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ऑनलाइन बैठकों पर जोर, फिजिकल मीटिंग सीमित होंगी
प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बड़े मामलों को छोड़कर अधिकांश बैठकों को अब ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने विभागों को भी निर्देश दिए हैं कि जरूरत न होने पर कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने के बजाय वर्चुअल संवाद को प्राथमिकता दी जाए। इसका उद्देश्य समय और ईंधन दोनों की बचत करना है।
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जनता से भी सहयोग की अपील
जिलाधिकारी ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें और आवश्यकता अनुसार ही यात्रा करें। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल के दौरान वर्क फ्रॉम होम मॉडल सफल रहा था, जिसे अब भी जरूरत के अनुसार अपनाया जा सकता है। उनका कहना है कि यह पहल देशहित में ऊर्जा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।
विधायकों ने भी घटाया काफिला, इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुझान
प्रशासन की इस पहल का असर जनप्रतिनिधियों पर भी देखने को मिल रहा है। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने बताया कि वे स्थानीय कार्यक्रमों में कई बार पैदल पहुंच रहे हैं और अब उनका काफिला भी सीमित कर दिया गया है। उनके काफिले में शहर के लिए दो गाड़ियां और बाहर जाने के लिए सिर्फ एक गाड़ी रखी गई है। मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी पहले से ही एक ही कार का उपयोग कर रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। सदर विधायक संजीव शर्मा ने अपने काफिले को चार से घटाकर दो वाहनों तक सीमित कर दिया है और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर भी विचार कर रहे हैं।