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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   Now Namo Bharat is not far from Meerut...RRTS corridor reached across Partapur railway line

Ghaziabad News: अब नमो भारत मेरठ से दूर नहीं...परतापुर रेलवे लाइन के पार पहुंचा आरआरटीएस कॉरीडोर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 29 Nov 2023 12:53 AM IST
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Now Namo Bharat is not far from Meerut...RRTS corridor reached across Partapur railway line
मेरठ। दुहाई तक दौड़ रही नमो भारत जल्द ही मेरठ तक रफ्तार भरेगी। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर ने परतापुर से गुजर रही रेलवे लाइन को मंगलवार को पार कर लिया है। इस प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा कर लिया गया है। इसमें दो पोर्टल पिलर्स (यू शैल बीम) निर्मित किए गए हैं और उसके ऊपर स्टील से बने दो स्पेशल स्पैन को स्थापित किया गया है।
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शहरवासियों को मेट्रो की सुविधा प्रदान करने के लिए परतापुर स्थित रेलवे लाइन को पार करना अनिवार्य था। सड़क मार्ग पर यातायात के लिए पहले से ही एक फ्लाईओवर है। आरआरटीएस कॉरिडोर को रेलवे लाइन को पार करने के लिए दो स्पेशल स्टील स्पैनों को निर्धारित योजना के तहत, रेलवे से ब्लॉक करके उच्च क्षमता वाली क्रेनों की सहायता से स्थापित किया गया है। इन स्टील स्पैन्स पर रेल के आने और जाने के लिए दो ट्रैक बनाए जाएंगे। एनसीआरटीसी का लक्ष्य है कि 82 किमी लंबे संपूर्ण दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ कॉरिडोर को जून 2025 तक जनता के लिए संचालित कर दिया जाए
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रेलवे लाइन को 19 मीटर की ऊंचाई से पार करेगी रैपिडएक्स
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स ने बताया कि इन दोनों स्टील स्पैन की लंबाई लगभग 45 मीटर है और इनका वजन करीब 350 टन (प्रत्येक) है। इन स्टील स्पैन की विशेषता यह है कि इन्हें कम्पोजिट स्टील की मदद से तैयार किया गया है। आरआरटीएस कॉरिडोर के बन जाने पर यहां पर नमो भारत ट्रेनें रेलवे लाइन को करीब 19 मीटर की ऊंचाई पर पार करेंगी। दिल्ली से मेरठ की ओर मेरठ साउथ स्टेशन, मेरठ का पहला स्टेशन है। इसके बाद दूसरा स्टेशन परतापुर होगा। यहां पर स्थापित स्पेशल स्टील स्पैन इन दोनों स्टेशनों को आपस में जोड़ेंगे।
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विशेष परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाला स्पेशल स्पैन का हुआ प्रयोग
आरआरटीएस कॉरिडोर के एलिवेटेड सेक्शन में वायाडक्ट के निर्माण के लिए एनसीआरटीसी आमतौर पर औसतन 34 मीटर की दूरी पर पिलर निर्माण करता है। हालांकि, कुछ जटिल क्षेत्रों में जहां कॉरिडोर नदियों, पुलों, रेल क्रॉसिंग, मेट्रो कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे या ऐसे अन्य मौजूदा ढांचों को पार कर रहा है, वहां पिलर्स के बीच इस दूरी को बनाए रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। ऐसे क्षेत्रों में पिलर्स को जोड़ने के लिए स्पेशल स्पैन का उपयोग किया जाता है।
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