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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   No official came to inspect when the colony was being developed; now, they are designating it a flood-prone zone.

Ghaziabad News: जब काटी गई कॉलोनी तो देखने नहीं आया कोई अधिकारी, अब बता रहे डूब क्षेत्र

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:02 AM IST
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No official came to inspect when the colony was being developed; now, they are designating it a flood-prone zone.
करहेड़ा गांव की गायत्री कॉलोनी। संवाद - फोटो : Archive
साहिबाबाद। हिंडन किनारे करीब 200 एकड़ में बसी करहेड़ा की सात से आठ कालोनियाें के निवासी हर मानसून में जल भराव से जूझते हैं। कभी सिटी फॉरेस्ट के रास्ते तो कभी नूरनगर श्मशान घाट की ओर से पानी घुस जाता है। स्थानीय लोग जब यहां जल भराव की शिकायत करते हैं तो अधिकारी उनको डूब क्षेत्र का हवाला देकर यहां से पलायन करने की सलाह दे डालते हैं। लोगों का आरोप है कि डेढ़ दशक से लगातार डूब क्षेत्र में कॉलोनियां कट जा रही हैं और सैकड़ों लोगों ने यहां घर भी बना लिए हैं, लेकिन जिम्मेदारों की आज तक आंखे बंद हैं।
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हिंडन किनारे बसी यह कालोनियां कागजों में डूब क्षेत्र है, लेकिन आज तक कॉलोनी कटने और आबादी के बसने पर जिला प्रशासन ने कोई रोक नहीं लगाई। यह कॉलोनी करहेड़ा के किसानों के कभी खेत हुआ करते थे। किसानों से कॉलोनाइजर ने तो कुछ जगह पर बिल्डरों और कई किसानों ने भी यहां कॉलोनी काट दी। वर्ष 2009-2010 से यहां कॉलोनी काटी जा रही हैं। जब शुरुआत से ही यह डूब क्षेत्र था तो अधिकारियों ने अनदेखी कर प्लॉटिंग क्यों होने दी। डूब क्षेत्र की कालोनियों में दस हजार लोग रह रहे हैं। इलाके में नगर निगम ने सड़क से लेकर सीवर की भी सुविधा दी है। स्थानीय निवासी मनिकांत का कहना है कि सारी सुविधाएं हैं और सब काम हो रहा है, लेकिन जब शिकायत लेकर जाओ तो अधिकारी डूब क्षेत्र कहकर लोगों को डराते हैं। निवासी संजीत यादव का कहना है कि यदि डूब क्षेत्र है तो यहां काॅलोनी बसनी ही नहीं चाहिए थी। समय रहते अधिकारी कदम उठाते तो यहां बसावट ही नहीं होती।
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दस वर्ष में प्रापर्टी में आया बूम
पिछले दस वर्षों में यहां प्रॉपर्टी के दामों में खूब उछाल आया। जिन जमीनों की कीमत वर्ष 2010 में छह से दस हजार प्रति वर्गगज हुआ करती थीं, वही अब 50 से 60 हजार रुपये प्रति वर्गगज बिक रहा है। यहां 20 फीट के रास्ते पर जहां 60 से 65 हजार रुपये की दी है तो 15 फीट रास्ते पर 40 हजार रुपये प्रति वर्गगज के रेट है।
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30 से 40 हजार रुपये में मिलता है विद्युत कनेक्शन
विद्युत कनेक्शन के लिए लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। लोगों का आरोप है कि ऊर्जा निगम कनेक्शन के नाम पर 72 रुपये प्रति फीट के अनुसार राशि लेते हैं। करीब 50 वर्ग गज के प्लॉट पर कनेक्शन के लिए 30 से 40 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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सिंचाई विभाग के कागजों में हिंडन किनारे बसी करहेड़ा गांव की काॅलोनियों को डूब क्षेत्र में ही शामिल है। मानसून व नदी में जल स्तर बढ़ने के साथ ही हर बार यहां लोगों को सचेत कर दिया जाता है। राजकुमार वर्ण, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग

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डूब क्षेत्र में कैसे कॉलोनी कट गई, इस संबंध में जीडीए से रिपोर्ट मांगी जाएगी। यहां आबादी बसने से क्यों नहीं रोका गया, इसकी जांच कराई जाएगी। अंजनी कुमार, एडीएम एफआर
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