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Ghaziabad News: एनआरएचएम घोटाले के दो मामलों में नहीं हुई गवाही
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गाजियाबाद। एनआरएचएम घोटाले के दो मामलों में सोमवार को सीबीआई कोर्ट में सुनवाई होनी थी लेकिन दोनों ही मामलों में गवाह उपस्थित नहीं हुए। पहले मामले में पूर्व मंत्री व सपा सांसद बाबू सिंह कुशवाहा और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा समेत अन्य आरोपी हैं। जबकि दूसरे मामले में अनंत मिश्रा के साथ उनके माता-पिता आरोपी हैं। पूर्व मंत्री अनंत मिश्रा अदालत में उपस्थित हुए, जबकि बाबू सिंह कुशवाहा गैरहाजिर थे। उनकी ओर से हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया गया। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख तय की है।
मामला वर्ष 2007 से 2011 के बीच एनआरएचएम योजना के तहत हुए घोटाले से जुड़ा है। सीबीआई ने जांच के बाद पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा, बाबू सिंह कुशवाहा, दवा कारोबारी महेंद्र कुमार पांडेय और रईस आलम सिद्दीकी को आरोपी बनाया था। आरोप है कि अनंत मिश्रा ने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए दवा खरीद में अनियमितताओं को बढ़ावा दिया और दवा कारोबारियों के इशारे पर 72 जिलों में नियमों को ताक पर रखकर डीपीओ यानी सीएमओ परिवार कल्याण की नियुक्तियां कीं। इसके एवज में 15 से 20 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई। बाद में इन्हीं कारोबारियों को दवा आपूर्ति के आदेश दिलवाकर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया। सीबीआई के अनुसार अनंत मिश्रा ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए अपने पिता दिनेश मिश्रा और मां विमला मिश्रा के नाम से कंपनी बनाई और संपत्ति खरीदी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई चल रही है, लेकिन सोमवार को गवाह न पहुंचने के कारण सुनवाई टल गई।
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मामला वर्ष 2007 से 2011 के बीच एनआरएचएम योजना के तहत हुए घोटाले से जुड़ा है। सीबीआई ने जांच के बाद पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा, बाबू सिंह कुशवाहा, दवा कारोबारी महेंद्र कुमार पांडेय और रईस आलम सिद्दीकी को आरोपी बनाया था। आरोप है कि अनंत मिश्रा ने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए दवा खरीद में अनियमितताओं को बढ़ावा दिया और दवा कारोबारियों के इशारे पर 72 जिलों में नियमों को ताक पर रखकर डीपीओ यानी सीएमओ परिवार कल्याण की नियुक्तियां कीं। इसके एवज में 15 से 20 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई। बाद में इन्हीं कारोबारियों को दवा आपूर्ति के आदेश दिलवाकर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया। सीबीआई के अनुसार अनंत मिश्रा ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए अपने पिता दिनेश मिश्रा और मां विमला मिश्रा के नाम से कंपनी बनाई और संपत्ति खरीदी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई चल रही है, लेकिन सोमवार को गवाह न पहुंचने के कारण सुनवाई टल गई।
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